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क्या महिलाओं की डिजिटल सुरक्षा को लेकर एनसीडब्ल्यू ने सरकार को 200 से अधिक सिफारिशें दी हैं?

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क्या महिलाओं की डिजिटल सुरक्षा को लेकर एनसीडब्ल्यू ने सरकार को 200 से अधिक सिफारिशें दी हैं?

सारांश

राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने महिलाओं की डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण सिफारिशें की हैं। इन सिफारिशों में मौजूदा कानूनों में संशोधन की आवश्यकता है, ताकि महिलाओं को साइबर अपराधों से सुरक्षित रखा जा सके। जानिए इस रिपोर्ट के प्रमुख बिंदुओं के बारे में।

मुख्य बातें

डिजिटल सुरक्षा के लिए 200 से अधिक सिफारिशें।
महिलाओं के लिए साइबर अपराध से सुरक्षा के उपाय।
कानूनों में संशोधन की आवश्यकता।
जागरूकता और शिक्षा पर जोर।
सरकार का सकारात्मक रुख ।

नई दिल्ली, 5 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने महिलाओं से जुड़े साइबर अपराधों को रोकने के लिए मौजूदा कानूनों में संशोधन की सिफारिश की है। यह सिफारिश विधि एवं न्याय मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और गृह मंत्रालय को भेजी गई है।

यह रिपोर्ट एक साल लंबे राष्ट्रीय परामर्श का परिणाम है। इसका उद्देश्य भारत के साइबर कानूनों को महिलाओं के दृष्टिकोण से मजबूत बनाना है। परामर्श में पंजाब, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, गुजरात, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ में आठ क्षेत्रीय बैठकें हुईं। इसके बाद नई दिल्ली के विज्ञान भवन और गुवाहाटी के राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में दो राष्ट्रीय बैठकें आयोजित की गईं।

एनसीडब्ल्यू की अध्यक्ष विजया राहतकर ने कहा कि डिजिटल दुनिया ने महिलाओं को सीखने, व्यापार करने और अपनी बात कहने के नए अवसर दिए हैं। लेकिन, इससे खतरे भी बढ़े हैं। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि तकनीक महिलाओं को सशक्त बनाए, न कि शोषण का साधन बने। इस रिपोर्ट से हम एक ऐसे साइबर वातावरण की कल्पना करते हैं, जहां कानून अपराधियों को सजा दें और महिलाओं की इज्जत की रक्षा करें। जागरूकता से डर समाप्त हो और हर महिला आत्मविश्वास से डिजिटल दुनिया में कदम रखे।

अंतिम बैठक में विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल उपस्थित थे। उन्होंने एनसीडब्ल्यू के प्रयासों की सराहना की और महिलाओं की डिजिटल सुरक्षा के लिए सुधारों को आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया।

परामर्श में न्यायाधीश, वरिष्ठ वकील, तकनीकी विशेषज्ञ, पुलिस अधिकारी, शिक्षाविद और नागरिक समाज के सैकड़ों लोग शामिल हुए। उनके सुझावों के आधार पर दो सौ से अधिक व्यावहारिक सिफारिशें तैयार की गईं। ये सिफारिशें कानूनी और संस्थागत कमियों को दूर कर महिलाओं पर लक्षित साइबर अपराधों से निपटने में सहायक होंगी।

सिफारिशों में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 के तहत महिलाओं और बच्चों पर अपराधों के लिए धारा 66, 66सी, 66डी और 67 में सख्त सजा का प्रस्ताव है। निजी फोटो साझा करने की धमकी पर कार्रवाई और पीड़ितों के लिए मुआवजा फंड बनाना शामिल है। जिला स्तर पर मनोवैज्ञानिक और फोरेंसिक विशेषज्ञ नियुक्त करने की बात कही गई है।

आईटी नियम 2021 में यूजर डेटा तीन सौ साठ दिन तक रखना और गोपनीयता को मजबूत करने का प्रस्ताव है। खाता सत्यापन अनिवार्य करना और एआई से बनी फर्जी तस्वीरों को नियमों में शामिल करना आवश्यक बताया गया है। लिंग आधारित उत्पीड़न, प्लेटफॉर्म पारदर्शिता, एआई जांच, पीड़ित सहायता और विदेशी कंटेंट नियंत्रण के नए नियम सुझाए गए हैं।

डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2023 में संवेदनशील डेटा और लिंग आधारित नुकसान की परिभाषा दी जाए। सख्त सहमति और 24 घंटे में उल्लंघन रिपोर्ट करना अनिवार्य हो। 12 घंटे में गैर-सहमति कंटेंट हटाना आवश्यक बताया गया है। डेटा दुरुपयोग पर ग्रेडेड सजा और गुमनाम शिकायत का विकल्प रखा जाए। पीओएसएच अधिनियम 2013 में डिजिटल उत्पीड़न और वर्क फ्रॉम होम को कवर करना शामिल है।

आंतरिक समितियों के लिए डिजिटल सबूत नियम और तकनीकी सहायता दी जाए। महिलाओं का अश्लील चित्रण अधिनियम 1986 में ऑनलाइन और ओटीटी कंटेंट शामिल हो। 48 घंटे में कार्रवाई और प्लेटफॉर्म की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। पीओसीएसओ अधिनियम 2012 में डिजिटल हेरफेर और ऑनलाइन ग्रूमिंग को अपराध माना जाए। सजा बढ़ाई जाए और बच्चे की गुमनामी सुरक्षित रहे। रिपोर्ट न करने पर सोशल मीडिया को सजा का प्रावधान हो।

भारतीय न्याय संहिता 2023 में शिकायतकर्ता की पहचान छिपाई जाए। साइबरबुलिंग, ट्रोलिंग, डीपफेक और गोपनीयता उल्लंघन शामिल हों। प्लेटफॉर्म को छत्तीस घंटे में हानिकारक कंटेंट हटाना पड़े। भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 में मेटाडेटा को सबूत माना जाए और तेज फोरेंसिक जांच हो। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 में पीड़ित बयान जल्द रिकॉर्ड हों और डिजिटल सबूत प्रबंधन बेहतर हो।

यह रिपोर्ट डिजिटल अधिकार, गोपनीयता, प्लेटफॉर्म जवाबदेही, फोरेंसिक क्षमता और जागरूकता पर जोर देती है। यह 2024-25 कानून समीक्षा के लिए सबसे बड़ी समीक्षा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वे न केवल कानूनी बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण हैं। हमें इस दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि हर महिला सुरक्षित महसूस कर सके।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनसीडब्ल्यू की रिपोर्ट में क्या सिफारिशें शामिल हैं?
रिपोर्ट में महिलाओं की सुरक्षा और डिजिटल अधिकारों को मजबूत करने के लिए 200 से अधिक सिफारिशें शामिल हैं, जैसे कि कानूनों में संशोधन और नई नीतियों का निर्माण।
क्या सरकार ने इन सिफारिशों पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
हां, विधि एवं न्याय मंत्री ने एनसीडब्ल्यू के प्रयासों की सराहना की है और सुधारों को आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया है।
यह रिपोर्ट कब प्रस्तुत की गई?
यह रिपोर्ट 5 नवंबर को प्रस्तुत की गई है।
क्या इस रिपोर्ट का असर महिलाओं की सुरक्षा पर पड़ेगा?
यह रिपोर्ट महिलाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, यदि इसे प्रभावी रूप से लागू किया गया।
इस रिपोर्ट में कौन-कौन से क्षेत्र शामिल हैं?
इस रिपोर्ट में पंजाब, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, गुजरात, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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