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एनसीडब्ल्यू और दिल्ली पुलिस की उच्च स्तरीय बैठक: महिला सुरक्षा समन्वय पर 12 मई को हुई समीक्षा

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एनसीडब्ल्यू और दिल्ली पुलिस की उच्च स्तरीय बैठक: महिला सुरक्षा समन्वय पर 12 मई को हुई समीक्षा

सारांश

राष्ट्रीय महिला आयोग और दिल्ली पुलिस ने 12 मई को उच्च स्तरीय बैठक कर महिला सुरक्षा पर संस्थागत समन्वय मज़बूत करने की प्रतिबद्धता जताई। साइबर सामग्री हटाने का समय 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे किया गया और ऑल-वुमन पुलिस स्टेशन स्थापित करने की प्रक्रिया जारी है।

मुख्य बातें

एनसीडब्ल्यू अध्यक्ष विजया रहाटकर की अध्यक्षता में 12 मई 2025 को दिल्ली पुलिस मुख्यालय में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित हुई।
आपत्तिजनक ऑनलाइन सामग्री हटाने का समय 36 घंटे से घटाकर लगभग 3 घंटे किया गया।
पीसीआर टीमें औसतन 5 से 7 मिनट में घटनास्थल पर पहुँचती हैं।
दिल्ली पुलिस में महिलाओं की भागीदारी अब लगभग 20 प्रतिशत तक पहुँची।
ऑल-वुमन पुलिस स्टेशन स्थापित करने की दिशा में काम जारी।
2024-2025 में ऑनलाइन अपराधों में वृद्धि, फॉरेंसिक रिपोर्ट में देरी और नाबालिगों की संलिप्तता पर गंभीर चर्चा हुई।

राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने 12 मई 2025 को दिल्ली पुलिस मुख्यालय में महिला सुरक्षा को लेकर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की। बैठक की अध्यक्षता एनसीडब्ल्यू अध्यक्ष विजया रहाटकर ने की और इसमें दिल्ली पुलिस के शीर्ष अधिकारियों के साथ संस्थागत समन्वय को और प्रभावी बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब राजधानी में महिलाओं के खिलाफ ऑनलाइन अपराधों में वृद्धि की रिपोर्टें सामने आ रही हैं।

बैठक में उठाए गए मुख्य मुद्दे

एनसीडब्ल्यू अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कहा कि घरेलू हिंसा के मामलों में संरक्षण अधिकारियों और पुलिस के बीच बेहतर तालमेल ज़रूरी है, ताकि पीड़ित महिलाओं को समय पर सहायता और न्याय सुनिश्चित हो सके। उन्होंने स्टॉकिंग जैसे अपराधों को अत्यंत गंभीरता से लेने पर जोर दिया, यह कहते हुए कि ये छोटे दिखने वाले अपराध आगे चलकर बड़ी घटनाओं की भूमिका बन सकते हैं।

दिल्ली पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा ने बैठक में कहा कि राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि शिकायत दर्ज करने, त्वरित प्रतिक्रिया, साइबर मामलों और पीड़ित सहायता के लिए कई नई व्यवस्थाएँ लागू की गई हैं। साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि महिलाओं की सुविधा के लिए ऑल-वुमन पुलिस स्टेशन स्थापित करने की दिशा में काम जारी है।

बैठक में शामिल प्रमुख अधिकारी

इस समीक्षा बैठक में दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी, सभी जिलों के डीसीपी, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट, साइबर सेल, महिला थानों के प्रमुख और एनसीडब्ल्यू के अधिकारी उपस्थित रहे। 2024-2025 के दौरान महिलाओं के खिलाफ दर्ज अपराधों की विस्तृत स्थिति पर चर्चा हुई, जिसमें ऑनलाइन अपराधों में बढ़ोतरी, नाबालिगों की संलिप्तता और जाँच में देरी जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया।

साइबर सेल और त्वरित प्रतिक्रिया की उपलब्धियाँ

बैठक में दिल्ली पुलिस की कई उल्लेखनीय पहलों की सराहना की गई। पीसीआर टीमें औसतन 5 से 7 मिनट में घटनास्थल पर पहुँचती हैं — इस त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था की एनसीडब्ल्यू ने विशेष रूप से प्रशंसा की। साइबर सेल की कार्यप्रणाली में भी उल्लेखनीय सुधार देखा गया है — आपत्तिजनक ऑनलाइन सामग्री हटाने का समय 36 घंटे से घटाकर लगभग 3 घंटे कर दिया गया है। गौरतलब है कि फॉरेंसिक जाँच और एफएसएल रिपोर्ट में देरी से मामलों के निपटारे पर पड़ने वाले असर को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई।

महिला थाने और तस्करी रोधी इकाई की समीक्षा

बैठक में महिला थानों की कार्यप्रणाली, घरेलू विवादों के समाधान के लिए मध्यस्थता व्यवस्था और लापता व तस्करी मामलों की जाँच के लिए एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के कामकाज की भी समीक्षा की गई। दिल्ली पुलिस की शिष्टाचार और निर्भीक जैसी जागरूकता पहलों को भी सराहा गया। उल्लेखनीय है कि दिल्ली पुलिस में महिलाओं की भागीदारी अब लगभग 20 प्रतिशत तक पहुँच गई है।

आगे की राह: साझा प्रतिबद्धता

बैठक के समापन पर एनसीडब्ल्यू और दिल्ली पुलिस ने महिलाओं की सुरक्षा, त्वरित न्याय और बेहतर शिकायत निवारण व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए आपसी समन्वय बढ़ाने पर सहमति जताई। यह बैठक दोनों संस्थाओं के बीच संस्थागत सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, और आने वाले महीनों में इसके ठोस परिणामों पर नज़र रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — न कि बैठकों की संख्या की। साइबर सामग्री हटाने का समय 36 घंटे से 3 घंटे करना एक ठोस प्रगति है, परंतु फॉरेंसिक रिपोर्ट में देरी और जाँच की सुस्त गति जैसी संरचनात्मक कमज़ोरियाँ अभी भी बनी हुई हैं। ऑल-वुमन पुलिस स्टेशन की घोषणा पहले भी हो चुकी है — इस बार समयसीमा और जवाबदेही तंत्र की अनुपस्थिति चिंताजनक है। महिला पुलिसकर्मियों की 20% भागीदारी एक उपलब्धि है, लेकिन राष्ट्रीय औसत की तुलना में यह अभी भी पर्याप्त नहीं है।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनसीडब्ल्यू और दिल्ली पुलिस की 12 मई की बैठक में क्या हुआ?
12 मई 2025 को एनसीडब्ल्यू अध्यक्ष विजया रहाटकर की अध्यक्षता में दिल्ली पुलिस मुख्यालय में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक हुई, जिसमें महिला सुरक्षा, साइबर अपराध, घरेलू हिंसा और तस्करी रोधी उपायों पर विस्तृत चर्चा की गई। दोनों संस्थाओं ने आपसी समन्वय बढ़ाने पर सहमति जताई।
दिल्ली पुलिस साइबर सेल ने ऑनलाइन सामग्री हटाने में कितना सुधार किया है?
दिल्ली पुलिस साइबर सेल ने आपत्तिजनक ऑनलाइन सामग्री हटाने का समय 36 घंटे से घटाकर लगभग 3 घंटे कर दिया है। यह महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराधों से निपटने में एक उल्लेखनीय सुधार माना जा रहा है।
दिल्ली में ऑल-वुमन पुलिस स्टेशन कब तक स्थापित होंगे?
दिल्ली पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा ने बताया कि ऑल-वुमन पुलिस स्टेशन स्थापित करने की दिशा में काम जारी है, हालाँकि अभी तक कोई निश्चित समयसीमा सार्वजनिक नहीं की गई है।
एनसीडब्ल्यू ने स्टॉकिंग के मामलों पर क्या कहा?
एनसीडब्ल्यू अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कहा कि स्टॉकिंग जैसे अपराधों को बेहद गंभीरता से लिया जाना चाहिए, क्योंकि ये आगे चलकर बड़े अपराधों का कारण बन सकते हैं। उन्होंने पुलिस से ऐसे मामलों में त्वरित और कठोर कार्रवाई की अपेक्षा जताई।
दिल्ली पुलिस में महिलाओं की कितनी भागीदारी है?
बैठक में बताया गया कि दिल्ली पुलिस में महिलाओं की भागीदारी अब लगभग 20 प्रतिशत तक पहुँच गई है। यह आँकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर है, हालाँकि विशेषज्ञों का मानना है कि इसे और बढ़ाने की ज़रूरत है।
राष्ट्र प्रेस
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