एनसीडब्ल्यू और दिल्ली पुलिस की उच्च स्तरीय बैठक: महिला सुरक्षा समन्वय पर 12 मई को हुई समीक्षा
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने 12 मई 2025 को दिल्ली पुलिस मुख्यालय में महिला सुरक्षा को लेकर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की। बैठक की अध्यक्षता एनसीडब्ल्यू अध्यक्ष विजया रहाटकर ने की और इसमें दिल्ली पुलिस के शीर्ष अधिकारियों के साथ संस्थागत समन्वय को और प्रभावी बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब राजधानी में महिलाओं के खिलाफ ऑनलाइन अपराधों में वृद्धि की रिपोर्टें सामने आ रही हैं।
बैठक में उठाए गए मुख्य मुद्दे
एनसीडब्ल्यू अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कहा कि घरेलू हिंसा के मामलों में संरक्षण अधिकारियों और पुलिस के बीच बेहतर तालमेल ज़रूरी है, ताकि पीड़ित महिलाओं को समय पर सहायता और न्याय सुनिश्चित हो सके। उन्होंने स्टॉकिंग जैसे अपराधों को अत्यंत गंभीरता से लेने पर जोर दिया, यह कहते हुए कि ये छोटे दिखने वाले अपराध आगे चलकर बड़ी घटनाओं की भूमिका बन सकते हैं।
दिल्ली पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा ने बैठक में कहा कि राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि शिकायत दर्ज करने, त्वरित प्रतिक्रिया, साइबर मामलों और पीड़ित सहायता के लिए कई नई व्यवस्थाएँ लागू की गई हैं। साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि महिलाओं की सुविधा के लिए ऑल-वुमन पुलिस स्टेशन स्थापित करने की दिशा में काम जारी है।
बैठक में शामिल प्रमुख अधिकारी
इस समीक्षा बैठक में दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी, सभी जिलों के डीसीपी, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट, साइबर सेल, महिला थानों के प्रमुख और एनसीडब्ल्यू के अधिकारी उपस्थित रहे। 2024-2025 के दौरान महिलाओं के खिलाफ दर्ज अपराधों की विस्तृत स्थिति पर चर्चा हुई, जिसमें ऑनलाइन अपराधों में बढ़ोतरी, नाबालिगों की संलिप्तता और जाँच में देरी जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया।
साइबर सेल और त्वरित प्रतिक्रिया की उपलब्धियाँ
बैठक में दिल्ली पुलिस की कई उल्लेखनीय पहलों की सराहना की गई। पीसीआर टीमें औसतन 5 से 7 मिनट में घटनास्थल पर पहुँचती हैं — इस त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था की एनसीडब्ल्यू ने विशेष रूप से प्रशंसा की। साइबर सेल की कार्यप्रणाली में भी उल्लेखनीय सुधार देखा गया है — आपत्तिजनक ऑनलाइन सामग्री हटाने का समय 36 घंटे से घटाकर लगभग 3 घंटे कर दिया गया है। गौरतलब है कि फॉरेंसिक जाँच और एफएसएल रिपोर्ट में देरी से मामलों के निपटारे पर पड़ने वाले असर को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई।
महिला थाने और तस्करी रोधी इकाई की समीक्षा
बैठक में महिला थानों की कार्यप्रणाली, घरेलू विवादों के समाधान के लिए मध्यस्थता व्यवस्था और लापता व तस्करी मामलों की जाँच के लिए एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के कामकाज की भी समीक्षा की गई। दिल्ली पुलिस की शिष्टाचार और निर्भीक जैसी जागरूकता पहलों को भी सराहा गया। उल्लेखनीय है कि दिल्ली पुलिस में महिलाओं की भागीदारी अब लगभग 20 प्रतिशत तक पहुँच गई है।
आगे की राह: साझा प्रतिबद्धता
बैठक के समापन पर एनसीडब्ल्यू और दिल्ली पुलिस ने महिलाओं की सुरक्षा, त्वरित न्याय और बेहतर शिकायत निवारण व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए आपसी समन्वय बढ़ाने पर सहमति जताई। यह बैठक दोनों संस्थाओं के बीच संस्थागत सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, और आने वाले महीनों में इसके ठोस परिणामों पर नज़र रहेगी।