राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ने 'परतवाड़ा मामले' की स्थिति पर महत्वपूर्ण बैठक की
सारांश
Key Takeaways
- राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ने परतवाड़ा मामले की समीक्षा की।
- आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
- फोरेंसिक जांच में तेजी लाने का निर्देश दिया गया है।
- डिजिटल सामग्री के दुरुपयोग पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
- पीड़ितों की सुरक्षा और गरिमा की रक्षा की जाएगी।
नई दिल्ली, 18 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने 17 अप्रैल को अमरावती में 'परतवाड़ा मामले' की स्थिति की समीक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। इस बैठक में शामिल थे पुलिस आयुक्त (अमरावती शहर) राकेश ओला, जिला मजिस्ट्रेट (अमरावती) आशीष येरेकर, पुलिस अधीक्षक (अमरावती ग्रामीण) विशाल आनंद, और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (अचलपुर) डॉ. शुभम कुमार।
जांच से पता चला है कि यह मामला कई पीड़ितों के शोषण से संबंधित है, जिसमें आपत्तिजनक सामग्री को रिकॉर्ड किया गया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रसारित किया गया। इस मामले में तकनीक के दुरुपयोग, सामग्री के प्रसार के पैमाने और पीड़ितों की सुरक्षा और गरिमा को लेकर गंभीर चिंताएं उठी हैं।
पुलिस अधीक्षक ग्रामीण विशाल आनंद ने जानकारी दी कि मुख्य आरोपी समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत दर्ज किया गया है। जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। उन्होंने बताया कि मोबाइल फोन, लैपटॉप और टैबलेट जैसी डिजिटल सामग्री को जब्त कर एफएसएल में भेजा गया है।
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने आरोपों की गंभीरता पर चिंता जताई। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि इस चरण पर और अधिक सख्त धाराएं क्यों नहीं लगाई गई? उन्होंने मीडिया रिपोर्टों और बरामद डिजिटल सामग्री के बीच के अंतर्विरोधों को भी उजागर किया और अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसी सभी सामग्री का पता लगाने और उसे बरामद करने के प्रयासों को तेज करें।
उन्होंने यह भी पूछा कि क्या ऐसी सामग्री के प्रसार में कोई वित्तीय पहलू शामिल था, जिसमें डिजिटल माध्यमों से संभावित व्यावसायिक शोषण भी शामिल हो सकता है। उन्होंने आरोपियों और उन परिसरों के बीच किसी भी संभावित संबंध के बारे में जानकारी मांगी, जहां ये घटनाएं हुई थीं।
एनसीडब्ल्यू अध्यक्ष ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे महाराष्ट्र साइबर के साथ समन्वय स्थापित करें, ताकि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से सभी आपत्तिजनक सामग्री को स्थायी रूप से हटाया जा सके और भविष्य में होने वाले नुकसान को रोका जा सके।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे फोरेंसिक जांच में तेजी लाएं और हर पांच दिन में आयोग को प्रगति रिपोर्ट सौंपें। न्याय सुनिश्चित करने और महिलाओं व लड़कियों की गरिमा की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि इस मामले में की जाने वाली सख्त और समयसीमा के भीतर की जाने वाली कार्रवाई पर बारीकी से नजर रखी जाएगी।