सोनम वांगचुक का अनशन समाप्त: सरकार ने NEET, शिक्षा सुधार पर दिया लिखित आश्वासन
सारांश
मुख्य बातें
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 24 जुलाई को अपना अनशन समाप्त कर दिया, जब केंद्र सरकार की ओर से गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में लिखित आश्वासन प्राप्त हुआ। उनकी पत्नी डॉ. गीतांजलि आंग्मो ने मीडिया को बताया कि सरकार ने आंदोलन की प्रमुख माँगें स्वीकार कर ली हैं, जिनमें NEET पेपर लीक पीड़ित परिवारों को मुआवज़ा और संसद के मानसून सत्र में शिक्षा सुधार पर चर्चा शामिल हैं।
क्या था लिखित आश्वासन
डॉ. गीतांजलि आंग्मो ने बताया, 'गुरुवार आधी रात को सरकार से लिखित में आश्वासन मिला कि विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी, NEET पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वाले बच्चे के परिजनों को मुआवज़ा दिया जाएगा, और संसद में शिक्षा परीक्षा एवं सुधारों पर चर्चा होगी।' उन्होंने यह भी कहा कि छात्र नेता सरकार के साथ बैठक के बाद ही आगे की रणनीति तय करेंगे।
सरकार और विपक्ष दोनों का समर्थन
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह गुरुवार देर रात मेदांता अस्पताल पहुँचे और सरकार की ओर से वांगचुक को लिखित आश्वासन सौंपा। इससे पहले 16 सांसद अस्पताल आए थे और विपक्ष के 65 सांसदों ने भी लिखित आश्वासन दिया कि इस मुद्दे पर संसद में चर्चा होगी। डॉ. आंग्मो ने इसे ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि सत्ता और विपक्ष दोनों ने एक साथ शिक्षा को महत्वपूर्ण मुद्दा माना है।
आंदोलन की सफलता पर प्रतिक्रिया
डॉ. गीतांजलि आंग्मो ने कहा, 'हमारे आंदोलन ने पूरे देश को जगा दिया है। NEET पेपर लीक एक लक्षण था, लेकिन असली वजहें शिक्षा व्यवस्था में गहरी जड़ें जमाए हुए हैं। हमें उम्मीद है कि यह सरकार के लिए एक चेतावनी भरी सीख होगी।' उन्होंने इस आंदोलन को सफल बताया और कहा कि इसीलिए सोनम वांगचुक ने अपना उपवास खत्म किया।
वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति
अनशन समाप्त करने के बाद सोनम वांगचुक शनिवार से अर्ध-ठोस आहार (सेमी-सॉलिड डाइट) लेना शुरू करेंगे। गौरतलब है कि वांगचुक गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी में थे। यह आंदोलन NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की माँग को लेकर शुरू हुआ था।
आगे क्या होगा
सरकार और विपक्ष के आश्वासन के अनुसार, शिक्षा सुधार पर चर्चा इसी मानसून सत्र में होनी तय है। छात्र नेता सरकार के साथ बैठक के बाद विरोध प्रदर्शन की आगे की रणनीति घोषित करेंगे। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि लिखित आश्वासन किस हद तक ठोस नीतिगत बदलाव में तब्दील होते हैं।