सोनम वांगचुक का अनशन: 20 जुलाई को खत्म होगा व्रत, अगर सांसद शिक्षा सुधार का भरोसा दें
सारांश
मुख्य बातें
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 20 जुलाई 2025 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर स्पष्ट किया कि वह अपना अनशन तभी समाप्त करेंगे, जब विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद उन्हें यह भरोसा दिलाएं कि वे संसद के मानसून सत्र में शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और सुधार का मुद्दा प्रमुखता से उठाएंगे। यह पोस्ट उन्होंने नई दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में अपनी कथित नजरबंदी के दौरान लिखी।
वांगचुक की शर्तें
वांगचुक ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'मैं 20 जुलाई को अपना अनशन खत्म कर दूंगा, अगर सरकार शिक्षा व्यवस्था में हाल की नाकामियों — जैसे पेपर लीक वगैरह — की जिम्मेदारी ले, या मैं और सीजेपी का नेतृत्व संसद पहुंचें तथा वहां सांसद और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता हमें यह भरोसा दिलाएं कि वे इस मुद्दे को संसद में उठाएंगे।' उन्होंने यह भी कहा कि यदि स्वास्थ्य कारणों से संसद पहुंचना संभव न हो, तो सांसद अस्पताल में आकर यह आश्वासन दे सकते हैं।
सफदरजंग अस्पताल में 'गैरकानूनी नजरबंदी' का दावा
वांगचुक ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि यह संदेश उन्होंने 19 जुलाई को सफदरजंग अस्पताल में अपनी 'गैरकानूनी नजरबंदी' के दौरान लिखा। उनके अनुसार, अस्पताल में उनके घूमने-फिरने, बोलने और लोगों से बातचीत करने की स्वतंत्रता पर रोक लगाई गई है। यह आरोप अभी तक प्रशासन की ओर से स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुआ है।
पत्नी गीतांजलि का बयान
इससे पहले शनिवार देर रात वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने कहा था कि यदि विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद और नेता सोमवार को सफदरजंग अस्पताल पहुंचकर वांगचुक को यह आश्वासन देते हैं कि वे संसद के मानसून सत्र में शिक्षा में जवाबदेही और शिक्षा सुधार का मुद्दा प्रमुखता से उठाएंगे, तभी वह अपना अनशन समाप्त करेंगे। आंगमो ने कहा, 'सोनम अपना अनशन तभी समाप्त करेंगे, जब राजनीतिक दलों के नेता अस्पताल में उनसे मिलकर यह आश्वासन देंगे।'
शिक्षा सुधार की मांग का व्यापक संदर्भ
वांगचुक का यह अनशन ऐसे समय में आया है जब देश में पेपर लीक की घटनाओं को लेकर व्यापक आक्रोश है और संसद का मानसून सत्र शुरू होने वाला है। गौरतलब है कि वांगचुक पहले भी लद्दाख के संवैधानिक अधिकारों को लेकर अनशन कर चुके हैं और उनकी मांगें राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनती रही हैं। यह देखना अहम होगा कि मानसून सत्र में सांसद शिक्षा सुधार के मुद्दे को कितनी प्राथमिकता देते हैं।