21 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सोनम वांगचुक का अनशन: 20 जुलाई को खत्म होगा व्रत, अगर सांसद शिक्षा सुधार का भरोसा दें

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सोनम वांगचुक का अनशन: 20 जुलाई को खत्म होगा व्रत, अगर सांसद शिक्षा सुधार का भरोसा दें

सारांश

सोनम वांगचुक ने एक्स पर पोस्ट कर साफ किया — अनशन खत्म होगा, लेकिन शर्त है। सांसद या तो संसद में मिलें या अस्पताल में आएं और शिक्षा सुधार का भरोसा दें। सफदरजंग अस्पताल में 'गैरकानूनी नजरबंदी' का दावा भी सामने आया है।

मुख्य बातें

सोनम वांगचुक ने 20 जुलाई 2025 को एक्स पर पोस्ट कर अनशन समाप्त करने की शर्त स्पष्ट की।
अनशन तभी खत्म होगा जब सांसद मानसून सत्र में शिक्षा जवाबदेही और सुधार उठाने का भरोसा दें।
वांगचुक ने सफदरजंग अस्पताल में अपनी 'गैरकानूनी नजरबंदी' का दावा किया; घूमने-बोलने पर रोक का आरोप।
आंगमो ने शनिवार देर रात सांसदों से अस्पताल पहुंचकर आश्वासन देने की अपील की।
पेपर लीक जैसी शिक्षा व्यवस्था की नाकामियों को जिम्मेदारी लेना भी वांगचुक की प्रमुख मांग है।

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 20 जुलाई 2025 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर स्पष्ट किया कि वह अपना अनशन तभी समाप्त करेंगे, जब विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद उन्हें यह भरोसा दिलाएं कि वे संसद के मानसून सत्र में शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और सुधार का मुद्दा प्रमुखता से उठाएंगे। यह पोस्ट उन्होंने नई दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में अपनी कथित नजरबंदी के दौरान लिखी।

वांगचुक की शर्तें

वांगचुक ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'मैं 20 जुलाई को अपना अनशन खत्म कर दूंगा, अगर सरकार शिक्षा व्यवस्था में हाल की नाकामियों — जैसे पेपर लीक वगैरह — की जिम्मेदारी ले, या मैं और सीजेपी का नेतृत्व संसद पहुंचें तथा वहां सांसद और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता हमें यह भरोसा दिलाएं कि वे इस मुद्दे को संसद में उठाएंगे।' उन्होंने यह भी कहा कि यदि स्वास्थ्य कारणों से संसद पहुंचना संभव न हो, तो सांसद अस्पताल में आकर यह आश्वासन दे सकते हैं।

सफदरजंग अस्पताल में 'गैरकानूनी नजरबंदी' का दावा

वांगचुक ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि यह संदेश उन्होंने 19 जुलाई को सफदरजंग अस्पताल में अपनी 'गैरकानूनी नजरबंदी' के दौरान लिखा। उनके अनुसार, अस्पताल में उनके घूमने-फिरने, बोलने और लोगों से बातचीत करने की स्वतंत्रता पर रोक लगाई गई है। यह आरोप अभी तक प्रशासन की ओर से स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुआ है।

पत्नी गीतांजलि का बयान

इससे पहले शनिवार देर रात वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने कहा था कि यदि विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद और नेता सोमवार को सफदरजंग अस्पताल पहुंचकर वांगचुक को यह आश्वासन देते हैं कि वे संसद के मानसून सत्र में शिक्षा में जवाबदेही और शिक्षा सुधार का मुद्दा प्रमुखता से उठाएंगे, तभी वह अपना अनशन समाप्त करेंगे। आंगमो ने कहा, 'सोनम अपना अनशन तभी समाप्त करेंगे, जब राजनीतिक दलों के नेता अस्पताल में उनसे मिलकर यह आश्वासन देंगे।'

शिक्षा सुधार की मांग का व्यापक संदर्भ

वांगचुक का यह अनशन ऐसे समय में आया है जब देश में पेपर लीक की घटनाओं को लेकर व्यापक आक्रोश है और संसद का मानसून सत्र शुरू होने वाला है। गौरतलब है कि वांगचुक पहले भी लद्दाख के संवैधानिक अधिकारों को लेकर अनशन कर चुके हैं और उनकी मांगें राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनती रही हैं। यह देखना अहम होगा कि मानसून सत्र में सांसद शिक्षा सुधार के मुद्दे को कितनी प्राथमिकता देते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक नैतिक मांग, और राजनीतिक दलों पर सार्वजनिक दबाव। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या सांसदों का 'भरोसा' महज एक औपचारिकता बनकर रह जाएगा या मानसून सत्र में शिक्षा सुधार पर ठोस विधायी कदम उठेंगे। 'गैरकानूनी नजरबंदी' का दावा गंभीर है और इसे सरकार की ओर से स्पष्टीकरण की मांग करता है — मीडिया कवरेज इस बिंदु पर अपेक्षाकृत उदार रही है। पेपर लीक पर राजनीतिक सहमति बनाना आसान है, लेकिन परीक्षा तंत्र में संरचनात्मक बदलाव की इच्छाशक्ति दिखाना कठिन।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनम वांगचुक अपना अनशन कब और किन शर्तों पर खत्म करेंगे?
वांगचुक ने कहा है कि वह 20 जुलाई को अनशन खत्म करेंगे, बशर्ते सांसद और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता उन्हें यह भरोसा दिलाएं कि वे मानसून सत्र में शिक्षा जवाबदेही और सुधार का मुद्दा उठाएंगे। यह आश्वासन संसद में या सफदरजंग अस्पताल में आकर दिया जा सकता है।
वांगचुक का अनशन किस मुद्दे पर है?
वांगचुक शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और सुधार की मांग को लेकर अनशन पर हैं। उन्होंने पेपर लीक जैसी हाल की नाकामियों पर सरकार से जिम्मेदारी लेने की मांग की है।
सफदरजंग अस्पताल में 'गैरकानूनी नजरबंदी' का दावा क्या है?
वांगचुक ने दावा किया है कि 19 जुलाई को सफदरजंग अस्पताल में उनके घूमने-फिरने, बोलने और लोगों से बातचीत करने की स्वतंत्रता पर रोक लगाई गई है। उन्होंने इसे 'गैरकानूनी नजरबंदी' बताया है, हालांकि प्रशासन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान अभी तक नहीं आया है।
वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने क्या कहा?
गीतांजलि जे. आंगमो ने शनिवार देर रात कहा कि सांसद और नेता सोमवार को सफदरजंग अस्पताल पहुंचकर वांगचुक को आश्वासन दें कि वे मानसून सत्र में शिक्षा सुधार का मुद्दा प्रमुखता से उठाएंगे, तभी अनशन समाप्त होगा।
सोनम वांगचुक कौन हैं और वे पहले किन मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं?
सोनम वांगचुक एक सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक हैं, जो लद्दाख के संवैधानिक अधिकारों और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दों पर भी सक्रिय रहे हैं। वह पहले भी अनशन के जरिए राष्ट्रीय ध्यान आकर्षित कर चुके हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 12 घंटे पहले
  2. कल
  3. 2 दिन पहले
  4. 2 दिन पहले
  5. 2 दिन पहले
  6. 2 दिन पहले
  7. 2 दिन पहले
  8. 2 दिन पहले