सोनम वांगचुक का ऐलान: 'छात्रों पर FIR न हो' — 25वें दिन अनशन तोड़ने की शर्त रखी
सारांश
मुख्य बातें
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 22 जुलाई को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि यदि सरकार यह लिखित भरोसा दे कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर न तो बल प्रयोग किया जाएगा, न एफआईआर दर्ज होगी और न ही पुलिस के ज़रिए उन्हें परेशान किया जाएगा, तो वे उसी दिन अपना अनशन समाप्त कर देंगे। यह उनके अनशन का 25वाँ दिन था।
वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति
वांगचुक ने वीडियो में बताया कि अनशन के 25 दिनों में उनका करीब 11 किलोग्राम वज़न घट चुका है और मांसपेशियों में भी क्षरण शुरू हो गया है। उन्होंने कहा, 'मैं अभी ज़िंदा हूँ और ठीक हूँ।' इससे पहले वे सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली में भर्ती थे, जहाँ से उन्हें मंगलवार रात मेदांता अस्पताल, गुरुग्राम स्थानांतरित किया गया।
छात्रों के संयम की सराहना
वांगचुक ने दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों की विशेष प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि छात्रों ने लाठियाँ खाईं, पर जवाबी हमला नहीं किया। कुछ तत्वों द्वारा पत्थरबाज़ी की कोशिशों के बावजूद उन्होंने धैर्य बनाए रखा। वांगचुक ने कहा, 'यह देखकर मेरा दिल पिघल गया।' उनके अनुसार, छात्रों पर हो रही बर्बरता के कारण ही उन्होंने अनशन जारी रखने का निर्णय लिया था।
नेताओं की अपील और वांगचुक की शर्त
वांगचुक ने बताया कि अनेक नेता — जिनमें मंत्री और सांसद शामिल हैं — उनसे अनशन समाप्त करने की अपील लेकर आए हैं। लगभग 65 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ उनसे आग्रह किया गया है कि वे अनशन खत्म करें और देश सेवा में वापस लौटें। वांगचुक ने कहा कि वे स्वयं भी ऐसा चाहते हैं, क्योंकि उनका काम उनके लिए बेहद ज़रूरी है।
सरकार से दो-सूत्री माँग
वांगचुक ने सरकार के समक्ष दो स्पष्ट माँगें रखीं — पहली, छात्रों पर किसी भी प्रकार का बल प्रयोग बंद हो; दूसरी, उन पर दर्ज एफआईआर वापस ली जाएँ और पुलिस के ज़रिए उन्हें परेशान न किया जाए। उन्होंने कहा, 'यदि यह आश्वासन जल्द मिल जाता है, तो मैं आज ही अनशन तोड़ दूँगा। लेकिन यदि नहीं मिलता, तो बदकिस्मती से मुझे जारी रखना पड़ेगा।' यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब छात्र आंदोलन देश के कई हिस्सों में चर्चा का विषय बना हुआ है।