सोनम वांगचुक की पत्नी का सफदरजंग अस्पताल को पत्र: 'सहमति के बिना कोई दवा या इलाज नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को 20 दिनों की भूख हड़ताल के बाद बिगड़ती सेहत के चलते 18 जुलाई (शनिवार) की सुबह नई दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके तुरंत बाद उनकी पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट को पत्र लिखकर स्पष्ट किया कि उनकी लिखित सहमति के बिना वांगचुक को कोई भी दवा या तरल पदार्थ नहीं दिया जाए।
पत्र में क्या कहा गीतांजलि ने
गीतांजलि ने अपने पत्र में लिखा, 'मेरी सख्त हिदायत और अनुरोध है कि मेरी सहमति के बिना वांगचुक को कोई भी दवा या तरल पदार्थ न दिया जाए।' उन्होंने यह भी माँग की कि जो भी दवा देने का निर्णय हो, उसकी पूर्व सूचना परिवार को दी जाए और दवाएँ परिवार स्वयं खरीदेगा।
गीतांजलि ने मेडिकल रिपोर्ट की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, 17 जुलाई को शाम 4:16 बजे वांगचुक का पोटेशियम स्तर 4.3 था और शुक्रवार तक सभी ज़रूरी स्वास्थ्य पैरामीटर सामान्य थे। उन्होंने कहा कि अस्पताल की ओर से परिवार को अब तक कोई लिखित मेडिकल रिपोर्ट नहीं दी गई है — केवल मौखिक रूप से पोटेशियम स्तर 2.9 बताया जा रहा है।
जंतर-मंतर से अस्पताल तक का घटनाक्रम
वांगचुक नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट यूजी पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के विरोध प्रदर्शन में शामिल थे। शनिवार सुबह पुलिसकर्मी विरोध स्थल पर पहुँचे और वहाँ जमा कार्यकर्ताओं तथा आम लोगों की नारेबाज़ी के बीच वांगचुक को अस्पताल ले जाया गया।
यह ऐसे समय में आया है जब नीट विवाद को लेकर देशभर में छात्र संगठनों और नागरिक समूहों का आंदोलन तेज़ हो रहा है।
CJP संस्थापक का आरोप: पुलिस ने पीटा और घसीटा
'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अभिजीत दिपके ने शनिवार को आरोप लगाया कि जब वे वांगचुक को अस्पताल ले जाए जाने के बाद जंतर-मंतर पहुँचने की कोशिश कर रहे थे, तो दिल्ली पुलिस ने उन्हें पीटा और सड़क पर घसीटा। दिपके ने पुलिस पर वांगचुक को जबरन हटाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने घोषणा की कि वे अब स्वयं भूख हड़ताल शुरू करेंगे और विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। दिल्ली पुलिस की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
आगे क्या
वांगचुक की मेडिकल स्थिति और परिवार को रिपोर्ट न दिए जाने का मुद्दा अब चिकित्सकीय पारदर्शिता के सवाल के रूप में उभर रहा है। CJP का कहना है कि आंदोलन रुकेगा नहीं। नीट विवाद पर सरकार की प्रतिक्रिया और अस्पताल प्रशासन का रुख आने वाले घंटों में निर्णायक होगा।