सोनम वांगचुक की हालत गंभीर: सफदरजंग अस्पताल ने बताया — डिहाइड्रेशन, कीटोन 3+ तक पहुँचा, इलाज से इनकार
सारांश
मुख्य बातें
जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति 18 जुलाई को और चिंताजनक हो गई, जब सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली ने दोपहर करीब 3:30 बजे जारी मेडिकल बुलेटिन में खुलासा किया कि उनके यूरिन में कीटोन का स्तर सुबह 1+ से बढ़कर दोपहर 1 बजे तक 3+ हो गया है। इसके साथ ही उनमें डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण), कॉम्पेन्सेटेड एसिडोसिस और सीरम पोटैशियम का स्तर कम होने के संकेत मिले हैं। हालाँकि, वांगचुक ने अस्पताल द्वारा सुझाए गए आईवी फ्लूइड, ओरल रीहाइड्रेशन फ्लूइड और अन्य दवाएँ लेने से स्पष्ट इनकार कर दिया है।
मेडिकल बुलेटिन में क्या कहा गया
अस्पताल के अनुसार, भर्ती के समय वांगचुक पूरी तरह होश में थे और उनकी नाड़ी, रक्तचाप तथा ऑक्सीजन स्तर सामान्य था। जाँच में रक्त शर्करा का स्तर 78 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर पाया गया। अस्पताल ने कहा, 'मरीज को आईवी फ्लूइड देने की सलाह दी गई थी, लेकिन उन्होंने सभी प्रकार के आईवी फ्लूइड, ओरल रीहाइड्रेशन फ्लूइड और अन्य दवाएँ लेने से इनकार कर दिया।' बुलेटिन में यह भी बताया गया कि उनकी लगातार निगरानी की जा रही है और उन्हें इलाज के लिए समझाने के प्रयास जारी हैं।
जंतर-मंतर की मेडिकल टीम के आरोप
जंतर-मंतर पर वांगचुक की स्वास्थ्य निगरानी कर रही डॉक्टरों की टीम के सदस्य डॉ. नितिन दिघे ने दावा किया कि उन्हें सफदरजंग अस्पताल में वांगचुक से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने कहा, 'मैं पिछले 20 दिनों से सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य निगरानी कर रहा हूँ। हमारी मेडिकल टीम भी लगातार उनकी जाँच कर रही थी, लेकिन अस्पताल में हमारे किसी भी डॉक्टर को उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी गई। वहाँ गृह मंत्रालय का एक अधिकारी मौजूद था।'
डॉ. दिघे ने यह भी आरोप लगाया कि वांगचुक को अस्पताल ले जाने का कारण उनकी टीम को नहीं बताया गया। उन्होंने दावा किया कि शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे हुई जाँच में पोटैशियम स्तर सामान्य था, जबकि अस्पताल ने इसे कम बताया। उन्होंने तर्क दिया कि पोटैशियम की दवा जंतर-मंतर पर भी दी जा सकती थी, इसलिए अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं थी। मेडिकल रिपोर्ट उनकी टीम को उपलब्ध न कराने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई।
परिवार की माँग — पारदर्शिता और डिस्चार्ज
वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने सफदरजंग अस्पताल को पत्र लिखकर जल्द से जल्द डिस्चार्ज की प्रक्रिया पूरी करने का अनुरोध किया है। उन्होंने इलाज में पारदर्शिता की कमी का हवाला देते हुए वांगचुक को परिवार की पसंद के किसी अन्य चिकित्सा केंद्र में स्थानांतरित करने की माँग की है।
अनशन की पृष्ठभूमि और अस्पताल भर्ती
गौरतलब है कि वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर थे — 21 दिनों तक। वे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के उस आंदोलन में शामिल हैं, जो 6 जून से कथित नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को लेकर प्रदर्शन कर रहा है। तबीयत बिगड़ने पर 18 जुलाई की सुबह तड़के दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देश और चिकित्सकों की सलाह पर उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया।
यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब देशभर में नीट विवाद को लेकर राजनीतिक तनाव चरम पर है। वांगचुक का इलाज स्वीकार न करना उनके विरोध के प्रतीकात्मक संकल्प को दर्शाता है, लेकिन चिकित्सकीय दृष्टि से यह स्थिति तेज़ी से जटिल होती जा रही है।