19 जुलाई 2026
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सोनम वांगचुक अस्पताल में भर्ती: विपक्ष का केंद्र पर 'सत्ता के अहंकार' का आरोप

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सोनम वांगचुक अस्पताल में भर्ती: विपक्ष का केंद्र पर 'सत्ता के अहंकार' का आरोप

सारांश

20 दिनों की भूख हड़ताल के बाद सोनम वांगचुक को पुलिस ने जंतर-मंतर से हटाया और सफदरजंग अस्पताल भेजा। विपक्ष ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया — और मानसून सत्र से ठीक पहले यह टकराव और गहरा होने के संकेत दे रहा है।

मुख्य बातें

सोनम वांगचुक को 20 दिनों की भूख हड़ताल के बाद जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया।
वांगचुक युवाओं और छात्रों की माँगों — परीक्षाओं में पारदर्शिता — के समर्थन में आंदोलन कर रहे थे।
AAP के गोपाल राय , JMM की महुआ माजी , सपा की रुचि वीरा और J&K के डिप्टी CM सुरिंदर चौधरी सहित कई विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार की आलोचना की।
JMM नेता महुआ माजी ने कहा कि 20 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र से पहले संसद तक मार्च की योजना से सरकार चिंतित थी।
सांसद मोहम्मद हनीफा जान ने बताया कि लद्दाख की जनता वांगचुक की सेहत को लेकर चिंतित है।

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद 18 जुलाई को विपक्षी दलों के नेताओं ने केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया। नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक आवाज़ों को दबाने की कोशिश बताया और वांगचुक के समर्थन में एकजुट होकर आवाज़ उठाई।

मुख्य घटनाक्रम

वांगचुक 20 दिनों से भूख हड़ताल पर थे और देश के युवाओं की माँगों — विशेषकर परीक्षाओं में पारदर्शिता — के समर्थन में जंतर-मंतर पर डटे हुए थे। उन्होंने जेनजी और छात्र आंदोलन को समर्थन देने के लिए वहाँ पहुँचे थे, जिसे 'कॉकरोच' अभियान का नाम दिया गया है। पुलिस ने उन्हें जबरन हटाया, जिसके बाद उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए अस्पताल में भर्ती कराया गया।

विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया

जम्मू-कश्मीर के डिप्टी मुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने कहा कि सोनम वांगचुक एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जिनका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा, 'यह देश महात्मा गांधी का है और संविधान के अनुसार, हम अपनी बात रख सकते हैं।'

आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता गोपाल राय ने आरोप लगाया कि सरकार बातचीत करने के बजाय 'सत्ता के अहंकार' से लोकतांत्रिक आवाज़ों को कुचलना चाहती है।

झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की नेता महुआ माजी ने कहा कि केंद्र सरकार वांगचुक के आंदोलन की ताकत से डरी हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र से पहले संसद तक मार्च की योजना थी, जिससे सरकार चिंतित थी।

समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद रुचि वीरा ने इस घटना को 'लोकतंत्र का सीधा अपमान' बताया और कहा कि सरकार के किसी भी प्रतिनिधि ने वांगचुक से संवाद नहीं किया। उन्होंने कहा, 'अघोषित आपातकाल चल रहा है।'

रायजोर दल के प्रमुख और विधायक अखिल गोगोई ने कहा कि वांगचुक के साथ हुआ बर्ताव बिल्कुल गलत था और उनकी माँग — परीक्षाओं में पारदर्शिता — में कुछ भी गलत नहीं है।

सांसद मोहम्मद हनीफा जान ने बताया कि लद्दाख की जनता वांगचुक की सेहत को लेकर चिंतित है और कई लोगों ने उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की थी।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि सोनम वांगचुक मूल रूप से लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने और संवैधानिक सुरक्षा की माँग को लेकर सक्रिय रहे हैं। इस बार उन्होंने युवाओं और छात्रों की माँगों को अपना समर्थन दिया। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में छात्र आंदोलन तेज़ हो रहे हैं और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता एक बड़ा मुद्दा बन चुकी है।

आगे क्या

मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने के साथ यह मुद्दा संसद में भी गूँजने की संभावना है। विपक्षी दल इसे सरकार के खिलाफ एक बड़े मुद्दे के रूप में उठाने की तैयारी में हैं। वांगचुक की सेहत और उनके आंदोलन की अगली दिशा पर सबकी नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सरकार की चुप्पी और किसी प्रतिनिधि द्वारा संवाद न किए जाने का तथ्य इस आरोप को बल देता है। असली सवाल यह है कि क्या छात्रों और युवाओं की वे माँगें — जिनके लिए वांगचुक खड़े हुए — संसद के भीतर सुनी जाएँगी, या सड़क पर ही दबाई जाती रहेंगी।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनम वांगचुक को अस्पताल क्यों ले जाया गया?
सोनम वांगचुक 20 दिनों से भूख हड़ताल पर थे। पुलिस ने उन्हें जंतर-मंतर से जबरन हटाया और बिगड़ती सेहत के कारण सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया।
सोनम वांगचुक किन माँगों के लिए आंदोलन कर रहे थे?
वांगचुक परीक्षाओं में पारदर्शिता और युवाओं की माँगों के समर्थन में 'कॉकरोच' अभियान को समर्थन देने जंतर-मंतर पहुँचे थे। वे मूल रूप से लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की माँग को लेकर भी सक्रिय रहे हैं।
विपक्ष ने केंद्र सरकार पर क्या आरोप लगाए?
विपक्षी नेताओं ने सरकार पर 'सत्ता के अहंकार' से लोकतांत्रिक आवाज़ें दबाने का आरोप लगाया। सपा सांसद रुचि वीरा ने इसे 'लोकतंत्र का सीधा अपमान' और 'अघोषित आपातकाल' बताया।
मानसून सत्र से इस घटना का क्या संबंध है?
JMM नेता महुआ माजी के अनुसार, 20 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र से पहले संसद तक मार्च की योजना थी। उनका कहना है कि सरकार को डर था कि देशभर से आए सांसद और नागरिक वांगचुक से मिलेंगे।
लद्दाख की जनता की क्या प्रतिक्रिया रही?
सांसद मोहम्मद हनीफा जान के अनुसार लद्दाख की जनता वांगचुक की सेहत को लेकर गहरी चिंता में है। कई लोगों ने उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की थी।
राष्ट्र प्रेस
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