सोनम वांगचुक अस्पताल में भर्ती: विपक्ष का केंद्र पर 'सत्ता के अहंकार' का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद 18 जुलाई को विपक्षी दलों के नेताओं ने केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया। नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक आवाज़ों को दबाने की कोशिश बताया और वांगचुक के समर्थन में एकजुट होकर आवाज़ उठाई।
मुख्य घटनाक्रम
वांगचुक 20 दिनों से भूख हड़ताल पर थे और देश के युवाओं की माँगों — विशेषकर परीक्षाओं में पारदर्शिता — के समर्थन में जंतर-मंतर पर डटे हुए थे। उन्होंने जेनजी और छात्र आंदोलन को समर्थन देने के लिए वहाँ पहुँचे थे, जिसे 'कॉकरोच' अभियान का नाम दिया गया है। पुलिस ने उन्हें जबरन हटाया, जिसके बाद उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए अस्पताल में भर्ती कराया गया।
विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया
जम्मू-कश्मीर के डिप्टी मुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने कहा कि सोनम वांगचुक एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जिनका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा, 'यह देश महात्मा गांधी का है और संविधान के अनुसार, हम अपनी बात रख सकते हैं।'
आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता गोपाल राय ने आरोप लगाया कि सरकार बातचीत करने के बजाय 'सत्ता के अहंकार' से लोकतांत्रिक आवाज़ों को कुचलना चाहती है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की नेता महुआ माजी ने कहा कि केंद्र सरकार वांगचुक के आंदोलन की ताकत से डरी हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र से पहले संसद तक मार्च की योजना थी, जिससे सरकार चिंतित थी।
समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद रुचि वीरा ने इस घटना को 'लोकतंत्र का सीधा अपमान' बताया और कहा कि सरकार के किसी भी प्रतिनिधि ने वांगचुक से संवाद नहीं किया। उन्होंने कहा, 'अघोषित आपातकाल चल रहा है।'
रायजोर दल के प्रमुख और विधायक अखिल गोगोई ने कहा कि वांगचुक के साथ हुआ बर्ताव बिल्कुल गलत था और उनकी माँग — परीक्षाओं में पारदर्शिता — में कुछ भी गलत नहीं है।
सांसद मोहम्मद हनीफा जान ने बताया कि लद्दाख की जनता वांगचुक की सेहत को लेकर चिंतित है और कई लोगों ने उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की थी।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक मूल रूप से लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने और संवैधानिक सुरक्षा की माँग को लेकर सक्रिय रहे हैं। इस बार उन्होंने युवाओं और छात्रों की माँगों को अपना समर्थन दिया। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में छात्र आंदोलन तेज़ हो रहे हैं और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता एक बड़ा मुद्दा बन चुकी है।
आगे क्या
मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने के साथ यह मुद्दा संसद में भी गूँजने की संभावना है। विपक्षी दल इसे सरकार के खिलाफ एक बड़े मुद्दे के रूप में उठाने की तैयारी में हैं। वांगचुक की सेहत और उनके आंदोलन की अगली दिशा पर सबकी नज़रें टिकी हैं।