18 जुलाई 2026
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सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल ले जाने पर सेलेब्स का आक्रोश, प्रकाश राज बोले — 'डर की निशानी है शांतिपूर्ण प्रदर्शन रोकना'

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सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल ले जाने पर सेलेब्स का आक्रोश, प्रकाश राज बोले — 'डर की निशानी है शांतिपूर्ण प्रदर्शन रोकना'

सारांश

जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा सफदरजंग अस्पताल ले जाने पर मनोरंजन जगत में आक्रोश फूट पड़ा। प्रकाश राज ने इसे 'डर की निशानी' कहा, विशाल डडलानी ने 'कायरता' और आर्य बब्बर ने अनुच्छेद 19 का हवाला देकर सरकार पर सवाल उठाए।

मुख्य बातें

सोनम वांगचुक को 18 जुलाई की सुबह दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले जाया, कथित तौर पर उनकी इच्छा के विरुद्ध।
म्यूज़िक कंपोज़र विशाल डडलानी ने इंस्टाग्राम पर इसे 'कायरता' करार दिया।
वरिष्ठ अभिनेता प्रकाश राज ने एक्स पर लिखा — शांतिपूर्ण प्रदर्शन रोकना 'डर की निशानी' है।
अभिनेत्री कुनिका सदानंद ने लोकतांत्रिक अधिकारों पर चिंता जताई, कहा — 'आज उनकी आवाज़, कल हमारी।' अभिनेता आर्य बब्बर ने संविधान के अनुच्छेद 19 का हवाला देते हुए पूछा — शांतिपूर्ण प्रदर्शन समाप्त कराने का अधिकार किसने दिया?

सोनम वांगचुक, जो दिल्ली के जंतर-मंतर पर लंबे समय से भूख हड़ताल पर थे, को दिल्ली पुलिस ने शनिवार, 18 जुलाई की सुबह सफदरजंग अस्पताल ले जाया। इस कार्रवाई के बाद मनोरंजन जगत में तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आईं और कई著名 सेलेब्स ने सोशल मीडिया पर सरकार व पुलिस की आलोचना की। आलोचकों का कहना है कि यह कदम लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला है।

मुख्य घटनाक्रम

जंतर-मंतर पर चल रही भूख हड़ताल के बीच दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह सफदरजंग अस्पताल पहुँचाया। कथित तौर पर यह कदम उनकी इच्छा के विरुद्ध उठाया गया, जिससे यह सवाल उठा कि किसी शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बलपूर्वक समाप्त करने का अधिकार किसे है। पुलिस ने इसे तकनीकी आधार पर उचित ठहराया, परंतु प्रदर्शनकारियों और सेलेब्स ने इसे जबरन हिरासत करार दिया।

सेलेब्स की प्रतिक्रिया

म्यूज़िक कंपोज़र विशाल डडलानी ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा, 'क्या आपने कभी ऐसी कायरता देखी है? सोनम वांगचुक को जबरदस्ती ले गए। देशवासियों आप कब जागेंगे? अगर अभी नहीं जागेंगे, तो कब जागेंगे? काश मैं किसी तरह मदद करने के लिए वहाँ होता।'

वरिष्ठ अभिनेता प्रकाश राज ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक नोट साझा करते हुए लिखा, 'दुनिया एक कायर सरकार देख रही है, जो युवाओं से बातचीत नहीं करना चाहती, बल्कि तानाशाहों की तरह बर्ताव करना चाहती है। सोनम वांगचुक को जबरदस्ती ले जाना और छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन में रुकावट डालना डर की निशानी है।'

अभिनेत्री कुनिका सदानंद ने इंस्टाग्राम पर वीडियो जारी करते हुए लिखा, 'आज जंतर-मंतर पर जो कुछ हुआ, वह हर उस नागरिक के लिए चिंता का विषय होना चाहिए, जो लोकतंत्र में विश्वास रखता है। लोकतंत्र सिर्फ चुनाव कराने का नाम नहीं है — यह अपनी बात रखने, सवाल पूछने, शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने और अपनी आवाज़ सुने जाने के अधिकार का भी नाम है।' उन्होंने आगे जोड़ा, 'आज उनकी आवाज़ दबाई जा रही है, कल हमारी भी हो सकती है।'

आर्य बब्बर का संवैधानिक तर्क

अभिनेता आर्य बब्बर ने इंस्टाग्राम पर वीडियो साझा करते हुए कहा, 'सोनम वांगचुक को तकनीकी आधार पर हिरासत में लिया गया है — यह किसी स्टैंडअप कॉमेडी जैसा लगता है।' उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 19 का हवाला देते हुए कहा कि नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा का अधिकार प्राप्त है। उनका सवाल था, 'बड़ा सवाल यह नहीं है कि उन्हें कहाँ ले जाया गया, बल्कि यह है कि किसी शांतिपूर्ण प्रदर्शन को उनकी इच्छा के खिलाफ खत्म करने का अधिकार किसने दिया?'

आम जनता और लोकतांत्रिक अधिकारों पर असर

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब देशभर में नागरिक अधिकारों और शांतिपूर्ण विरोध की सीमाओं पर बहस तेज़ है। आलोचकों का कहना है कि जब शांतिपूर्ण विरोध का जवाब बातचीत के बजाय बल प्रयोग से दिया जाता है, तो लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर सवाल उठना स्वाभाविक है। गौरतलब है कि सोनम वांगचुक लद्दाख के मुद्दों को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत हैं और उनका यह प्रदर्शन व्यापक जनसमर्थन जुटा रहा था। आगे यह देखना होगा कि सरकार प्रदर्शनकारियों से संवाद का रास्ता चुनती है या टकराव का।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन आर्य बब्बर का अनुच्छेद 19 वाला तर्क कानूनी दृष्टि से अधिक ठोस है। असली चूक मुख्यधारा की कवरेज में यह है कि वांगचुक की मूल माँगें — लद्दाख को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची का संरक्षण — इस शोर में दब गई हैं। पुलिस की कार्रवाई ने मुद्दे को व्यक्ति-केंद्रित बना दिया, जबकि असली बहस संस्थागत जवाबदेही की होनी चाहिए।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने क्यों अस्पताल ले जाया?
दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर पर चल रही भूख हड़ताल के दौरान 18 जुलाई की सुबह सफदरजंग अस्पताल ले जाया। पुलिस ने इसे तकनीकी आधार पर उचित बताया, लेकिन प्रदर्शनकारियों और सेलेब्स का आरोप है कि यह उनकी इच्छा के विरुद्ध किया गया।
किन सेलेब्स ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया?
म्यूज़िक कंपोज़र विशाल डडलानी, वरिष्ठ अभिनेता प्रकाश राज, अभिनेत्री कुनिका सदानंद और अभिनेता आर्य बब्बर ने सोशल मीडिया पर पुलिस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की। इनमें से प्रकाश राज ने एक्स पर और बाकियों ने इंस्टाग्राम पर प्रतिक्रिया दी।
प्रकाश राज ने एक्स पर क्या लिखा?
प्रकाश राज ने एक्स पर लिखा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में रुकावट डालना और सोनम वांगचुक को जबरदस्ती ले जाना 'डर की निशानी' है। उन्होंने सरकार पर युवाओं से संवाद न करने और तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
आर्य बब्बर ने संविधान के किस अनुच्छेद का हवाला दिया?
आर्य बब्बर ने संविधान के अनुच्छेद 19 का हवाला दिया, जो नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा का अधिकार देता है। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी शांतिपूर्ण प्रदर्शन को उनकी इच्छा के विरुद्ध समाप्त कराने का अधिकार किसे है।
सोनम वांगचुक किस मुद्दे पर भूख हड़ताल कर रहे थे?
सोनम वांगचुक लद्दाख से जुड़े मुद्दों को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत हैं और जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे थे। उनका यह प्रदर्शन व्यापक जनसमर्थन जुटा रहा था।
राष्ट्र प्रेस
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