18 जुलाई 2026
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निपुण भारत मिशन का विस्तार: बालवाटिका से कक्षा-5 तक तय होंगे अधिगम लक्ष्य, UP में रोडमैप तैयार

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निपुण भारत मिशन का विस्तार: बालवाटिका से कक्षा-5 तक तय होंगे अधिगम लक्ष्य, UP में रोडमैप तैयार

सारांश

उत्तर प्रदेश ने निपुण भारत मिशन को बालवाटिका से कक्षा-5 तक विस्तारित करने का रोडमैप तैयार किया है। हिंदी, गणित, अंग्रेजी और पर्यावरण अध्ययन में विषयवार अधिगम लक्ष्य, लर्निंग गैप की पहचान और शिक्षक प्रशिक्षण — यह NEP 2020 की भावना को ज़मीन पर उतारने की अब तक की सबसे व्यापक कोशिश है।

मुख्य बातें

निपुण भारत मिशन को उत्तर प्रदेश में बालवाटिका से कक्षा-5 तक विस्तारित करने की व्यापक कार्ययोजना 18 जुलाई को जारी की गई।
कक्षा-3 से 5 तक हिंदी, अंग्रेजी, गणित और पर्यावरण अध्ययन के लिए विषयवार अधिगम लक्ष्य NCF, NCERT और परख मानकों के अनुरूप तैयार होंगे।
अपर मुख्य सचिव (बेसिक शिक्षा) पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए।
लर्निंग गैप वाले विद्यार्थियों के लिए कैच-अप शिक्षण और अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग की व्यवस्था की जाएगी।
शिक्षकों को दीक्षा प्लेटफॉर्म और गतिविधि आधारित शिक्षण के ज़रिए प्रशिक्षित किया जाएगा; निपुण संकल्प कार्यशालाएँ आयोजित होंगी।
राज्य, जिला, विकासखंड और विद्यालय स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग व समीक्षा व्यवस्था लागू की जाएगी।

उत्तर प्रदेश में निपुण भारत मिशन के विस्तारीकरण की व्यापक कार्ययोजना तैयार कर ली गई है, जिसके तहत बालवाटिका से कक्षा-5 तक प्रत्येक कक्षा के लिए स्पष्ट अधिगम लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप तैयार यह रोडमैप बुनियादी शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण, परिणामोन्मुख और दक्षता आधारित बनाने की दिशा में राज्य सरकार का अब तक का सबसे व्यापक कदम माना जा रहा है। 18 जुलाई को लखनऊ से जारी निर्देशों में अपर मुख्य सचिव (बेसिक शिक्षा) पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के आदेश दिए हैं।

कार्ययोजना में क्या है खास

कक्षा-3 से 5 तक हिंदी, अंग्रेजी, गणित एवं पर्यावरण अध्ययन के लिए विषयवार और कक्षावार अधिगम लक्ष्य विकसित किए जाएंगे। इन लक्ष्यों का निर्धारण राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF), NCERT की पाठ्यपुस्तकों तथा परख के अधिगम मानकों के अनुरूप होगा। विशेषज्ञों, SCERT, DIET तथा शिक्षकों के सहयोग से दक्षताओं का निर्धारण किया जाएगा और परामर्श कार्यशालाओं के माध्यम से उन्हें अंतिम रूप दिया जाएगा।

शिक्षक क्षमता संवर्धन पर जोर

कार्ययोजना में शिक्षकों के क्षमता संवर्धन को मिशन की सफलता का प्रमुख आधार माना गया है। शिक्षकों को गतिविधि आधारित शिक्षण, दक्षता आधारित शिक्षा, TLM के प्रभावी उपयोग, डिजिटल संसाधनों तथा दीक्षा प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जाएगा। अधिगम लक्ष्यों के अंतिम निर्धारण के बाद निपुण संकल्प कार्यशालाओं के ज़रिए उन्हें विद्यालय स्तर तक लागू करने की रणनीति भी तैयार की गई है।

लर्निंग गैप और मूल्यांकन व्यवस्था

नई कार्ययोजना में पाठ्यक्रम पूरा कराने के साथ-साथ प्रत्येक बच्चे के वास्तविक सीखने के स्तर पर विशेष जोर दिया गया है। विद्यालय स्तर पर नियमित मूल्यांकन, फॉर्मेटिव असेसमेंट और अन्य शैक्षणिक आकलनों के माध्यम से बच्चों की प्रगति का निरंतर परीक्षण किया जाएगा। जिन विद्यार्थियों में लर्निंग गैप मिलेगा, उनके लिए कैच-अप शिक्षण और अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि कोई भी बच्चा निर्धारित अधिगम लक्ष्यों से पीछे न रह जाए।

समुदाय भागीदारी और मॉनिटरिंग

कार्ययोजना में बालवाटिका स्तर पर स्कूल रेडीनेस कार्यक्रम को मजबूत बनाने, विद्यालयों में पुस्तकालयों के प्रभावी उपयोग, पढ़ने की संस्कृति विकसित करने तथा अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया है। स्थानीय समुदाय और विद्यालय के बीच समन्वय बढ़ाकर बच्चों के सीखने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की भी योजना है। राज्य, जिला, विकासखंड और विद्यालय स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग एवं समीक्षा व्यवस्था विकसित की जाएगी।

आगे की राह

यह पहल ऐसे समय में आई है जब देशभर में बुनियादी शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर चिंताएँ जताई जाती रही हैं। गौरतलब है कि NEP 2020 के तहत निपुण भारत मिशन मूलतः कक्षा-3 तक के बच्चों में बुनियादी साक्षरता और संख्या-ज्ञान सुनिश्चित करने के लिए शुरू किया गया था — अब इसे कक्षा-5 तक विस्तारित करना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उत्तर प्रदेश का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी संदर्भ बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में जहाँ लाखों सरकारी स्कूलों में शिक्षक-छात्र अनुपात और बुनियादी ढाँचे की चुनौतियाँ पहले से मौजूद हैं। अधिगम लक्ष्यों का NCF और NCERT से जोड़ना सैद्धांतिक रूप से सही दिशा है, लेकिन 'फॉर्मेटिव असेसमेंट' और 'कैच-अप शिक्षण' जैसी अवधारणाएँ तभी फलीभूत होती हैं जब शिक्षकों को पर्याप्त समय, संसाधन और जवाबदेही ढाँचा मिले। यह देखना होगा कि मॉनिटरिंग व्यवस्था महज़ रिपोर्टिंग तक सीमित रहती है या वास्तविक सीखने के परिणामों को मापने का साधन बनती है।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

निपुण भारत मिशन का विस्तार क्या है और इसमें क्या नया है?
निपुण भारत मिशन को अब उत्तर प्रदेश में बालवाटिका से कक्षा-5 तक लागू किया जाएगा, जबकि पहले यह मुख्यतः प्रारंभिक कक्षाओं तक सीमित था। नई कार्ययोजना में हिंदी, अंग्रेजी, गणित और पर्यावरण अध्ययन के लिए विषयवार अधिगम लक्ष्य, लर्निंग गैप की पहचान और शिक्षक प्रशिक्षण शामिल हैं।
कक्षा-3 से 5 तक कौन-से विषयों के लिए अधिगम लक्ष्य तय होंगे?
कक्षा-3 से 5 तक हिंदी, अंग्रेजी, गणित और पर्यावरण अध्ययन के लिए विषयवार और कक्षावार अधिगम लक्ष्य विकसित किए जाएंगे। इन्हें NCF, NCERT की पाठ्यपुस्तकों और परख के अधिगम मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा।
लर्निंग गैप वाले बच्चों के लिए क्या व्यवस्था होगी?
जिन विद्यार्थियों में लर्निंग गैप पाया जाएगा, उनके लिए कैच-अप शिक्षण और अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। विद्यालय स्तर पर नियमित फॉर्मेटिव असेसमेंट के ज़रिए बच्चों की प्रगति की निरंतर निगरानी की जाएगी।
शिक्षकों को इस मिशन के तहत कैसे प्रशिक्षित किया जाएगा?
शिक्षकों को गतिविधि आधारित शिक्षण, दक्षता आधारित शिक्षा, TLM के प्रभावी उपयोग और दीक्षा प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा निपुण संकल्प कार्यशालाओं के ज़रिए अधिगम लक्ष्यों को विद्यालय स्तर तक लागू करने की रणनीति तैयार की गई है।
इस कार्ययोजना की मॉनिटरिंग कैसे होगी?
राज्य, जिला, विकासखंड और विद्यालय स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग एवं समीक्षा व्यवस्था विकसित की जाएगी। अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन की ज़िम्मेदारी सौंपी है।
राष्ट्र प्रेस
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