उत्तर प्रदेश: 32,480 प्राथमिक विद्यालय अब 'निपुण' मान्यता प्राप्त
सारांश
Key Takeaways
- 32,480 प्राथमिक विद्यालयों को 'निपुण' मान्यता मिली है।
- इन विद्यालयों में 80%25 से अधिक छात्रों ने आवश्यक दक्षता प्राप्त की है।
- सरकार द्वारा 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है।
- निपुण रैंकिंग में कई जिलों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।
- बेसिक शिक्षा में गुणवत्ता सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
लखनऊ, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों का एक महत्वपूर्ण परिणाम सामने आया है। निपुण भारत मिशन के तहत हाल के आकलन में 32,480 प्राथमिक विद्यालयों को ‘निपुण’ के रूप में मान्यता दी गई है। इन विद्यालयों में कक्षा 1 और 2 के कम से कम 80 प्रतिशत छात्रों ने भाषा और गणित में आवश्यक दक्षता प्राप्त की है।
इन विद्यालयों को 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है और उत्कृष्टता दिखाने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया जाता है। डीएलएड (डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन) प्रशिक्षुओं द्वारा किया गया यह आकलन पारदर्शी और वास्तविकता पर आधारित माना जा रहा है।
शिक्षा विभाग का मानना है कि कड़े मानकों के बावजूद, यह परिणाम गुणवत्ता में सुधार की एक स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत करता है। निपुण रैंकिंग में राज्य के कई जिलों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।
निपुण आकलन के अनुसार, सबसे अधिक निपुण विद्यालयों वाले जिलों में हरदोई (1002 विद्यालय), अलीगढ़ (969 विद्यालय), शाहजहांपुर (916 विद्यालय), महाराजगंज (874 विद्यालय) और खीरी (830 विद्यालय) प्रमुख रूप से शामिल हैं।
ये आंकड़े दर्शाते हैं कि इन जिलों में बड़ी संख्या में विद्यालयों ने निपुण मानक हासिल किया है और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के प्रयासों का ठोस असर जमीनी स्तर पर दिख रहा है। इस बार आकलन प्रक्रिया को और भी पारदर्शी बनाने के लिए डीएलएड प्रशिक्षुओं को जिम्मेदारी सौंपी गई, जिन्होंने विद्यालयों में जाकर कक्षा 1 और 2 के छात्रों की सीखने की क्षमता का वास्तविक परीक्षण किया।
निपुण भारत मॉनिटरिंग सेंटर के माध्यम से यह रिपोर्ट सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों, खंड शिक्षा अधिकारियों और प्रधानाध्यापकों के पोर्टल पर उपलब्ध कराई गई है। इससे न केवल योगी सरकार की पारदर्शिता नीति को बल मिला है, बल्कि जवाबदेही भी सुनिश्चित हुई है।
निपुण घोषित विद्यालयों के लिए सरकार ने विशेष प्रोत्साहन योजना लागू की है। प्रत्येक विद्यालय को 50 हजार रुपये की धनराशि दी जाती है, जिसका उपयोग शैक्षणिक सामग्री और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने में किया जाता है। साथ ही, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों को जिला और ब्लॉक स्तर पर सम्मानित किया जाता है। विद्यालय परिसरों में ‘निपुण विद्यालय’ का लोगो प्रदर्शित किया जाता है, जिससे उनकी पहचान अलग बनती है। निपुण परिणामों के पीछे व्यापक तैयारी की भूमिका है।
बेसिक स्कूलों के शिक्षकों को फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरसी (पढ़ने, लिखने और गणना) आधारित प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। परिषदीय विद्यालयों में स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब विकसित किए गए हैं। 2.61 लाख शिक्षकों को टैबलेट वितरण से डिजिटल शिक्षण को बढ़ावा मिला है।
ऑपरेशन कायाकल्प के तहत 1.32 लाख विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ किया गया है। स्कूल चलो अभियान के तहत 2024-25 में 13.22 लाख और 2025-26 में 15.84 लाख बच्चों का नामांकन कराया गया। 7.73 लाख आउट ऑफ स्कूल बच्चों की पहचान कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा गया। 2025-26 में लगभग 1.07 लाख परिषदीय विद्यालयों का आकलन किया गया।
कड़े मानकों के बावजूद 32,480 विद्यालयों का निपुण घोषित होना इस बात का संकेत है कि प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता में वास्तविक सुधार हुआ है।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि कम प्रदर्शन वाले विद्यालयों को चिन्हित कर उन्हें निपुण श्रेणी में लाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। प्रदेश में बेसिक शिक्षा अब केवल नामांकन तक सीमित नहीं है, बल्कि सीखने के परिणामों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
निपुण भारत मिशन के तहत मिले ये परिणाम बताते हैं कि नीति, प्रशिक्षण और निगरानी का समन्वय असर दिखा रहा है। आने वाले समय में और अधिक विद्यालयों को निपुण श्रेणी में लाने की तैयारी की जा रही है, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता को और ऊंचा उठाया जा सके।