जौहर यूनिवर्सिटी विध्वंस पर मदनी का विरोध: 'हजारों छात्रों की इमारतें गिराना उचित नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने 18 जुलाई 2026 को लखनऊ में कहा कि रामपुर स्थित जौहर यूनिवर्सिटी की इमारतों को बुलडोजर से ध्वस्त करना हजारों छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि विश्वविद्यालय में कोई कानूनी अनियमितता है तो सरकार जुर्माना लगाए या विधिसम्मत कार्रवाई करे, किंतु विध्वंस समाधान नहीं हो सकता।
मुख्य घटनाक्रम
अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर, लखनऊ में आयोजित हिंदू-मुस्लिम इत्तेहाद कॉन्फ्रेंस को संबोधित करने के बाद मदनी ने मीडिया से बातचीत में कई संवेदनशील मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि देश में नफरत का माहौल बनाया जा रहा है और इस आग को केवल प्रेम व सद्भाव से बुझाया जा सकता है।
मदनी ने कहा, 'फिरकापरस्ती की आवाज को मिलकर दबाना होगा और पूरे देश को एकजुट होकर तरक्की के लिए काम करना चाहिए।' उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी संस्था चुनावी राजनीति नहीं करती, बल्कि समाज में राष्ट्रीय एकता का संदेश देना उनका उद्देश्य है।
जौहर यूनिवर्सिटी पर मदनी का पक्ष
मदनी ने कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी को एक राजनीतिक मामला बना दिया गया है। उनके अनुसार, आजम खान भले ही राजनीतिक व्यक्ति हों, लेकिन जिस मौलाना मोहम्मद अली जौहर के नाम पर यह विश्वविद्यालय स्थापित है, उनका देश और समाज के लिए अतुलनीय योगदान रहा है।
उन्होंने तर्क दिया कि कानूनी खामी होने पर सरकार के पास जुर्माना लगाने या अन्य विधिक उपायों का विकल्प मौजूद है। हजारों छात्रों के भविष्य से जुड़ी इमारतों को ध्वस्त करना न तो न्यायसंगत है और न ही व्यावहारिक समाधान।
ज्ञानवापी और वन नेशन-वन इलेक्शन पर रुख
ज्ञानवापी विवाद पर मदनी ने कहा कि यदि आपसी बातचीत से कोई हल नहीं निकल रहा है तो अदालत को इस मामले का अंतिम निस्तारण कर देना चाहिए। उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया में अपना भरोसा जताया।
वन नेशन-वन इलेक्शन के प्रस्ताव को मदनी ने राजनीतिक एजेंडा करार दिया। उन्होंने इस मुद्दे पर विस्तार से टिप्पणी करने से परहेज करते हुए कहा कि देश में हिंदू-मुस्लिम के बीच दूरी बढ़ाने की कोशिश हो रही है, जबकि सभी धर्म प्रेम और इंसानियत का संदेश देते हैं।
पेपर लीक और संवैधानिक अधिकारों पर चिंता
मदनी ने पेपर लीक के मुद्दे पर कहा कि बार-बार पेपर लीक होने से लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है और सरकार को इस दिशा में गंभीरता से काम करना चाहिए। उनके अनुसार छात्रों का भविष्य सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।
वंदे मातरम् को अनिवार्य किए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि देश का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म के अनुसार आचरण करने का अधिकार देता है और उसी संवैधानिक भावना का सम्मान किया जाना चाहिए।
सांप्रदायिक सद्भाव का आह्वान
मदनी ने कहा कि इस्लाम हिंसा या नफरत नहीं, बल्कि मोहब्बत का संदेश देता है। उन्होंने आस्था के सम्मान की अपील करते हुए कहा कि 'अल्लाहु अकबर' और 'ॐ' दोनों अपने-अपने श्रद्धालुओं के लिए सर्वोच्च हैं और आस्था को विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने अपना संदेश इन शब्दों में समेटा: 'हम रहें या न रहें, लेकिन प्यार और मोहब्बत का पैगाम आगे बढ़ना चाहिए।'
यह बयान ऐसे समय में आया है जब जौहर यूनिवर्सिटी पर चल रही कार्रवाई राष्ट्रीय स्तर पर बहस का विषय बनी हुई है और विभिन्न धार्मिक व सामाजिक संगठन अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं।