17 जुलाई 2026
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जौहर विश्वविद्यालय विध्वंस पर कांग्रेस का योगी सरकार पर हमला, अजय राय बोले — राम मंदिर चढ़ावा विवाद से ध्यान भटकाने की कोशिश

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जौहर विश्वविद्यालय विध्वंस पर कांग्रेस का योगी सरकार पर हमला, अजय राय बोले — राम मंदिर चढ़ावा विवाद से ध्यान भटकाने की कोशिश

सारांश

रामपुर विकास प्राधिकरण के जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों पर विध्वंस आदेश को कांग्रेस ने राजनीतिक हमले का हथियार बताया। प्रदेश अध्यक्ष अजय राय का आरोप — यह कार्रवाई राम मंदिर चढ़ावा विवाद से ध्यान भटकाने की कोशिश है और शिक्षा संस्थानों के विरुद्ध चयनात्मक बुलडोज़र राजनीति का उदाहरण।

मुख्य बातें

रामपुर विकास प्राधिकरण ने 15 जुलाई 2026 को जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों को गिराने का आदेश जारी किया।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने आरोप लगाया कि सुनवाई के दिन ही 17 पृष्ठों का आदेश जारी करना प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है।
राय के अनुसार विश्वविद्यालय की स्थापना 2005 में हुई थी, जब क्षेत्र विकास प्राधिकरण के दायरे में नहीं था; प्राधिकरण का अधिकार क्षेत्र 2024 में बढ़ाया गया।
कांग्रेस ने इस कार्रवाई को राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले से ध्यान भटकाने की राजनीतिक चाल बताया।
राय ने सुझाव दिया कि सरकार विध्वंस के बजाय विश्वविद्यालय का अधिग्रहण कर उसका संचालन अपने हाथ में ले सकती है।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने 17 जुलाई 2026 को लखनऊ स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में रामपुर के जौहर विश्वविद्यालय के विरुद्ध प्रस्तावित विध्वंस कार्रवाई को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि यह कदम कानूनी आधार पर कम और राजनीतिक मंशा से अधिक प्रेरित है। राय ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार इस कार्रवाई के जरिए राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले से जनता का ध्यान हटाना चाहती है।

मुख्य घटनाक्रम

रामपुर विकास प्राधिकरण ने 15 जुलाई को जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों को गिराने का आदेश जारी किया। अजय राय ने सवाल उठाया कि जिस दिन मामले की सुनवाई हुई, उसी दिन महज कुछ घंटों के भीतर 17 पृष्ठों का विस्तृत आदेश जारी कर दिया गया — जिससे प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगता है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के अनुसार, जौहर विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2005 में सिंघमखेड़ा गाँव में हुई थी, और उस समय यह क्षेत्र रामपुर विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में नहीं, बल्कि जिला पंचायत के अधीन था। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र को विकास प्राधिकरण के दायरे में वर्ष 2024 में शामिल किया गया, इसलिए स्थापना के समय प्राधिकरण से नक्शा स्वीकृत कराने का प्रश्न ही नहीं उठता।

कांग्रेस की दलीलें

राय ने दावा किया कि विश्वविद्यालय सभी आवश्यक मानकों के अनुरूप विकसित किया गया है और यह किसी एक समुदाय विशेष का संस्थान नहीं है — यहाँ विभिन्न समुदायों के बड़ी संख्या में छात्र शिक्षा प्राप्त करते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि सरकार को पूर्व सांसद आज़म खान से राजनीतिक मतभेद हैं, तो विश्वविद्यालय को ध्वस्त करने के बजाय उसका अधिग्रहण कर संचालन अपने हाथ में लिया जा सकता है।

कांग्रेस नेता ने यह भी माँग की कि यदि विश्वविद्यालय में कोई तकनीकी या प्रशासनिक कमी है, तो उसे नियमानुसार दूर कराया जाए अथवा कंपाउंडिंग जैसी वैधानिक प्रक्रिया अपनाई जाए। उन्होंने तर्क दिया कि नियमों का पालन सभी संस्थाओं के लिए एकसमान होना चाहिए — और इसी संदर्भ में उन्होंने सवाल किया कि क्या भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सभी कार्यालयों के भवन-नक्शे नियमानुसार स्वीकृत हैं।

शिक्षा व्यवस्था पर व्यापक आरोप

अजय राय ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार शिक्षा के विस्तार के बजाय शैक्षणिक संस्थानों को कमज़ोर करने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि देश में बड़ी संख्या में विद्यालय बंद हुए हैं, नए विश्वविद्यालयों की स्थापना की गति धीमी है और मेडिकल कॉलेजों में पर्याप्त संसाधनों एवं स्टाफ की कमी बनी हुई है। वाराणसी स्थित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में पेड़ों की कटाई के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) द्वारा की गई कार्रवाई का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पर्यावरण उल्लंघन पर भी चयनात्मक रवैया अपनाया जा रहा है।

सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति

अभी तक योगी आदित्यनाथ सरकार या रामपुर विकास प्राधिकरण की ओर से कांग्रेस के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह मामला ऐसे समय में उभरा है जब उत्तर प्रदेश में राजनीतिक तनाव पहले से ही कई मोर्चों पर बढ़ा हुआ है। अब सभी की नज़रें इस पर टिकी हैं कि क्या विध्वंस आदेश को न्यायालय में चुनौती दी जाएगी और रामपुर विकास प्राधिकरण अपनी कानूनी स्थिति को किस प्रकार स्पष्ट करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तथ्यात्मक कड़ी नहीं। असली सवाल यह है कि क्या उत्तर प्रदेश में विध्वंस कार्रवाइयाँ एकसमान कानूनी मानदंडों पर आधारित हैं या चयनात्मक हैं — यह जाँच का विषय है, आरोप का नहीं। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक रही है वह यह है कि जौहर विश्वविद्यालय के हज़ारों छात्रों का शैक्षणिक भविष्य इस राजनीतिक बहस में कहीं पीछे छूट गया है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जौहर विश्वविद्यालय के विरुद्ध विध्वंस आदेश क्यों जारी किया गया?
रामपुर विकास प्राधिकरण ने 15 जुलाई 2026 को जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों को गिराने का आदेश जारी किया। आधिकारिक आधार भवन-निर्माण नियमों का कथित उल्लंघन बताया गया है, हालाँकि कांग्रेस इसे राजनीतिक कार्रवाई मान रही है।
कांग्रेस इसे राम मंदिर चढ़ावा मामले से क्यों जोड़ रही है?
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय का आरोप है कि योगी सरकार इस विध्वंस कार्रवाई का उपयोग राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के विवाद से जनता का ध्यान हटाने के लिए कर रही है। यह कांग्रेस का राजनीतिक आरोप है; सरकार ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
जौहर विश्वविद्यालय की स्थापना कब और कहाँ हुई थी?
जौहर विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2005 में रामपुर जिले के सिंघमखेड़ा गाँव में हुई थी। उस समय यह क्षेत्र रामपुर विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में नहीं था, बल्कि जिला पंचायत के अधीन था; प्राधिकरण का दायरा 2024 में बढ़ाया गया।
कांग्रेस ने इस मामले में क्या विकल्प सुझाया है?
अजय राय ने सुझाव दिया कि यदि विश्वविद्यालय में कोई तकनीकी या प्रशासनिक कमी है तो उसे कंपाउंडिंग जैसी वैधानिक प्रक्रिया से दूर किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार चाहे तो विध्वंस के बजाय विश्वविद्यालय का अधिग्रहण कर उसका संचालन अपने हाथ में ले सकती है।
इस मामले में आगे क्या हो सकता है?
अभी तक योगी सरकार या रामपुर विकास प्राधिकरण की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। संभावना है कि विध्वंस आदेश को न्यायालय में चुनौती दी जाए। विश्वविद्यालय प्रशासन और आज़म खान पक्ष की कानूनी रणनीति पर सभी की नज़रें टिकी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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