राम मंदिर दर्शन से पहले नजरबंद किए गए अजय राय, कांग्रेस नेताओं पर प्रताड़ना का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने 30 जून 2026 को आरोप लगाया कि अयोध्या में राम मंदिर के दर्शन के लिए निकलने से पहले ही पुलिस ने उन्हें नजरबंद कर दिया। राम मंदिर चढ़ावे में कथित हेराफेरी विवाद की पृष्ठभूमि में यह घटना हुई, जब कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या पहुँचा था।
नजरबंदी का विवरण
अजय राय ने आचार्य नरेंद्र देव विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस से एक वीडियो संदेश जारी किया, जिसमें उन्होंने कैमरे पर कमरे का दृश्य दिखाते हुए दावा किया कि उन्हें एक कमरे में अकेले बंद रखा गया है। उनके अनुसार कमरे का दरवाज़ा बाहर से बंद था और काफी प्रयास के बाद भी नहीं खुला। गेस्ट हाउस की बाहरी ग्रिलें भी बंद कर दी गई थीं, जिससे उनका बाहर निकलना संभव नहीं था।
मानसिक प्रताड़ना का आरोप
राय ने कहा कि उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है और उनका हालचाल लेने वाला कोई नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह भगवान राम के दर्शन किए बिना वापस नहीं लौटेंगे और अपने संकल्प पर अडिग हैं। उन्होंने राज्य सरकार और प्रशासन पर दोहरा रवैया अपनाने का भी आरोप लगाया।
केजरीवाल बनाम कांग्रेस — दोहरे मानदंड का आरोप
राय ने कहा कि एक ओर आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता अरविंद केजरीवाल को अयोध्या बुलाकर रामलला के दर्शन कराए गए और उन्हें पूरी वीआईपी सुविधाएँ दी गईं, जबकि दूसरी ओर कांग्रेस नेताओं को रोका जा रहा है। उन्होंने इसे राजनीतिक भेदभाव करार दिया।
प्रतिनिधिमंडल के अन्य नेता भी नजरबंद
अजय राय के अनुसार कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल में शामिल किशोरी लाल, उज्ज्वल रमण, राकेश राठौर, तनुज पुनिया, पूर्व विधान परिषद सदस्य दीपक सिंह, एपी गौतम, विधायक वीरेंद्र चौधरी और पूर्व विधायक मीता गौतम समेत अन्य नेताओं को भी उनके-उनके घरों में नजरबंद कर दिया गया है। यह सभी आरोप अजय राय के वीडियो बयान पर आधारित हैं; प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आगे क्या
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब राम मंदिर ट्रस्ट पर चढ़ावे में कथित हेराफेरी को लेकर विपक्ष पहले से ही सवाल उठा रहा है। कांग्रेस के इस कदम और उसके बाद की नजरबंदी से अयोध्या में राजनीतिक तनाव और गहरा होने की संभावना है। आने वाले घंटों में प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया और न्यायिक हस्तक्षेप की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।