अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी: केजरीवाल 26 जून को करेंगे रामलला के दर्शन, सरकार पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 22 जून 2025 को घोषणा की कि वे 26 जून को अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में भगवान रामलला के दर्शन के लिए जाएंगे। यह घोषणा मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के विवाद के बीच आई है, जिसने पूरे देश के सनातन समाज में गहरी पीड़ा और आक्रोश उत्पन्न किया है।
केजरीवाल का एक्स पर बयान
अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि 'अयोध्या श्री राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी से हर सनातनी बेहद दुखी है।' उन्होंने आगे कहा कि वे शुक्रवार, 26 जून को रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या जाएंगे और भगवान रामलला सरकार के दर्शन करेंगे।
सरकार पर सवाल और आरोप
केजरीवाल ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार को सीधे कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये के चढ़ावे में कथित अनियमितता सामने आने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। उनका कहना था कि इतनी बड़ी कथित चोरी के बाद भी एफआईआर दर्ज न होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने सीधे पूछा — 'आखिर सरकार किसे बचा रही है?' केजरीवाल ने यह भी कहा कि इस मामले में चाहे कोई भी व्यक्ति शामिल हो, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे कानून के दायरे में लाकर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए — क्योंकि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा मामला है।
उच्च न्यायालय में याचिका और सीबीआई जांच की मांग
इस प्रकरण से जुड़ी एक याचिका उच्च न्यायालय में दायर की गई है, जिस पर 22 जून को सुनवाई होने की संभावना जताई जा रही है। याचिका में मांग की गई है कि मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) या किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। साथ ही, चढ़ावे का पूर्ण ऑडिट नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से करवाने की भी मांग की गई है। गौरतलब है कि 19 जून को समय की कमी के कारण इस मामले पर सुनवाई नहीं हो सकी थी।
एसआईटी जांच और आगे की कार्रवाई
जांच में अब तक कई खुलासे हो चुके हैं। विशेष जांच दल (SIT) जल्द ही इस मामले की जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप सकता है, जिसके बाद मामले में बड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। इस विवाद ने राजनीतिक हलचल को भी तेज कर दिया है और यह मुद्दा लगातार राष्ट्रीय चर्चा में बना हुआ है।
यह ऐसे समय में आया है जब अयोध्या में राम मंदिर की प्रतिष्ठा और उसके प्रशासनिक प्रबंधन को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र इस मंदिर में कथित वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आना न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करता है, बल्कि मंदिर प्रशासन की पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।