11 अगस्त 2026
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राम मंदिर 'चढ़ावा चोरी' पर सपा की शर्त: सदन में चर्चा और अमित शाह की मौजूदगी ज़रूरी

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राम मंदिर 'चढ़ावा चोरी' पर सपा की शर्त: सदन में चर्चा और अमित शाह की मौजूदगी ज़रूरी

सारांश

मानसून सत्र में सपा ने सरकार के सामने दो-टूक शर्त रखी — राम मंदिर के कथित 'चढ़ावा चोरी' पर सदन में चर्चा और गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी। साथ ही सपा ने आरएसएस पर तिरंगे को लेकर 'पाखंड' का आरोप लगाया।

मुख्य बातें

सपा सांसद राम गोपाल यादव ने कहा — राम मंदिर 'चढ़ावा चोरी' पर चर्चा और अमित शाह की सदन में मौजूदगी विपक्ष की दो प्रमुख शर्तें हैं।
सपा का आरोप — सरकार इन मुद्दों पर विस्तृत बहस से जानबूझकर बच रही है।
सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि चर्चा से विपक्ष नहीं, बल्कि सरकार भाग रही है।
सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने आरएसएस पर दशकों तक मुख्यालय पर तिरंगा न फहराने का आरोप लगाते हुए इसे 'पाखंड' बताया।
'वंदे मातरम' के पूरे गायन के मुद्दे पर सपा ने ऐतिहासिक सहमति का हवाला देते हुए BJP पर इसे राजनीतिक बहस बनाने का आरोप लगाया।

संसद के मानसून सत्र में 11 अगस्त को विपक्ष और सरकार के बीच गतिरोध और गहरा हो गया, जब समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसदों ने साफ़ कहा कि सदन की कार्यवाही तभी सुचारू होगी जब सरकार दो शर्तें मानेगी — राम मंदिर के 'चढ़ावा चोरी' के आरोपों पर विस्तृत चर्चा और गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी में उस पर बहस।

विपक्ष की दो प्रमुख मांगें

सपा सांसद राम गोपाल यादव ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि विपक्ष की माँगें स्पष्ट हैं — पहली, राम मंदिर के नाम पर एकत्र चढ़ावे में कथित अनियमितताओं पर सदन में विस्तृत चर्चा हो; दूसरी, यह चर्चा गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में हो। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन मुद्दों पर बहस से जानबूझकर बच रही है।

राम गोपाल यादव के अनुसार, यदि सरकार इन दोनों शर्तों पर सहमत होती है तो संसद की कार्यवाही बिना व्यवधान के आगे बढ़ सकती है। उन्होंने सवाल उठाया कि कथित 'चंदा चोरी' के मुद्दे पर सरकार चर्चा से क्यों कतरा रही है।

दान की वैश्विक प्रकृति और पारदर्शिता का सवाल

सपा सांसद ने इस मुद्दे को केवल घरेलू नहीं, बल्कि वैश्विक बताया। उनके अनुसार, राम मंदिर के लिए भारत के साथ-साथ विदेशों में बसे रामभक्तों और हिंदू आस्था रखने वाले लोगों ने भी बड़ी मात्रा में दान और चढ़ावा दिया है। इसलिए, उनके मुताबिक, इस धन के उपयोग को लेकर पारदर्शिता का प्रश्न केवल भारत तक सीमित नहीं रहता।

अवधेश प्रसाद का सरकार पर पलटवार

सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने भी सरकार पर विपक्ष की माँगों से पीछे हटने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चर्चा से विपक्ष नहीं, बल्कि सरकार भाग रही है और विपक्ष बहस के लिए पूरी तरह तैयार है। अवधेश प्रसाद ने लाल किले से पहली बार 'वंदे मातरम' बजाए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि यह गीत भारत की 'अनेकता में एकता' की भावना का प्रतीक है।

उत्तर प्रदेश के मदरसों में 'हर घर तिरंगा' अभियान के सवाल पर उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान पूरी दुनिया में होना चाहिए और तिरंगे के पीछे स्वतंत्रता संग्राम में अनगिनत लोगों के बलिदान की गाथा है।

आरएसएस पर सपा प्रवक्ता का निशाना

सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि आरएसएस ने कई दशकों तक अपने मुख्यालय पर राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया और अब 'हर घर तिरंगा' अभियान की अगुवाई करने का दावा कर रहा है। उन्होंने इसे 'पाखंड' बताते हुए आरएसएस से स्पष्टीकरण माँगा।

आशुतोष वर्मा ने 'वंदे मातरम' के पूरे गायन के मुद्दे पर ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि जब इसे राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया गया था, तब इसके कुछ छंदों को लेकर सहमति बनाई गई थी क्योंकि बाद के छंदों में देवी दुर्गा की उपासना का उल्लेख होने से कुछ समुदायों की धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखा गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP अब इस मुद्दे को राजनीतिक बहस का हिस्सा बना रही है।

आगे क्या

मानसून सत्र में यह गतिरोध जारी रहने से संसद की उत्पादकता प्रभावित हो रही है। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार और विपक्ष दोनों पर सदन को सुचारू चलाने का दबाव है। सपा की शर्तों पर सरकार की औपचारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है, और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद के भीतर और बाहर बहस तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके नीचे एक बड़ा राजनीतिक दाँव है — राम मंदिर के दान-प्रबंधन को संसदीय जाँच के दायरे में लाना, जो अब तक धार्मिक संस्था के आंतरिक मामले के रूप में बचाया जाता रहा है। गृह मंत्री की उपस्थिति की माँग सरकार को सीधे जवाबदेही की कुर्सी पर बैठाने की कोशिश है। दूसरी तरफ, आरएसएस पर तिरंगे को लेकर उठाए गए सवाल पुराने हैं — लेकिन इन्हें मानसून सत्र के बीच उठाना विपक्ष की उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें राष्ट्रवाद के प्रतीकों पर सत्तारूढ़ दल के एकाधिकार को चुनौती दी जाती है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूकती है वह यह है कि इस गतिरोध में असली पीड़ित संसद की उत्पादकता है — और दोनों पक्षों के लिए बहस से बचना राजनीतिक रूप से फ़ायदेमंद है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सपा सांसदों ने संसद में क्या शर्त रखी है?
सपा ने दो शर्तें रखी हैं — राम मंदिर के कथित 'चढ़ावा चोरी' पर सदन में विस्तृत चर्चा और यह चर्चा गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हो। सपा सांसद राम गोपाल यादव के अनुसार, इन शर्तों के पूरा होने पर ही संसद की कार्यवाही सुचारू हो सकती है।
राम मंदिर 'चढ़ावा चोरी' विवाद क्या है?
विपक्ष का आरोप है कि राम मंदिर के नाम पर देश-विदेश से एकत्र किए गए दान और चढ़ावे में अनियमितताएँ हुई हैं। सपा का कहना है कि धार्मिक आस्था से दिए गए इस धन के उपयोग में पारदर्शिता होनी चाहिए और इस पर संसद में खुली बहस होनी चाहिए।
सपा ने आरएसएस पर क्या आरोप लगाए?
सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने दावा किया कि आरएसएस ने कई दशकों तक अपने मुख्यालय पर राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया और अब 'हर घर तिरंगा' अभियान की बात कर रहा है। उन्होंने इसे 'पाखंड' बताते हुए आरएसएस से स्पष्टीकरण माँगा।
'वंदे मातरम' के पूरे गायन पर सपा का क्या रुख है?
सपा प्रवक्ता ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि जब 'वंदे मातरम' को राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया गया था, तब इसके बाद के छंदों को लेकर सर्वसम्मति से केवल शुरुआती पंक्तियाँ चुनी गई थीं क्योंकि बाद के छंदों में देवी उपासना का उल्लेख था। उनका आरोप है कि BJP अब इसे राजनीतिक विवाद बना रही है।
मानसून सत्र में यह गतिरोध कब तक चल सकता है?
सरकार ने अभी तक सपा की शर्तों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। जब तक दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनती, संसद की कार्यवाही प्रभावित रहने की आशंका है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद के भीतर और बाहर बहस तेज़ होने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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