राम मंदिर 'चढ़ावा चोरी' पर सपा की शर्त: सदन में चर्चा और अमित शाह की मौजूदगी ज़रूरी
सारांश
मुख्य बातें
संसद के मानसून सत्र में 11 अगस्त को विपक्ष और सरकार के बीच गतिरोध और गहरा हो गया, जब समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसदों ने साफ़ कहा कि सदन की कार्यवाही तभी सुचारू होगी जब सरकार दो शर्तें मानेगी — राम मंदिर के 'चढ़ावा चोरी' के आरोपों पर विस्तृत चर्चा और गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी में उस पर बहस।
विपक्ष की दो प्रमुख मांगें
सपा सांसद राम गोपाल यादव ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि विपक्ष की माँगें स्पष्ट हैं — पहली, राम मंदिर के नाम पर एकत्र चढ़ावे में कथित अनियमितताओं पर सदन में विस्तृत चर्चा हो; दूसरी, यह चर्चा गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में हो। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन मुद्दों पर बहस से जानबूझकर बच रही है।
राम गोपाल यादव के अनुसार, यदि सरकार इन दोनों शर्तों पर सहमत होती है तो संसद की कार्यवाही बिना व्यवधान के आगे बढ़ सकती है। उन्होंने सवाल उठाया कि कथित 'चंदा चोरी' के मुद्दे पर सरकार चर्चा से क्यों कतरा रही है।
दान की वैश्विक प्रकृति और पारदर्शिता का सवाल
सपा सांसद ने इस मुद्दे को केवल घरेलू नहीं, बल्कि वैश्विक बताया। उनके अनुसार, राम मंदिर के लिए भारत के साथ-साथ विदेशों में बसे रामभक्तों और हिंदू आस्था रखने वाले लोगों ने भी बड़ी मात्रा में दान और चढ़ावा दिया है। इसलिए, उनके मुताबिक, इस धन के उपयोग को लेकर पारदर्शिता का प्रश्न केवल भारत तक सीमित नहीं रहता।
अवधेश प्रसाद का सरकार पर पलटवार
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने भी सरकार पर विपक्ष की माँगों से पीछे हटने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चर्चा से विपक्ष नहीं, बल्कि सरकार भाग रही है और विपक्ष बहस के लिए पूरी तरह तैयार है। अवधेश प्रसाद ने लाल किले से पहली बार 'वंदे मातरम' बजाए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि यह गीत भारत की 'अनेकता में एकता' की भावना का प्रतीक है।
उत्तर प्रदेश के मदरसों में 'हर घर तिरंगा' अभियान के सवाल पर उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान पूरी दुनिया में होना चाहिए और तिरंगे के पीछे स्वतंत्रता संग्राम में अनगिनत लोगों के बलिदान की गाथा है।
आरएसएस पर सपा प्रवक्ता का निशाना
सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि आरएसएस ने कई दशकों तक अपने मुख्यालय पर राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया और अब 'हर घर तिरंगा' अभियान की अगुवाई करने का दावा कर रहा है। उन्होंने इसे 'पाखंड' बताते हुए आरएसएस से स्पष्टीकरण माँगा।
आशुतोष वर्मा ने 'वंदे मातरम' के पूरे गायन के मुद्दे पर ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि जब इसे राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया गया था, तब इसके कुछ छंदों को लेकर सहमति बनाई गई थी क्योंकि बाद के छंदों में देवी दुर्गा की उपासना का उल्लेख होने से कुछ समुदायों की धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखा गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP अब इस मुद्दे को राजनीतिक बहस का हिस्सा बना रही है।
आगे क्या
मानसून सत्र में यह गतिरोध जारी रहने से संसद की उत्पादकता प्रभावित हो रही है। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार और विपक्ष दोनों पर सदन को सुचारू चलाने का दबाव है। सपा की शर्तों पर सरकार की औपचारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है, और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद के भीतर और बाहर बहस तेज़ होने की संभावना है।