राम मंदिर चढ़ावा विवाद: सपा सांसदों का संसद के बाहर प्रदर्शन, अमित शाह से सदन में जवाब की मांग
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसदों ने 6 अगस्त, गुरुवार को संसद भवन के बाहर अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर विरोध-प्रदर्शन किया। सपा सांसदों का आरोप है कि केंद्र सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर सदन में चर्चा से बच रही है और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को संसद में आकर जवाब देना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान पार्टी सांसदों ने झारखंड छात्र आंदोलन, प्रयागराज में कांग्रेस के 'स्टूडेंट्स की गूंज' कार्यक्रम की अनुमति रद्द होने और महिला आरक्षण समेत कई राष्ट्रीय मुद्दे उठाए।
मुख्य घटनाक्रम
सपा सांसदों ने एकजुट होकर मांग की कि राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर सरकार सदन में पारदर्शी चर्चा कराए और अमित शाह स्वयं इस पर स्पष्टीकरण दें। सांसदों का कहना था कि पूरे मानसून सत्र में सदन की कार्यवाही बाधित रही है। सपा सांसद इकरा हसन ने आरोप लगाया कि पूरे मानसून सत्र में सदन केवल एक दिन ही सुचारु रूप से चल सका, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि विपक्ष से वादा किया गया था कि पुलिस की कथित बर्बरता जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी, लेकिन अब तक वह वादा पूरा नहीं हुआ।
झारखंड छात्र आंदोलन पर सपा का रुख
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने झारखंड में जारी छात्र आंदोलन पर कहा कि पूरा विपक्ष छात्रों के साथ एकजुट खड़ा है। उन्होंने बताया कि छात्रों का प्रतिनिधित्व करने वाली पाँच सदस्यीय समिति राज्य सरकार से मुलाकात करने वाली है। प्रसाद के अनुसार मुख्यमंत्री की ओर से क्या आश्वासन मिलता है, यह बैठक के बाद ही स्पष्ट होगा, इसलिए फिलहाल किसी नतीजे पर पहुँचना उचित नहीं होगा।
सरकार पर विपक्ष के आरोप
सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने प्रयागराज में कांग्रेस के 'स्टूडेंट्स की गूंज' कार्यक्रम की अनुमति रद्द किए जाने को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उनका आरोप था कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) छात्रों के मुद्दों पर किसी भी तरह की चर्चा से बचना चाहती है। महिला आरक्षण के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि BJP ने 2024 के लोकसभा चुनाव में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को अपनी उपलब्धि बताकर प्रचार किया था, ऐसे में नए विधेयक की आवश्यकता क्यों पड़ रही है — यह सवाल सरकार को जवाब देना होगा।
सपा सांसद रामजी लाल सुमन ने प्रयागराज में अनुमति रद्द होने को 'तानाशाही मानसिकता' करार दिया और आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है।
पीडीए की व्यापक परिभाषा पर जोर
सपा सांसद आनंद भदौरिया ने पार्टी की पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) अवधारणा को स्पष्ट करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी ने हमेशा ब्राह्मण समाज को सम्मान दिया है। उन्होंने लखनऊ में जनेश्वर मिश्रा की जयंती का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पार्टी की सर्वसमावेशी सोच का प्रमाण है। इकरा हसन ने भी स्पष्ट किया कि पीडीए में महिलाएँ, आदिवासी, सवर्ण समाज के वंचित वर्ग और वे सभी लोग शामिल हैं जो स्वयं को उपेक्षित महसूस करते हैं।
परिसीमन और महिला अधिकारों पर सवाल
सपा सांसद अक्षय यादव ने परिसीमन के वर्तमान प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि पार्टी इसके खिलाफ है। उन्होंने छात्राओं के आंदोलनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि सरकार महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी दल को लोकतांत्रिक तरीके से कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति मिलनी चाहिए और प्रशासन का दायित्व सुरक्षा सुनिश्चित करना है, न कि आयोजन रोकना। यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब मानसून सत्र में विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है।