पाकिस्तान में महिला हिंसा के 3,172 मामले: VOPM ने ऑनर किलिंग और पीड़ित-दोष संस्कृति की निंदा की
सारांश
मुख्य बातें
वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी (VOPM) ने 25 सितंबर 2026 को पाकिस्तान में महिलाओं के विरुद्ध बढ़ती हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि देश में पीड़ित को ही दोषी ठहराने, उत्पीड़न और तथाकथित 'ऑनर किलिंग' (सम्मान के नाम पर हत्या) की संस्कृति गहरी जड़ें जमा चुकी है। संगठन के आँकड़ों के अनुसार, 2026 के पहले छह महीनों में लिंग-आधारित हिंसा के 3,172 मामले सामने आए — जो संकट की भयावह तस्वीर पेश करते हैं।
आँकड़ों की भयावह तस्वीर
VOPM द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, इन 3,172 मामलों में 644 हत्याएं, 514 यातना के मामले, 462 अपहरण, 363 आत्महत्याएं, 280 बलात्कार और 132 ऑनर किलिंग शामिल हैं। भौगोलिक दृष्टि से देखें तो इनमें से 74 प्रतिशत मामले पंजाब में और 17 प्रतिशत सिंध में दर्ज किए गए। संगठन ने यह भी बताया कि आधे से अधिक घटनाएं पीड़िताओं के अपने घरों में ही हुईं।
संस्था ने चेतावनी दी कि ये आँकड़े वास्तविक स्थिति का अधूरा चित्र हैं। VOPM के अनुसार, 'असली संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। कई महिलाएं हिंसा की रिपोर्ट नहीं करतीं — डर, शर्म, परिवार के दबाव और पुलिस पर भरोसे की कमी के चलते वे चुप रहने पर मजबूर होती हैं।'
पीड़ित-दोष संस्कृति पर सीधा प्रहार
अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए सक्रिय इस संगठन ने कहा कि पाकिस्तान में महिलाओं के साथ हिंसा होने के बाद अक्सर उनके कपड़ों, आने-जाने, चरित्र और निजी पसंद पर सवाल उठाए जाते हैं। VOPM ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'महिला के कपड़ों की वजह से रेप नहीं होता। रात में यात्रा करने से हमले को सही नहीं ठहराया जा सकता। भरोसे का मतलब सहमति नहीं होता। किसी पुरुष को मना करने का मतलब यह नहीं है कि उसे हमला करने या जान लेने का अधिकार मिल गया है।'
यह ऐसे समय में आया है जब महिला अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है और पाकिस्तान में कानूनी सुधारों की माँग तेज़ हो रही है।
ऑनर किलिंग: परंपरा नहीं, अपराध
VOPM ने तथाकथित 'ऑनर किलिंग' को किसी भी सांस्कृतिक या पारंपरिक आधार पर उचित ठहराने से इनकार करते हुए कहा, 'ऑनर किलिंग कोई परंपरा नहीं है — यह अपराध है। ये घटनाएं नियंत्रण, हक जताने और इस सोच से पैदा होती हैं कि महिला अपने परिवार की संपत्ति है। किसी पिता, भाई, पति या रिश्तेदार का महिला की जिंदगी पर मालिकाना हक नहीं होता। हत्या में कोई सम्मान नहीं होता।'
गौरतलब है कि पाकिस्तान में ऑनर किलिंग के विरुद्ध 2016 में कानून बनाया गया था, लेकिन आलोचकों का कहना है कि क्रियान्वयन अत्यंत कमज़ोर रहा है और अपराधी अक्सर पीड़िता के परिवार की 'माफी' के आधार पर बच निकलते हैं।
संस्थागत नाकामियाँ और माँगें
संगठन ने हिंसा को केवल सामाजिक समस्या नहीं, बल्कि राज्य की नाकामी का प्रमाण बताया। VOPM ने कहा कि हिंसा घर में, सड़क पर या पुलिस स्टेशन के भीतर भी हो सकती है। संस्था ने माँग की कि महिलाओं को प्रशिक्षित पुलिस अधिकारी, सही जाँच प्रक्रिया, फोरेंसिक सहायता, सुरक्षित शिकायत प्रणाली, आश्रय गृह और त्वरित सुनवाई मिलनी चाहिए।
संस्था ने पाकिस्तानी अधिकारियों से आग्रह किया कि वे यह सुनिश्चित करें कि देश में महिलाएं नहीं, अपराधी डर के साये में जिएं। VOPM ने अपनी बात इन शब्दों में समाप्त की: 'पाकिस्तान को महिलाओं को हिंसा से बचने के तरीके सिखाने के बजाय पुरुषों को हिंसा न करने की सीख देनी चाहिए। जो लोग हिंसा करते हैं और जो उन्हें बचाते हैं, उन दोनों को सजा मिलनी चाहिए।'
आगे की राह
VOPM की यह रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा का अधिवेशन चल रहा है और पाकिस्तान पर मानवाधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कानून का कड़ाई से पालन नहीं होता और सामाजिक सोच नहीं बदलती, तब तक ये आँकड़े और भयावह होते जाएंगे।