8 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

लाहौर में 8 महीने में रेप के 498 मामले, यौन हिंसा संकट पर VOPM की चेतावनी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
लाहौर में 8 महीने में रेप के 498 मामले, यौन हिंसा संकट पर VOPM की चेतावनी

सारांश

लाहौर में 2026 के पहले आठ महीनों में रेप के 498 और गैंगरेप के 36 मामले — यानी हर दिन चार से अधिक। VOPM की रिपोर्ट बताती है कि असली संख्या और कहीं ज़्यादा है, क्योंकि बदनामी के डर से अनगिनत मामले दर्ज ही नहीं होते। यह संकट पाकिस्तान की संस्थागत और नैतिक विफलता का आईना है।

मुख्य बातें

VOPM ने पुलिस रिकॉर्ड के हवाले से बताया कि लाहौर में 2026 के पहले 8 महीनों में रेप के 498 और गैंगरेप के 36 मामले दर्ज हुए।
अप्राकृतिक यौन अपराधों को जोड़ने पर कुल यौन अपराधों की संख्या 1,108 हो जाती है।
सदर में सर्वाधिक 132 रेप मामले ; मॉडल टाउन में सर्वाधिक 10 गैंगरेप के मामले।
संगठन के अनुसार दर्ज एफआईआर वास्तविक अपराधों का अत्यंत सीमित हिस्सा हैं — बदनामी का डर और पुलिस पर अविश्वास प्रमुख बाधाएँ हैं।
अज़रबैजान की 20 वर्षीय महिला के साथ कथित गैंगरेप के मामले ने अंतरराष्ट्रीय ध्यान खींचा था।
VOPM ने दोषसिद्धि दर बढ़ाने और पीड़ितों को संरक्षण देने की माँग की।

पाकिस्तान के लाहौर में 2026 के पहले आठ महीनों में रेप के 498 और गैंगरेप के 36 मामले दर्ज किए गए हैं — यानी औसतन हर दिन चार से अधिक यौन अपराधों की रिपोर्ट। अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए कार्यरत संगठन 'वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी' (VOPM) ने पुलिस रिकॉर्ड के हवाले से गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को यह आँकड़े सार्वजनिक किए। संगठन ने इसे पाकिस्तान में महिला सुरक्षा की व्यापक विफलता करार दिया है।

डिवीज़नवार आँकड़े: कोई इलाका अछूता नहीं

VOPM द्वारा जारी पुलिस आँकड़ों के अनुसार, लाहौर के सभी छह प्रशासनिक डिवीज़नों में यौन अपराध दर्ज किए गए। सदर में रेप के सर्वाधिक 132 मामले सामने आए, इसके बाद मॉडल टाउन में 98, कैंटोनमेंट में 92, इकबाल टाउन में 80, सिटी में 56 और सिविल लाइन्स में 40 मामले रहे।

गैंगरेप के मामलों में मॉडल टाउन सबसे आगे रहा जहाँ 10 मामले दर्ज हुए, कैंटोनमेंट में 9, और सदर व इकबाल टाउन में 6 6 मामले दर्ज किए गए। VOPM के अनुसार, यदि अप्राकृतिक यौन अपराध (सोडोमी) के मामलों को भी जोड़ा जाए, तो आठ महीनों में कुल यौन अपराधों की संख्या 1,108 तक पहुँच जाती है।

संगठन की चेतावनी: आँकड़े असल तस्वीर का अंश मात्र

VOPM ने रेखांकित किया कि दर्ज एफआईआर वास्तव में हुए अपराधों का बहुत छोटा हिस्सा होती हैं। संगठन ने कहा, "बदनामी का डर, शर्म, परिवार का दबाव, पुलिस पर अविश्वास और समाज से बहिष्कृत किए जाने का खतरा अनगिनत पीड़ितों को चुप रहने पर मजबूर करता है।"

संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि यह हिंसा केवल पिछड़े या अंधेरे इलाकों तक सीमित नहीं है — "यह अमीर इलाकों, भीड़ भाड़ वाले बाज़ारों और शांत रिहायशी सड़कों पर भी हो रहा है।" मानवाधिकार संगठनों के हवाले से VOPM ने बताया कि बढ़ती रिपोर्टिंग दो संकेत दे सकती है — अपराधों की वास्तविक वृद्धि, और पीड़ितों में सामने आने की बढ़ती हिम्मत।

अंतरराष्ट्रीय मामले ने खींचा ध्यान

VOPM ने लाहौर में अज़रबैजान की एक 20 वर्षीय महिला के साथ कथित गैंगरेप के उस मामले का विशेष उल्लेख किया जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियाँ बटोरी थीं। संगठन ने जोर दिया कि इस एक मामले पर मिला ध्यान उस व्यापक संकट को उजागर करता है जिसमें पाकिस्तानी महिलाओं और लड़कियों को रोज़ाना यौन हिंसा का सामना करना पड़ता है, लेकिन अधिकांश मामले मीडिया की नज़र से ओझल रह जाते हैं।

न्याय प्रणाली और संस्थाओं पर सवाल

VOPM ने लाहौर के रेप संकट को महज कानून व्यवस्था की विफलता नहीं, बल्कि "नैतिक और संस्थागत विफलता" बताया। संगठन ने कहा, "ये आँकड़े सिर्फ सहानुभूति नहीं, कार्रवाई की माँग करते हैं।" संगठन ने दोषसिद्धि दर बढ़ाने, पीड़ितों को संरक्षण और अपराधियों को निश्चित सज़ा सुनिश्चित करने की अपील की।

गौरतलब है कि पाकिस्तान में यौन अपराधों पर कानून मज़बूत किए जाने के बावजूद, मानवाधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि क्रियान्वयन और दोषसिद्धि दरें अत्यंत निम्न बनी हुई हैं। यह संकट ऐसे समय में उजागर हुआ है जब पाकिस्तान में नारीवादी आंदोलन और महिला सुरक्षा की माँग लगातार तेज़ हो रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पूरे पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था की संरचनात्मक खामियों की तस्वीर खींचते हैं। दर्ज मामलों में वृद्धि को 'जागरूकता बढ़ने' की निशानी कहकर संतोष नहीं मिलता, जब मानवाधिकार विशेषज्ञ बार बार यह चेतावनी दे रहे हों कि दोषसिद्धि दर नगण्य बनी हुई है। असल सवाल यह है कि पाकिस्तान में यौन अपराध कानूनों के कड़े होने के बावजूद पुलिस, अदालत और सामाजिक तंत्र — तीनों पीड़ितों को निराश क्यों करते हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों पर प्रतिक्रिया और घरेलू पीड़ितों की उपेक्षा के बीच का यह विरोधाभास पाकिस्तान में जवाबदेही की सीमाएँ बेनकाब करता है।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लाहौर में 2026 में रेप के कितने मामले दर्ज हुए?
VOPM द्वारा पुलिस रिकॉर्ड के हवाले से जारी आँकड़ों के अनुसार, लाहौर में 2026 के पहले आठ महीनों में रेप के 498 और गैंगरेप के 36 मामले दर्ज हुए। यदि अप्राकृतिक यौन अपराधों को भी शामिल किया जाए तो यह संख्या 1,108 तक पहुँचती है।
VOPM क्या है और यह रिपोर्ट क्यों महत्वपूर्ण है?
'वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी' (VOPM) एक अल्पसंख्यक अधिकार संगठन है जो पाकिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघनों पर नज़र रखता है। इस रिपोर्ट में पुलिस के आधिकारिक आँकड़ों का हवाला दिया गया है, जो पाकिस्तान में यौन हिंसा की व्यापकता को रेखांकित करते हैं।
क्या लाहौर के सभी इलाकों में यौन अपराध दर्ज हुए?
हाँ, VOPM के अनुसार लाहौर के सभी छह प्रशासनिक डिवीज़नों में मामले सामने आए। सदर में सर्वाधिक 132 रेप मामले और मॉडल टाउन में सर्वाधिक 10 गैंगरेप के मामले दर्ज किए गए।
पाकिस्तान में यौन अपराधों की वास्तविक संख्या दर्ज आँकड़ों से ज़्यादा क्यों मानी जाती है?
VOPM और मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, बदनामी का डर, शर्म, परिवार का दबाव, पुलिस पर अविश्वास और सामाजिक बहिष्कार का खतरा अनगिनत पीड़ितों को रिपोर्ट दर्ज कराने से रोकता है। दर्ज एफआईआर वास्तव में हुए अपराधों का एक सीमित हिस्सा ही दर्शाती हैं।
VOPM ने इस संकट से निपटने के लिए क्या माँगें रखी हैं?
VOPM ने दोषसिद्धि दर बढ़ाने, पीड़ितों को कानूनी संरक्षण सुनिश्चित करने और अपराधियों को निश्चित सज़ा दिलाने की माँग की है। संगठन ने कहा कि जब तक ये कदम नहीं उठाए जाते, लाहौर में न्याय का वादा खोखला रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 दिन पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले