9 सितंबर 2026
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लाहौर में यौन हिंसा की बाढ़: छह महिलाओं से दुष्कर्म, 15 वर्षीय दिव्यांग नाबालिग भी पीड़ित

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लाहौर में यौन हिंसा की बाढ़: छह महिलाओं से दुष्कर्म, 15 वर्षीय दिव्यांग नाबालिग भी पीड़ित

सारांश

लाहौर में कुछ ही दिनों में छह महिलाओं से कथित दुष्कर्म और एक दिव्यांग नाबालिग के उत्पीड़न की घटनाएँ सामने आई हैं। साहिल की रिपोर्ट बताती है कि 2026 के पहले छह महीनों में पाकिस्तान में जेंडर हिंसा के 3,172 मामले दर्ज हुए — मरियम नवाज की जीरो-टॉलरेंस नीति के दावों पर गंभीर सवाल उठाते हुए।

मुख्य बातें

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के लाहौर में कुछ दिनों में छह महिलाओं के साथ कथित दुष्कर्म और तीन लड़कियों के यौन उत्पीड़न के मामले सामने आए।
पीड़ितों में मानसिक रूप से दिव्यांग 15 वर्षीय नाबालिग भी शामिल है जिसे सुनसान जगह ले जाकर कथित तौर पर दुष्कर्म का शिकार बनाया गया।
काहना में एक महिला को नौकरी का झाँसा देकर बुलाया गया, जहाँ कैब ड्राइवर और उसके साथी ने कथित तौर पर गैंग-रेप किया और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया।
संस्था 'साहिल' की रिपोर्ट के अनुसार 2026 के पहले छह महीनों में पाकिस्तान में जेंडर-बेस्ड हिंसा के 3,172 मामले दर्ज हुए, जिनमें 280 दुष्कर्म और 132 ऑनर किलिंग शामिल हैं।
27 प्रतिशत मामलों में अपराधी पीड़िता के परिचित, 13 प्रतिशत मामलों में पति थे।
पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज की जेंडर हिंसा पर जीरो-टॉलरेंस नीति के दावों पर ताज़ा घटनाओं ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की राजधानी लाहौर में पिछले कुछ दिनों के भीतर छह महिलाओं के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म की घटनाएँ सामने आई हैं, जबकि तीन लड़कियों — जिनमें मानसिक रूप से दिव्यांग 15 वर्षीय नाबालिग भी शामिल है — का यौन उत्पीड़न किया गया। ये सभी मामले 8 सितंबर 2026 तक मीडिया रिपोर्टों में सामने आए, और इन्होंने पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज की जेंडर-बेस्ड हिंसा के प्रति 'जीरो-टॉलरेंस' नीति की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुख्य घटनाक्रम

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सबसे गंभीर मामलों में से एक में एक संदिग्ध व्यक्ति मानसिक रूप से दिव्यांग 15 वर्षीय नाबालिग को सुनसान स्थान पर ले गया और कथित तौर पर उसके साथ दुष्कर्म किया। यह घटना उस वर्ग की अत्यंत संवेदनशील स्थिति को उजागर करती है जो न्याय की माँग करने में सबसे अधिक असमर्थ है।

हंजारवाल की एक महिला ने पुलिस को बताया कि उसके पूर्व पति ने जबरदस्ती घर में प्रवेश किया और कथित तौर पर उसके साथ दुष्कर्म किया। पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' की रिपोर्ट के अनुसार, जब महिला ने विरोध किया तो संदिग्ध ने मारपीट की और पुलिस में शिकायत करने पर धमकी दी।

एक अन्य मामले में, एक कैब ड्राइवर ने एक महिला को काहना स्थित एक फैक्ट्री में अच्छे वेतन वाली नौकरी का प्रलोभन दिया। जब वह महिला उस स्थान पर पहुँची, तो कैब ड्राइवर और उसके साथी ने कथित तौर पर उसके साथ गैंग-रेप किया, घटना का वीडियो बनाया और उसे ब्लैकमेल करके दोबारा अपराध किया।

जौहर टाउन की एक महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जिसमें आरोप लगाया गया कि एक व्यक्ति ने शादी का वादा करके उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए, परंतु गर्भवती होने के बाद शादी से इनकार कर दिया। निशतर कॉलोनी और शाहदरा टाउन पुलिस ने भी अलग-अलग महिलाओं की शिकायतों पर दुष्कर्म के मामले दर्ज किए हैं।

साहिल रिपोर्ट के चौंकाने वाले आँकड़े

ये घटनाएँ ऐसे समय में सामने आई हैं जब संस्था 'साहिल' की छह माह की रिपोर्ट ने पाकिस्तान में जेंडर-बेस्ड हिंसा की भयावह तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के पहले छह महीनों में पाकिस्तान भर में जेंडर-बेस्ड हिंसा के 3,172 मामले दर्ज किए गए, जिनमें ट्रांसजेंडर व्यक्तियों से जुड़े 18 मामले भी शामिल हैं।

'डॉन' की रिपोर्ट के अनुसार इन मामलों का विवरण इस प्रकार है: 644 हत्याएँ, 514 यातना के मामले, 462 अपहरण, 363 आत्महत्याएँ, 280 दुष्कर्म, 175 घायल होने के मामले, 132 ऑनर किलिंग और 21 अन्य अपराध जिनमें उत्पीड़न, गैंग-रेप और पोर्नोग्राफी के मामले शामिल हैं।

पीड़ितों की आयु के संदर्भ में, 334 पीड़ित 21 से 30 वर्ष की आयु के थे, 306 पीड़ित 11 से 20 वर्ष की आयु के और 120 पीड़ित 31 से 40 वर्ष की आयु के थे। उल्लेखनीय यह है कि 71 प्रतिशत मामलों में पीड़ितों की उम्र का उल्लेख ही नहीं था, जो रिपोर्टिंग की खामियों को दर्शाता है।

यह रिपोर्ट खैबर पख्तूनख्वा, पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान, इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी (ICT), पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) और पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान के राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचारपत्रों से संकलित आँकड़ों पर आधारित है।

अपराधियों का स्वरूप

'डॉन' की रिपोर्ट के अनुसार, 27 प्रतिशत मामलों में अपराधी पीड़िता के परिचित थे, 24 प्रतिशत मामलों में अजनबी और 13 प्रतिशत मामलों में पति। गौरतलब है कि 20 प्रतिशत मामलों में अपराधियों का कोई उल्लेख नहीं था। यह आँकड़ा इस तथ्य को रेखांकित करता है कि महिलाओं के लिए घर और परिचित दायरा भी सुरक्षित नहीं है।

सरकार की नीति और ज़मीनी हकीकत

पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज बार-बार जेंडर-बेस्ड हिंसा के विरुद्ध जीरो-टॉलरेंस नीति का दावा करती रही हैं। परंतु आलोचकों का कहना है कि ताज़ा घटनाओं की श्रृंखला इस दावे और ज़मीनी हकीकत के बीच की गहरी खाई को उजागर करती है। यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान में महिला सुरक्षा कानूनों के क्रियान्वयन पर पहले से ही अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन सवाल उठाते रहे हैं।

आगे देखें तो इन मामलों में पुलिस की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया की गति ही यह तय करेगी कि पाकिस्तान की संस्थाएँ पीड़ितों को वास्तविक न्याय दिला पाती हैं या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

172 मामले — महज़ एक सांख्यिकीय रिपोर्ट नहीं, बल्कि पाकिस्तानी राज्य की उस संस्थागत विफलता का दस्तावेज़ है जो दशकों से जारी है। मरियम नवाज की 'जीरो-टॉलरेंस' घोषणाएँ उसी परंपरा का हिस्सा हैं जिसमें नीतिगत बयानबाज़ी और ज़मीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई कभी नहीं पाटी गई। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि 27 प्रतिशत अपराधी परिचित और 13 प्रतिशत पति हैं — यानी महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित जगह उनका अपना घर और भरोसेमंद दायरा है। जब तक पुलिस रिपोर्टिंग में बाधाएँ, सामाजिक कलंक और न्यायिक देरी बनी रहेगी, तब तक ये आँकड़े वास्तविक पीड़ा की सिर्फ एक धुंधली छाया भर रहेंगे।
RashtraPress
9 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लाहौर में यौन हिंसा की ताज़ा घटनाएँ क्या हैं?
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के लाहौर में पिछले कुछ दिनों में छह महिलाओं के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म हुआ और तीन लड़कियों का यौन उत्पीड़न किया गया, जिनमें मानसिक रूप से दिव्यांग 15 वर्षीय नाबालिग भी शामिल है। इन मामलों में हंजारवाल, काहना, जौहर टाउन, निशतर कॉलोनी और शाहदरा टाउन जैसे इलाके शामिल हैं।
पाकिस्तान में 2026 में जेंडर-बेस्ड हिंसा के कितने मामले दर्ज हुए?
साहिल संस्था की रिपोर्ट के अनुसार 2026 के पहले छह महीनों में पाकिस्तान में जेंडर-बेस्ड हिंसा के 3,172 मामले दर्ज हुए। इनमें 644 हत्याएँ, 280 दुष्कर्म, 462 अपहरण और 132 ऑनर किलिंग शामिल हैं।
पाकिस्तान में यौन हिंसा के मामलों में अपराधी कौन होते हैं?
'डॉन' की रिपोर्ट के अनुसार 27 प्रतिशत मामलों में अपराधी पीड़िता के परिचित थे, 24 प्रतिशत अजनबी और 13 प्रतिशत पति। 20 प्रतिशत मामलों में अपराधियों का कोई उल्लेख नहीं था।
मरियम नवाज की जेंडर हिंसा नीति क्या है और क्या वह प्रभावी है?
पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज जेंडर-बेस्ड हिंसा के विरुद्ध जीरो-टॉलरेंस नीति का दावा करती रही हैं। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि लाहौर में ताज़ा घटनाओं की श्रृंखला और साहिल के आँकड़े इस नीति की ज़मीनी विफलता को दर्शाते हैं।
साहिल की रिपोर्ट किन क्षेत्रों को कवर करती है?
साहिल की छह माह की रिपोर्ट खैबर पख्तूनख्वा, पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान, इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी (ICT), पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) और पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान के राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचारपत्रों से संकलित आँकड़ों पर आधारित है।
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