पाकिस्तान में 5 वर्षों में महिलाओं के खिलाफ 2,37,216 अपराध दर्ज, PJN रिपोर्ट में खुलासा
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान में 2021 से 2025 के बीच महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ कुल 2,37,216 अपराध दर्ज किए गए — यह चौंकाने वाला आँकड़ा इस्लामाबाद स्थित मानवाधिकार संगठन पीस एंड जस्टिस नेटवर्क (PJN) पाकिस्तान की राष्ट्रीय लिंग-आधारित हिंसा (GBV) अपराध रिपोर्ट 2021-2025 में सामने आया है। यह रिपोर्ट संगठन की 'डेटा फॉर जस्टिस डेवलपमेंट' (D4JD) पहल के तहत जारी की गई है और देश भर के प्रांतीय पुलिस आँकड़ों के विश्लेषण पर आधारित है।
मुख्य घटनाक्रम और राष्ट्रीय परिदृश्य
रिपोर्ट के अनुसार, पाँच वर्षों में दर्ज 2,37,216 मामले यह दर्शाते हैं कि लिंग-आधारित हिंसा पाकिस्तान में एक गंभीर संस्थागत समस्या बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि रिपोर्ट किए गए मामले वास्तविक हिंसा का केवल एक अंश हैं, क्योंकि सामाजिक दबाव, कानूनी जटिलताएँ और भौगोलिक दुर्गमता बड़ी संख्या में पीड़िताओं को FIR दर्ज कराने से रोकती हैं।
रिपोर्ट स्पष्ट रूप से रेखांकित करती है कि प्रांत-दर-प्रांत आँकड़ों में भारी असमानता है, जो न केवल हिंसा के वास्तविक वितरण को, बल्कि रिपोर्टिंग तंत्र की कमज़ोरियों को भी उजागर करती है।
पंजाब: सर्वाधिक दर्ज मामले
पंजाब में राष्ट्रीय कुल के 82.5 प्रतिशत यानी 1,95,787 मामले दर्ज किए गए, जबकि पाकिस्तान की कुल जनसंख्या में पंजाब की हिस्सेदारी केवल 51.5 प्रतिशत है। रिपोर्ट के अनुसार, सामूहिक दुष्कर्म, हिरासत में यौन हिंसा और सगे संबंधियों के बीच यौन संबंध के 90 प्रतिशत से अधिक मामले भी पंजाब में ही दर्ज हुए।
यह उपस्थिति आंशिक रूप से पंजाब के अपेक्षाकृत बेहतर पुलिस रिपोर्टिंग ढाँचे को भी दर्शाती है — हालाँकि इसका अर्थ यह नहीं कि अन्य प्रांतों में हिंसा कम है।
सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान की स्थिति
सिंध में पाँच वर्षों में 25,107 GBV मामले दर्ज किए गए, जो राष्ट्रीय कुल का 10.6 प्रतिशत है। इनमें अपहरण और अगवा करने के 19,289 मामले सबसे अधिक रहे, जो कुल GBV अपराधों का लगभग 77 प्रतिशत है।
पाकिस्तान की 16.5 प्रतिशत जनसंख्या वाले खैबर पख्तूनख्वा (KP) में केवल 10,210 मामले दर्ज हुए — राष्ट्रीय कुल का 4.3 प्रतिशत। परंतु इन आँकड़ों के पीछे एक भयावह सच्चाई छिपी है: पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज घरेलू हिंसा के 2,334 मामलों में से 1,197 मामलों में मृत्यु हुई — यानी हर दूसरे दर्ज मामले में जान गई। बलूचिस्तान में 3,108 मामले दर्ज हुए।
पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्रों में रिपोर्टिंग की खाई
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में 1,572 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 1,474 अपहरण और अगवा की श्रेणी में आते हैं, जबकि घरेलू शारीरिक हिंसा पुलिस रिकॉर्ड में लगभग अदृश्य बनी रही।
पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान (POGB) में पाँच वर्षों में केवल 161 मामले दर्ज हुए, जिनमें दुष्कर्म के मात्र सात मामले शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यह हिंसा की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि घनिष्ठ सांप्रदायिक संरचनाओं और भौगोलिक अलगाव के कारण अत्यंत गंभीर रूप से कम रिपोर्टिंग का संकेत है।
आगे क्या होगा
PJN की यह रिपोर्ट पाकिस्तान में नीति-निर्माताओं, महिला अधिकार संगठनों और अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार निकायों के लिए एक गंभीर चेतावनी है। रिपोर्ट उन संस्थागत और भौगोलिक बाधाओं को दूर करने की माँग करती है जो वास्तविक अपराध दर और दर्ज मामलों के बीच की खाई को और गहरा करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक रिपोर्टिंग तंत्र को मज़बूत नहीं किया जाता, ये आँकड़े वास्तविकता की केवल आंशिक तस्वीर ही पेश करते रहेंगे।