पाकिस्तान में बाल शोषण के मामलों में चिंताजनक वृद्धि, 2025 में आठ प्रतिशत की बढ़ोतरी
सारांश
Key Takeaways
- पाकिस्तान में बाल शोषण के मामलों में 2025 में आठ प्रतिशत की वृद्धि हुई।
- रोजाना औसतन नौ से अधिक बच्चे शोषण का शिकार होते हैं।
- जेंडर आधारित हिंसा के मामलों में 34 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
- न्याय प्रणाली में दोषसिद्धि की कमी से गंभीर खामियाँ हैं।
- सरकार को बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है।
इस्लामाबाद, 17 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। 2025 में पाकिस्तान में बाल शोषण के मामलों में आठ प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसमें कुल 3,630 मामले दर्ज किए गए। यह जानकारी बाल संरक्षण संगठन 'साहिल' की रिपोर्ट के अनुसार मिली।
'पाकिस्तान टुडे' की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष, पाकिस्तान में रोजाना औसतन नौ से अधिक बच्चे शोषण का शिकार बने। संगठन द्वारा एकत्रित आंकड़े यह दर्शाते हैं कि बाल शोषण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जो बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मौजूद चुनौतियों को उजागर करता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि जेंडर आधारित हिंसा (जीबीवी) के मामलों में भी 2025 में 34 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह इस बात की ओर इशारा करता है कि बच्चों और कमजोर वर्गों के खिलाफ हिंसा को रोकने के लिए और अधिक प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है।
'पाकिस्तान टुडे' के अनुसार, संगठन पाकिस्तान में बाल शोषण के मामलों की निरंतर निगरानी करता रहा है और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए सांसदों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ महत्वपूर्ण जानकारियों का आदान-प्रदान करता रहा है। हाल के आंकड़े बच्चों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए अधिक प्रयासों की आवश्यकता को दर्शाते हैं।
फरवरी में, अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए काम करने वाले एक प्रमुख संगठन ने पंजाब प्रांत में एक बेहद चिंताजनक सच्चाई को उजागर किया। यहाँ सैकड़ों बच्चों के साथ यौन दुर्व्यवहार की घटनाएँ हुई हैं। संगठन ने बताया कि मामले दर्ज होने और संदिग्धों की पहचान हो जाने के बावजूद पीड़ितों को अभी तक न्याय नहीं मिला है।
वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी के अनुसार, 2025 के आधिकारिक आंकड़ों में फैसलाबाद जिले के 45 पुलिस थानों में 663 यौन शोषण के मामले दर्ज किए गए, जिनमें लगभग 989 संदिग्ध शामिल थे। इतनी बड़ी संख्या के बावजूद, 2025 में दर्ज मामलों में से किसी भी आरोपी को अब तक सजा नहीं मिली है। यह केवल कानूनी विफलता नहीं, बल्कि एक नैतिक और सामाजिक त्रासदी है।
वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी के अनुसार, जनवरी में भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया, जहां 57 बाल यौन शोषण के मामले सामने आए और 76 संदिग्धों की पहचान हुई, जबकि 23 मामले अभी भी जांच के अधीन हैं।
समूह ने कहा कि पाकिस्तान की सरकार इन मामलों से प्रभावी ढंग से निपटने में संघर्ष कर रही है। दोषसिद्धि की कमी न्याय प्रणाली की गंभीर खामियों को उजागर करती है।
कमजोर जांच, सबूतों का सही संग्रह न होना, मामलों में देरी और अदालतों में लंबित मामलों के कारण अपराधियों को सजा नहीं मिल पा रही है। साथ ही, पीड़ितों को पर्याप्त सुरक्षा और मानसिक सहायता नहीं मिलती है और जिम्मेदारी तय करने में भी कमी रहती है।
जब मामलों को सही तरीके से नहीं संभाला जाता, तो अपराधी आजाद रहते हैं और पीड़ित न्याय की उम्मीद खो देते हैं। '663 मामलों' के पीछे असली बच्चे, डरे हुए परिवार और न्याय की प्रतीक्षा कर रहे लोग हैं। देरी से मिला न्याय भी एक प्रकार की क्रूरता बन जाती है।