पप्पू यादव पर हमले को लेकर सपा का पलटवार, भाजपा पर राम मंदिर चढ़ावा मामले से ध्यान भटकाने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के नेताओं ने 3 अगस्त को लखनऊ में तीखी प्रतिक्रिया देते हुए पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव पर हुए हमले की कड़ी निंदा की और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर आरोप लगाया कि वह राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर संसद में होने वाली चर्चा से ध्यान भटकाने के लिए धर्म की आड़ ले रही है। संसद परिसर में विपक्षी विरोध प्रदर्शन के दौरान भाजपा ने पप्पू यादव पर सनातन धर्म के अपमान का आरोप लगाया था, जिसके बाद दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन पर हमला हुआ।
हमले की निंदा और भाजपा पर सवाल
सपा विधायक नसीम सोलंकी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में हिंसा का कोई स्थान नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह हमला उन लोगों की बेचैनी को उजागर करता है जो नहीं चाहते कि राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी का मामला सार्वजनिक रूप से सामने आए।
सपा विधायक तूफानी सरोज ने स्पष्ट किया कि पप्पू यादव का उद्देश्य किसी धर्म या संत समाज का अपमान करना नहीं था। उनके अनुसार, सांसद ने साधु का वेश धारण कर यह दर्शाने की कोशिश की कि कुछ लोग साधु-संत का रूप अपनाकर जनता को गुमराह करते हैं। सरोज ने कहा कि इस प्रदर्शन का मकसद ढोंग और पाखंड को उजागर करना था, न कि पूरी संत परंपरा या सनातन धर्म को निशाना बनाना।
दोहरे मापदंड का आरोप
सपा विधायक अंकित भाटी ने कहा कि किसी भी व्यक्ति पर हमला सभ्य समाज के लिए अस्वीकार्य है और इसकी कड़ी निंदा होनी चाहिए। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि सनातन धर्म के अपमान का आरोप लगाया जाता है, तो ऐसे मामलों में सभी के लिए एक समान मानदंड होना चाहिए। भाटी ने आरोप लगाया कि भाजपा के कार्यक्रमों में भी धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक इस्तेमाल किया गया, परंतु उस पर कोई सवाल नहीं उठाए गए।
सपा विधायक संदीप सिंह पटेल ने भाजपा पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाते हुए कहा, 'अगर आप भारतीय जनता पार्टी के चरित्र को देखें, तो नितिन नवीन के सामने भगवान हनुमान की वेश में एक व्यक्ति से नृत्य करवाया गया। दुनिया भर के लोग भगवान हनुमान को गहरी आस्था और सम्मान की दृष्टि से देखते हैं। जब भाजपा ऐसी हरकतें करती है, तो उस पर कोई आरोप नहीं लगाया जाता।'
सपा का मूल आरोप: चर्चा से पलायन
सपा नेताओं का केंद्रीय तर्क यह है कि भाजपा ने पप्पू यादव के प्रदर्शन को सनातन धर्म के अपमान का रंग देकर राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर संसद में होने वाली बहस को टालने की कोशिश की। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल इस मामले को संसद में उठाने के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं।
आगे क्या
गौरतलब है कि राम मंदिर चढ़ावा मामला संसद के मानसून सत्र में विपक्ष के लिए एक प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। सपा और अन्य विपक्षी दलों के इस आक्रामक रुख से आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक तापमान और बढ़ने की संभावना है।