14 जुलाई 2026
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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: सपा नेता पवन पांडेय बोले — पोस्टरबाजी से नहीं दबेगा मामला, माँगी सुप्रीम कोर्ट निगरानी

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: सपा नेता पवन पांडेय बोले — पोस्टरबाजी से नहीं दबेगा मामला, माँगी सुप्रीम कोर्ट निगरानी

सारांश

राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। सपा नेता पवन पांडेय ने भाजपा पर पोस्टरबाजी के ज़रिए मुद्दा दबाने का आरोप लगाया, SIT जांच को अपर्याप्त बताया और सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में निष्पक्ष जांच की माँग की।

मुख्य बातें

सपा नेता पवन पांडेय ने 14 जुलाई 2026 को अयोध्या में भाजपा पर राम मंदिर चढ़ावा चोरी से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया।
अयोध्या, मथुरा और बाराबंकी में अखिलेश यादव सहित सपा नेताओं के खिलाफ विवादित पोस्टर लगाए गए; सपा ने कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी।
पांडेय ने SIT जांच को अपर्याप्त बताया और सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में जांच की माँग की।
राम मंदिर ट्रस्ट में शंकराचार्यों और संत-महंतों को शामिल करने तथा दान व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता की माँग रखी गई।
भाजपा पर गौ-राजनीति और पशु वध कारोबार से जुड़े लोगों से चंदा लेने के आरोप लगाए — भाजपा की ओर से कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं।

समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता पवन पांडेय ने 14 जुलाई 2026 को अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि अयोध्या, मथुरा और बाराबंकी में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ लगाए गए विवादित पोस्टर असल मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने की सुनियोजित कोशिश हैं। पांडेय ने स्पष्ट किया कि इस पोस्टरबाजी से चढ़ावा चोरी का मामला दबने वाला नहीं है।

भाजपा पर ध्यान भटकाने का आरोप

पांडेय के अनुसार, राम मंदिर चढ़ावा चोरी के विवाद ने भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) की साख को गहरी चोट पहुँचाई है। उन्होंने कहा कि भाजपा इस मुद्दे पर जनता के सामने जवाब देने की स्थिति में नहीं है, इसलिए सपा नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। पांडेय ने कहा, 'चढ़ावा चोरी का मुद्दा जनता तक पहुँच चुका है और लोग सवाल पूछ रहे हैं — पोस्टर लगाने से यह नहीं रुकेगा।'

कानूनी कार्रवाई की तैयारी

पोस्टर लगाने के मामले में सपा की रणनीति के बारे में पूछे जाने पर पांडेय ने कहा कि पार्टी अदालत का दरवाजा खटखटाएगी और उचित कानूनी कार्रवाई करेगी। यह पहली बार नहीं है जब विपक्षी नेताओं के खिलाफ इस तरह के पोस्टर अभियान चलाए गए हों — आलोचकों का कहना है कि यह राजनीतिक दबाव बनाने का एक पुराना तरीका है।

एसआईटी जांच पर सवाल, सुप्रीम कोर्ट निगरानी की माँग

राम मंदिर दान चोरी मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) पर भी पांडेय ने गंभीर सवाल उठाए। उनके अनुसार, अयोध्या के अधिकांश लोग एसआईटी जांच से संतुष्ट नहीं हैं और केवल भाजपा नेता ही इस पर भरोसा जता रहे हैं। उन्होंने ट्रस्ट और सरकार के बीच मिलीभगत का आरोप लगाते हुए माँग की कि इस मामले की निगरानी सर्वोच्च न्यायालय करे, ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके और जनता का विश्वास बना रहे।

ट्रस्ट में पारदर्शिता और धार्मिक प्रतिनिधित्व की माँग

पांडेय ने यह भी माँग की कि राम मंदिर ट्रस्ट में देश के प्रमुख शंकराचार्यों, अयोध्या के संत-महंतों और भगवान श्रीराम से जुड़े पारंपरिक धार्मिक प्रतिनिधियों को उचित स्थान दिया जाए। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए — चाहे कोई श्रद्धालु ₹1 का दान करे या करोड़ों का, प्रत्येक राशि का स्पष्ट रिकॉर्ड होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कथित अनियमितताओं को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से संरक्षण देने वालों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज होना चाहिए।

शंकराचार्य दौरे और गौ संरक्षण पर रुख

ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के प्रस्तावित दौरे पर पांडेय ने कहा कि शंकराचार्य गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने, गौ संरक्षण और गौ सम्मान के मुद्दे को लेकर विभिन्न स्थानों का दौरा कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सपा भी गौ संरक्षण और गौ सम्मान के पक्ष में है। साथ ही उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि पार्टी एक ओर गाय के नाम पर राजनीति करती है, जबकि दूसरी ओर कथित तौर पर पशु वध के कारोबार से जुड़े लोगों से चंदा लेने के आरोप उस पर लगते रहे हैं। यह विरोधाभास, उनके अनुसार, जनता समझ चुकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इसीलिए दोनों पक्षों की प्रतिक्रियाएँ इतनी तीखी हैं। सपा की SIT पर अविश्वास और सुप्रीम कोर्ट निगरानी की माँग रणनीतिक रूप से चतुर है — यह भाजपा को या तो जांच का बचाव करने या उच्चतर जवाबदेही स्वीकार करने की स्थिति में डालती है। गौरतलब है कि विपक्ष द्वारा पोस्टर विवाद को मुद्दे से बड़ा बनाने की कोशिश भी एक परिचित राजनीतिक खेल है — असली सवाल यह है कि मंदिर ट्रस्ट में पारदर्शिता की माँग को लेकर अदालत या सरकार क्या ठोस कदम उठाती है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला क्या है?
यह मामला अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान में कथित अनियमितताओं और चोरी से जुड़ा है। इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है, लेकिन विपक्षी दल इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं।
सपा नेता पवन पांडेय ने भाजपा पर क्या आरोप लगाए?
पांडेय ने आरोप लगाया कि भाजपा अयोध्या, मथुरा और बाराबंकी में सपा नेताओं के खिलाफ पोस्टर लगाकर राम मंदिर चढ़ावा चोरी के असल मुद्दे से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि इस विवाद ने भाजपा, RSS और VHP की छवि को नुकसान पहुँचाया है।
सपा ने एसआईटी जांच पर क्यों सवाल उठाए?
सपा का कहना है कि अयोध्या के अधिकांश लोग एसआईटी जांच से संतुष्ट नहीं हैं और केवल भाजपा नेता ही इस पर भरोसा जता रहे हैं। पांडेय ने ट्रस्ट और सरकार के बीच मिलीभगत का आरोप लगाते हुए सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में जांच की माँग की है।
राम मंदिर ट्रस्ट में पारदर्शिता को लेकर सपा की क्या माँगें हैं?
सपा ने माँग की है कि ट्रस्ट में प्रमुख शंकराचार्यों, अयोध्या के संत-महंतों और पारंपरिक धार्मिक प्रतिनिधियों को स्थान दिया जाए। साथ ही हर दान राशि का पारदर्शी रिकॉर्ड रखा जाए और कथित अनियमितताओं में संलिप्त सभी लोगों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई हो।
पोस्टर विवाद में सपा आगे क्या कदम उठाएगी?
सपा नेता पवन पांडेय ने कहा कि पार्टी अदालत का दरवाजा खटखटाएगी और पोस्टर लगाने के मामले में कानूनी कार्रवाई करेगी। पार्टी इस मुद्दे को राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर उठाने की तैयारी में है।
राष्ट्र प्रेस
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