राम मंदिर चढ़ावा विवाद: विनय कटियार का अखिलेश पर पलटवार, 'तथ्यों के बिना आरोप उचित नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा अयोध्या के राम मंदिर के चढ़ावे से करोड़ों रुपये गायब होने के आरोप लगाए जाने के बाद राजनीतिक तापमान तेज़ी से बढ़ गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद विनय कटियार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि अखिलेश यादव 'कभी-कभी समझदारी से बाहर हो जाते हैं' और बिना पर्याप्त तथ्यों के बयान दे देते हैं।
कटियार का सीधा जवाब
विनय कटियार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राम मंदिर निर्माण एक ऐतिहासिक और आस्था से जुड़ा कार्य है, जिसे पूरे देश के करोड़ों श्रद्धालुओं के सहयोग और विश्वास से आगे बढ़ाया गया है। उनके अनुसार, बिना किसी ठोस प्रमाण के भ्रष्टाचार या धन के दुरुपयोग का आरोप लगाना न केवल अनुचित है, बल्कि आस्था पर चोट करने जैसा भी है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कभी अखिलेश यादव से मुलाकात हुई तो वे उनसे आग्रह करेंगे कि वे इस विषय को गहराई से समझें और तथ्यों के आधार पर ही टिप्पणी करें।
ट्रस्ट की वित्तीय प्रक्रियाओं का बचाव
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताए जाने पर कटियार ने सहमति व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अब तक ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे यह सिद्ध हो कि चढ़ावे की राशि का दुरुपयोग हुआ है। कटियार के अनुसार, ट्रस्ट की वित्तीय प्रक्रियाएँ निर्धारित नियमों के अंतर्गत संचालित होती हैं और नियमित ऑडिट भी होता रहता है।
मंदिर निर्माण की स्थिति
पूर्व सांसद ने बताया कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण लगभग पूर्ण हो चुका है — केवल शिखर से जुड़ा कुछ कार्य शेष है, जिसे शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह मंदिर भारतीय स्थापत्य, संस्कृति और आस्था का जीवंत प्रतीक है। कटियार ने अखिलेश यादव को सलाह दी कि वे दक्षिण भारत के प्राचीन और भव्य मंदिरों का अध्ययन करें, ताकि वे समझ सकें कि बड़े धार्मिक निर्माण किस प्रकार सुनियोजित और दीर्घकालिक प्रक्रिया के तहत तैयार होते हैं।
BJP नेता सुब्रत पाठक की तीखी प्रतिक्रिया
भाजपा नेता सुब्रत पाठक ने और भी आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा, 'अखिलेश यादव को पहले साफ करना चाहिए कि उनकी आस्था राम मंदिर में है या बाबरी मस्जिद में। अगर उनकी आस्था राम मंदिर में होती, तो उन्होंने राम भक्तों पर गोलियां क्यों चलवाईं? वे राम मंदिर के निर्माण में बाधा क्यों डालते हैं? उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर का विरोध करने के लिए वकील क्यों खड़े किए?' पाठक ने आरोप लगाया कि सपा ने हमेशा यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि राम मंदिर न बने।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावी सरगर्मियाँ तेज़ हो रही हैं और राम मंदिर एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। अखिलेश यादव के आरोपों पर BJP का यह पलटवार दर्शाता है कि दोनों पक्ष इस मुद्दे को अपने-अपने राजनीतिक एजेंडे के अनुरूप इस्तेमाल करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। आने वाले दिनों में इस विवाद के और गहराने की संभावना है।