10 अगस्त 2026
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अमित शाह संसद में दें जवाब — विपक्ष का अल्टीमेटम, मानसून सत्र में गतिरोध गहराया

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अमित शाह संसद में दें जवाब — विपक्ष का अल्टीमेटम, मानसून सत्र में गतिरोध गहराया

सारांश

मानसून सत्र में विपक्ष ने सरकार को सीधी चुनौती दी है — जंतर-मंतर पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर अमित शाह का सदन में बयान आए, वरना एफसीआरए समेत कोई विधेयक पास नहीं होगा। प्रियंका गांधी से लेकर धर्मेंद्र यादव तक, विपक्ष एकजुट दिख रहा है।

मुख्य बातें

विपक्षी सांसदों ने 10 अगस्त को संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया।
माँग: गृह मंत्री अमित शाह 20 जुलाई के जंतर-मंतर पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर सदन में बयान दें।
कांग्रेस का अल्टीमेटम — बयान के बिना एफसीआरए बिल सहित कोई भी विधेयक पारित नहीं होने दिया जाएगा।
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने एफसीआरए में प्रशासनिक खर्च सीमा 50% से 20% करने के प्रस्ताव पर अनुच्छेद 19 के उल्लंघन की चिंता जताई।
सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने इंडी गठबंधन की एकजुटता दोहराई; कहा BJP के बयानों से गठबंधन अप्रभावित।

संसद के मानसून सत्र में 10 अगस्त 2026 को विपक्ष और सरकार के बीच टकराव तेज़ हो गया, जब विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सदन में बयान देने की माँग रखी। विपक्ष की दो मुख्य माँगें हैं — 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर स्पष्टीकरण, और राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपों पर जवाबदेही।

विपक्ष की स्पष्ट शर्त

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने साफ़ कहा है कि जब तक गृह मंत्री इन दोनों मुद्दों पर सदन में बयान नहीं देते, तब तक किसी भी महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा आगे नहीं बढ़ने दी जाएगी। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने पत्रकारों से कहा कि गतिरोध तब तक बना रहेगा, जब तक केंद्रीय गृह मंत्री संसद में बयान नहीं देते।

कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने विपक्ष की माँग को और स्पष्ट करते हुए कहा कि किसी भी विधेयक — जिसमें एफसीआरए बिल भी शामिल है — पर चर्चा से पहले अमित शाह को दिल्ली के छात्रों के खिलाफ हुई कार्रवाई पर सदन में आकर जवाब देना होगा। उन्होंने कहा कि बयान के बिना सरकार को इन मामलों पर आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा।

एफसीआरए विधेयक पर विपक्ष के आरोप

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने एफसीआरए विधेयक को एक बड़े समुदाय के खिलाफ उठाया गया कदम बताया। उनका दावा है कि प्रस्तावित बदलाव समुदाय और देश के हितों के विरुद्ध हैं और इससे शिक्षा तथा राष्ट्रीय प्रगति में योगदान देने वाले महत्वपूर्ण संसाधनों पर असर पड़ सकता है।

कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने विधेयक में प्रशासनिक खर्चों की सीमा को 50 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत किए जाने के प्रस्ताव पर चिंता जताई। उनका कहना है कि इससे संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत मिले अधिकारों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने सरकार पर कई विधेयक बदले की भावना से लाने का आरोप भी लगाया।

आदिवासी पहचान का मुद्दा

विश्व आदिवासी दिवस के संदर्भ में भगत ने गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि आदिवासी समुदाय को 'वनवासी' कहकर उनकी पहचान, संघर्ष, ऐतिहासिक विरासत और विशिष्टता को कमज़ोर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे पर सांकेतिक विरोध दर्ज करा रहे हैं और अमित शाह के सदन में आने पर यह सवाल उठाएँगे।

झारखंड छात्र प्रदर्शन और इंडी गठबंधन

झारखंड में छात्रों के प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस नेताओं ने शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने की अपील की। पार्टी नेताओं ने उम्मीद जताई कि प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि कोई असामाजिक तत्व आंदोलन का फायदा न उठा सके। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली माँगों को स्वीकार करने के संकेत दिए हैं।

समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद धर्मेंद्र यादव ने परिसीमन के मुद्दे पर कहा कि विपक्ष ने इस पर चर्चा का प्रस्ताव नहीं दिया है और सरकार को अपने स्तर पर फैसला लेना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बयानों से इंडी गठबंधन की एकजुटता पर कोई असर नहीं पड़ता।

यह गतिरोध ऐसे समय में गहराया है जब सरकार के पास मानसून सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराने की योजना है। विपक्ष की रणनीति संसदीय कार्यवाही को बाधित कर सरकार पर जवाबदेही का दबाव बनाने की है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी कीमत जनता चुकाती है जब ज़रूरी विधेयक अटक जाते हैं। जंतर-मंतर पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर चढ़ावा विवाद दोनों गंभीर मुद्दे हैं जिन पर सदन में जवाबदेही बनती है, लेकिन एफसीआरए जैसे विधेयक को इस राजनीतिक दाँव में उलझाना उन संस्थाओं के लिए नुकसानदेह हो सकता है जो इस कानून से प्रभावित होती हैं। असली सवाल यह है कि क्या दोनों पक्ष संसदीय समय का सदुपयोग करने की इच्छाशक्ति रखते हैं, या यह गतिरोध महज़ चुनावी संदेश देने का मंच बन गया है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विपक्ष अमित शाह से संसद में किन मुद्दों पर जवाब माँग रहा है?
विपक्ष दो मुख्य मुद्दों पर गृह मंत्री अमित शाह से सदन में बयान चाहता है — पहला, 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई, और दूसरा, राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोप। कांग्रेस का कहना है कि इन मुद्दों पर स्पष्टीकरण के बिना किसी भी विधेयक पर चर्चा नहीं होगी।
एफसीआरए बिल क्या है और विपक्ष इसका विरोध क्यों कर रहा है?
एफसीआरए (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) विधेयक में प्रस्तावित बदलावों में प्रशासनिक खर्चों की सीमा 50 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत करना शामिल है। विपक्षी सांसदों का आरोप है कि यह संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत मिले अधिकारों को प्रभावित करेगा और एक बड़े समुदाय के हितों के विरुद्ध है।
मानसून सत्र में यह गतिरोध कब तक चल सकता है?
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के अनुसार गतिरोध तब तक बना रहेगा जब तक गृह मंत्री अमित शाह संसद में बयान नहीं देते। सरकार की ओर से अभी तक इस माँग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आदिवासी पहचान का मुद्दा इस विरोध से कैसे जुड़ा है?
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने विश्व आदिवासी दिवस के संदर्भ में आरोप लगाया कि आदिवासी समुदाय को 'वनवासी' कहकर उनकी पहचान और ऐतिहासिक विरासत को कमज़ोर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि अमित शाह के सदन में आने पर वे यह सवाल उठाएँगे।
इंडी गठबंधन की इस मुद्दे पर क्या स्थिति है?
समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने इंडी गठबंधन की एकजुटता दोहराई और कहा कि BJP के किसी भी बयान या टिप्पणी से गठबंधन पर कोई असर नहीं पड़ता। परिसीमन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि विपक्ष ने इस पर चर्चा का प्रस्ताव नहीं रखा है।
राष्ट्र प्रेस
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