मुख्य चुनाव आयुक्त हटाने से पहले SIR की सच्चाई आए सामने, जाँच आयोग बनाए सरकार: डॉ. कृष्णासामी
सारांश
मुख्य बातें
पुथिया तमिलगम के अध्यक्ष डॉ. के. कृष्णासामी ने 25 सितंबर 2026 को कोयंबटूर में कहा कि विपक्ष द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की माँग से पहले विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) में हुई घटनाओं की पूरी सच्चाई जनता के सामने आनी चाहिए। उन्होंने इसके लिए एक स्वतंत्र जाँच आयोग के गठन की माँग की।
SIR विवाद पर डॉ. कृष्णासामी का रुख
डॉ. कृष्णासामी ने कहा कि भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की कार्रवाई से पहले यह स्पष्ट होना ज़रूरी है कि SIR प्रक्रिया में वास्तव में क्या हुआ। उन्होंने कहा, "अगर मुख्य चुनाव आयुक्त ने किसी के पक्ष में कोई गलत कदम उठाया है, तो वह सब जनता के सामने आना चाहिए।" उनके अनुसार सभी राजनीतिक दलों को विश्वास में लेकर इस मामले की पुनः जाँच होनी चाहिए।
हीरा मणि मामले में जाँच की माँग
डॉ. कृष्णासामी ने तमिलनाडु के जाने माने उद्योगपति जिम बिरामणी उर्फ हीरा मणि के मामले पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि लगभग दो हफ्ते पहले बाल शोषण के आरोप में गिरफ्तार किए गए 82 वर्षीय बिरामणी से जुड़ी घटना कथित तौर पर दो वर्ष या उससे भी अधिक पुरानी है। उन्होंने कहा, "किसी पीड़ित बच्चे की ओर से कोई सीधी शिकायत नहीं थी और सबूतों की कमी के चलते मामला पहले बंद भी कर दिया गया था। अब कुछ लोग सामने आए हैं और उन्होंने स्वीकार किया है कि गलत व्यवहार हुआ था और उसे छिपाने की कोशिश की गई।"
उन्होंने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये की रिश्वत देकर मात्र 10 मिनट में इस घटना को दबाया गया। मामले में शांति और उनके पति को भी गिरफ्तार किया गया है। डॉ. कृष्णासामी ने ज़ोर देकर कहा कि सोशल मीडिया या यूट्यूब पर उपलब्ध सूचनाओं पर निर्भर रहने के बजाय गठित विशेष जाँच दल (SIT) को सभी तथ्यों को गहराई से उजागर करना चाहिए।
आपसी आरोप प्रत्यारोप पर चिंता
पिछले एक सप्ताह से चल रहे राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप पर डॉ. कृष्णासामी ने कहा कि मौजूदा सरकार के मंत्री इस घटना को छिपाने का आरोप पिछली सरकार पर लगा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन को इस मामले में केवल पुलिस रिपोर्ट पर भरोसा करना होगा। उन्होंने आगे जोड़ा, "यह नहीं पता कि मामला बंद करने के लिए राजनीतिक दबाव था या नहीं — यही सब अब जनता के सामने लाया जाना चाहिए।"
स्थानीय निकायों में भ्रष्टाचार पर श्वेत पत्र की माँग
डॉ. कृष्णासामी ने स्थानीय निकायों और संस्थानों में 6,774 ऑडिट आपत्तियों का हवाला देते हुए कहा कि स्थानीय निकाय के वित्त प्रबंधन में गंभीर खामियाँ रही हैं। उनके अनुसार इससे स्थानीय निकाय को कथित तौर पर ₹6,000 करोड़ का नुकसान हुआ है। उन्होंने सरकार से माँग की कि यदि किसी ने जानबूझकर यह किया है और उसके साक्ष्य हैं, तो श्वेत पत्र जारी कर दोषियों को दंडित किया जाए।
आगे क्या होगा
डॉ. कृष्णासामी की माँग है कि SIR विवाद की जाँच के लिए एक स्वतंत्र आयोग का गठन हो और हीरा मणि मामले की जाँच SIT गहनता से करे। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में चुनावी निकाय की विश्वसनीयता और स्थानीय शासन पर सवाल एक साथ उठ रहे हैं। दोनों मामलों में जाँच की दिशा आने वाले हफ्तों में तय होने की उम्मीद है।