मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन: बजरंग दल ने कहा — अराजक आंदोलनों का हमेशा किया है विरोध
सारांश
मुख्य बातें
बजरंग दल ने 8 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों से उसका कोई संबंध नहीं है और संगठन किसी भी तरह के अराजक प्रदर्शन का सदा विरोध करता आया है। संगठन ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर यह स्थिति सार्वजनिक की।
बजरंग दल का आधिकारिक बयान
बजरंग दल ने एक्स पर लिखा, 'देश में किसी भी प्रकार के अराजक प्रदर्शन का बजरंग दल सदा विरोध करता रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की आड़ में हो रहे ऐसे प्रदर्शनों का भी बजरंग दल विरोध करता है।' यह बयान ऐसे समय आया जब कुछ खबरों में दावा किया जा रहा था कि बजरंग दल के कार्यकर्ता जंतर-मंतर पर एकत्र होने वाले हैं।
संगठन ने इन खबरों को 'भ्रामक दुष्प्रचार' करार दिया और कहा, 'बजरंग दल की ओर से ऐसी कोई योजना नहीं है। वैसे भी, जन समर्थन के अभाव में यह कथित आंदोलन, पूर्व की भांति अपनी स्वाभाविक मौत मरने वाला है।'
प्रदर्शनों के पीछे मुख्य आरोप
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध के पीछे मुख्य रूप से दो कारण गिनाए जा रहे हैं। पहला, विपक्षी दलों और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान मतदाता सूची से बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।
दूसरा कारण चुनाव आयोग के भीतर आंतरिक मतभेद से जुड़ा है। एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग के कुछ फैसलों पर 10 महीनों में 14 बार आपत्तियाँ दर्ज कराई थीं। आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने इन आपत्तियों को नजरअंदाज किया।
सर्वोच्च न्यायालय में याचिका
इस पूरे विवाद को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका भी दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने आयोग के अन्य सदस्यों की सहमति के बिना कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। गौरतलब है कि अभी तक चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आम जनता और लोकतंत्र पर असर
मतदाता सूची से नाम हटाने के आरोप और चुनाव आयोग में आंतरिक असहमति की खबरें भारत के चुनावी ढाँचे की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती हैं। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब देश के कई राज्यों में आगामी चुनावों की तैयारियाँ जारी हैं। आलोचकों का कहना है कि मतदाता सूची की शुद्धता लोकतंत्र की आधारशिला है और इस पर किसी भी तरह की लापरवाही की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका पर सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं हुई है। चुनाव आयोग की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। बजरंग दल के इस स्पष्टीकरण के बाद अब सभी की नज़रें विपक्षी दलों की अगली रणनीति और सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई पर टिकी हैं।