25 सितंबर 2026
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नागांव उपचुनाव 2026: सीएम हिमंता बोले — राष्ट्रवादी मुसलमानों ने भाजपा को वोट दिया, हम हिंदू-मुस्लिम राजनीति नहीं करते

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नागांव उपचुनाव 2026: सीएम हिमंता बोले — राष्ट्रवादी मुसलमानों ने भाजपा को वोट दिया, हम हिंदू-मुस्लिम राजनीति नहीं करते

सारांश

नागांव उपचुनाव से ठीक पहले CM हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि 'राष्ट्रवादी मुसलमान' पहले भी BJP को वोट दे चुके हैं। रूपोहीहाट और लहरीघाट के 35,000-38,000 वोटों का हवाला देकर उन्होंने इसे ज़मीनी हकीकत बताया। 6 अक्टूबर को होने वाला यह उपचुनाव BJP, कांग्रेस और AIUDF तीनों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है।

मुख्य बातें

असम CM हिमंता बिस्वा सरमा ने 25 सितंबर 2026 को कहा कि BJP को पिछले चुनावों में मुस्लिम समुदाय के एक वर्ग का समर्थन मिला है।
रूपोहीहाट और लहरीघाट विधानसभा सीटों पर BJP उम्मीदवारों को क्रमशः 35,000 और 38,000 वोट मिले थे।
नागांव लोकसभा उपचुनाव 6 अक्टूबर को होगा; मुकाबला BJP के देबाशीष शर्मा , कांग्रेस के सिबामणि बोरा और AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल के बीच है।
सरमा ने स्वीकार किया कि नागांव पारंपरिक रूप से BJP की सीट नहीं रही है।
नागांव क्षेत्र की 8 में से 4 विधानसभा सीटें BJP के पास, शेष 4 विपक्ष के पास।
उपचुनाव पूर्व कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे के बाद हो रहा है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 25 सितंबर 2026 को गुवाहाटी में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) को पिछले चुनावों में मुस्लिम समुदाय के एक वर्ग का समर्थन मिला है और यह कोई नई बात नहीं है। यह बयान 6 अक्टूबर को होने वाले नागांव लोकसभा उपचुनाव से ठीक पहले आया है, जो राज्य की राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील सीट मानी जाती है।

मुख्यमंत्री का बयान और दावे

मुख्यमंत्री सरमा ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'कई मुसलमान पहले से ही भाजपा को वोट देते आ रहे हैं। राष्ट्रवादी मुसलमान भी हैं।' उन्होंने रूपोहीहाट और लहरीघाट विधानसभा सीटों का उदाहरण देते हुए बताया कि इस साल के विधानसभा चुनावों में BJP उम्मीदवारों को क्रमशः लगभग 35,000 और 38,000 वोट मिले थे — दोनों अल्पसंख्यक बहुल सीटें हैं।

सरमा ने यह भी कहा कि वर्तमान चुनाव प्रचार में पार्टी की बैठकों में विभिन्न समुदायों के लोग शामिल हो रहे हैं और BJP को मुस्लिम समुदाय के कुछ वर्गों का समर्थन जारी है।

BJP पर सांप्रदायिकता के आरोपों को खारिज किया

मुख्यमंत्री ने इस धारणा को सिरे से नकार दिया कि BJP किसी विशेष धर्म के विरुद्ध है। उन्होंने कहा, 'हम धर्म के खिलाफ नहीं हैं। हम मुद्दों पर बात करते हैं। हम हिंदू-मुस्लिम राजनीति नहीं करते हैं।' सरमा ने महिलाओं के समान अधिकार और सामाजिक विकास को अपनी सरकार की प्राथमिकताओं में बताया।

नागांव उपचुनाव की पृष्ठभूमि

नागांव लोकसभा सीट पर उपचुनाव की नौबत पूर्व कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे के बाद आई। इस सीट पर तीन प्रमुख उम्मीदवार मैदान में हैं — BJP के देबाशीष शर्मा, कांग्रेस के सिबामणि बोरा, और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) प्रमुख बदरुद्दीन अजमल। गौरतलब है कि सरमा ने खुद स्वीकार किया कि नागांव पारंपरिक रूप से BJP की सीट नहीं रही है।

नागांव लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली आठ विधानसभा सीटों में से हालिया विधानसभा चुनाव में BJP ने चार पर जीत दर्ज की थी, जबकि विपक्ष ने शेष चार सीटें जीती थीं — इस प्रकार यह सीट दोनों पक्षों के लिए बराबर महत्त्व की है।

राजनीतिक संदर्भ और व्यापक असर

यह बयान ऐसे समय में आया है जब असम में मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका को लेकर राजनीतिक विमर्श तेज हो रहा है। AIUDF के बदरुद्दीन अजमल की उपस्थिति इस सीट पर मुस्लिम वोट के विभाजन की संभावना को बढ़ाती है, जो BJP के लिए रणनीतिक दृष्टि से अनुकूल हो सकती है। आलोचकों का कहना है कि 'राष्ट्रवादी मुसलमान' शब्द का प्रयोग मतदाताओं को उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर वर्गीकृत करने जैसा है, जो स्वयं BJP की 'मुद्दा-केंद्रित' राजनीति की घोषणा से विरोधाभासी हो सकता है।

असम में मुस्लिम आबादी कुल जनसंख्या का लगभग 34% है, जिससे अल्पसंख्यक मतदाताओं का रुझान कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है। 6 अक्टूबर को मतगणना के नतीजे तय करेंगे कि सरमा का यह दावा कितना ज़मीनी हकीकत से मेल खाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि सरमा एक साथ 'हम हिंदू-मुस्लिम राजनीति नहीं करते' भी कहते हैं। असम में AIUDF की मौजूदगी मुस्लिम वोट को विभाजित करती है, जो BJP के लिए गणितीय रूप से फायदेमंद हो सकती है — यानी 'समावेशन' की भाषा और 'विभाजन' की रणनीति एक साथ काम कर सकती हैं। नागांव में BJP की चार-चार की बराबरी यह भी बताती है कि जीत के लिए उसे पारंपरिक आधार से आगे जाना होगा। असली कसौटी यह है कि क्या 6 अक्टूबर का नतीजा सरमा के इस दावे को ज़मीनी समर्थन देता है या महज़ चुनावी बयानबाज़ी साबित होता है।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नागांव लोकसभा उपचुनाव 2026 क्यों हो रहा है?
पूर्व कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे के बाद नागांव लोकसभा सीट रिक्त हो गई, जिसके चलते 6 अक्टूबर 2026 को उपचुनाव कराया जा रहा है। यह सीट असम की राजनीतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण मानी जाती है।
CM हिमंता बिस्वा सरमा ने 'राष्ट्रवादी मुसलमान' से क्या मतलब निकाला?
सरमा ने कहा कि मुस्लिम समुदाय के वे सदस्य जो राष्ट्रवाद और विकास के मुद्दों को धर्म से ऊपर रखते हैं, उन्होंने पहले भी BJP को वोट दिया है। उन्होंने रूपोहीहाट और लहरीघाट जैसी अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर पार्टी को मिले हज़ारों वोटों को इसका प्रमाण बताया।
नागांव उपचुनाव में कौन-कौन से उम्मीदवार मैदान में हैं?
इस उपचुनाव में BJP के देबाशीष शर्मा, कांग्रेस के सिबामणि बोरा, और AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल प्रमुख उम्मीदवार हैं। AIUDF की उपस्थिति मुस्लिम मतों के विभाजन की संभावना को बढ़ाती है।
नागांव क्षेत्र में BJP का पिछला चुनावी प्रदर्शन कैसा रहा?
नागांव लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली आठ विधानसभा सीटों में से BJP ने चार पर जीत दर्ज की थी, जबकि विपक्ष ने शेष चार सीटें जीती थीं। सरमा ने स्वयं माना है कि नागांव पारंपरिक रूप से BJP की सीट नहीं रही है।
असम में मुस्लिम मतदाताओं का चुनावी महत्त्व क्या है?
असम की कुल जनसंख्या में मुस्लिम आबादी लगभग 34% है, जो कई सीटों पर चुनावी परिणाम निर्धारित करने में निर्णायक भूमिका निभाती है। अल्पसंख्यक बहुल विधानसभा सीटों पर BJP के प्रदर्शन को लेकर सरमा के दावे इसी संदर्भ में राजनीतिक महत्त्व रखते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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