नागांव उपचुनाव: CM हिमंत सरमा बोले — BJP जीती तो असम में सभी 126 सीटें जीतेंगे
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 15 सितंबर 2026 को नागांव लोकसभा उपचुनाव को लेकर एक बड़ा राजनीतिक बयान दिया — उनके अनुसार, यदि भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस सीट पर जीत दर्ज करती है, तो अगले विधानसभा चुनाव में पार्टी असम की सभी 126 विधानसभा सीटें जीत सकती है। 6 अक्टूबर 2026 को होने वाला यह उपचुनाव दोनों प्रमुख दलों के लिए 2029 से पहले की सबसे अहम राजनीतिक परीक्षा बन चुका है।
मुख्यमंत्री का बड़ा दावा
सरमा ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "अगर BJP नागांव उपचुनाव जीतती है, तो अगले विधानसभा चुनाव में हम 126 सीटें जीतेंगे।" उन्होंने यह भी माना कि पिछले एक महीने में मतदाताओं का झुकाव BJP की ओर हुआ है, लेकिन साथ ही यह स्वीकार किया कि नागांव ऐतिहासिक रूप से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) का गढ़ रहा है।
सरमा के शब्दों में, "हमने पिछले एक महीने में देखा है कि लोग BJP की ओर झुक रहे हैं। लेकिन यह BJP की पारंपरिक सीट नहीं है; यह हमेशा से कांग्रेस की सीट रही है।" इस स्वीकारोक्ति से स्पष्ट है कि पार्टी इस मुकाबले को हल्के में नहीं ले रही।
नागांव सीट का चुनावी इतिहास
नागांव लोकसभा सीट पर कांग्रेस ने 2019 और 2024 दोनों आम चुनावों में जीत हासिल की थी। यह सीट तब रिक्त हुई जब सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने इस्तीफा देकर BJP में शामिल हो गए और बाद में दिसपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा। गौरतलब है कि लगातार दो लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की जीत इस सीट की रणनीतिक अहमियत को और बढ़ा देती है।
यह ऐसे समय में आया है जब मध्य असम में BJP अपनी संगठनात्मक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। नागांव की जीत पार्टी के उस दावे को बल देगी कि उसका प्रभाव पारंपरिक कांग्रेसी इलाकों में भी पहुँच चुका है।
दोनों पार्टियों के उम्मीदवार
BJP ने पूर्व IAS अधिकारी और नागांव के पूर्व डिप्टी कमिश्नर देवाशीष शर्मा को प्रत्याशी बनाया है। वहीं, कांग्रेस ने बटाद्रोबा की पूर्व विधायक शिबमोनी बोरा को मैदान में उतारा है। दोनों उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि इस मुकाबले को और दिलचस्प बनाती है — एक ओर प्रशासनिक अनुभव, दूसरी ओर जमीनी राजनीति का लंबा इतिहास।
दोनों दलों के लिए राजनीतिक दाँव
BJP के लिए नागांव जीतना महज एक संसदीय उपचुनाव की सफलता नहीं होगी — यह पार्टी की विस्तार रणनीति की प्रमाणिकता का सवाल है। यदि BJP यह सीट जीतती है, तो यह संकेत होगा कि पारंपरिक कांग्रेसी मतदाता भी धीरे धीरे BJP की ओर आ रहे हैं।
दूसरी ओर, कांग्रेस के लिए इस सीट को बचाना उतना ही ज़रूरी है। पार्टी अगर नागांव में अपनी पकड़ बनाए रखती है, तो यह मध्य असम में उसके पारंपरिक वोट बैंक की मज़बूती का प्रमाण होगा और 2029 से पहले एक ठोस जवाबी संदेश भी।
आगे की राह
6 अक्टूबर 2026 को मतदान के साथ ही असम की राजनीति का तापमान चरम पर होगा। नतीजों को राज्य के चुनावी मूड के शुरुआती संकेतक के रूप में देखा जाएगा। सरमा की इस भविष्यवाणी ने इस उपचुनाव को राज्य की सीमाओं से परे राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है।