नगांव लोकसभा उपचुनाव: भाजपा उम्मीदवार देवाशीष शर्मा को अल्पसंख्यक क्षेत्रों से भी जीत का भरोसा
सारांश
मुख्य बातें
असम की नगांव लोकसभा सीट पर 6 अक्टूबर 2026 को होने वाले उपचुनाव के लिए प्रचार तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार देवाशीष शर्मा ने जीत को लेकर पूरा आत्मविश्वास जताया है और कहा है कि उन्हें अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों सहित पूरे निर्वाचन क्षेत्र से व्यापक जनसमर्थन मिलने की उम्मीद है। 9 अक्टूबर को मतगणना होनी है।
भाजपा की रणनीति और देवाशीष शर्मा का दावा
देवाशीष शर्मा ने कहा कि भाजपा चुनावी मुकाबले के लिए पूरी तरह तैयार है और पार्टी की जीत को लेकर उन्हें कोई संशय नहीं है। उन्होंने प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों को भी शुभकामनाएँ दीं।
शर्मा ने अपने समर्थन के लिए असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष, मंत्रियों, विधायकों और नगांव की जनता का आभार व्यक्त किया। उन्होंने यह भी कहा कि मतदाताओं को भावनात्मक मुद्दों के बजाय विकास और दीर्घकालिक जनकल्याण को प्राथमिकता देनी चाहिए।
शर्मा के अनुसार, 'अल्पसंख्यक क्षेत्रों के लोग भी विकास चाहते हैं और भाजपा सरकार उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम है। पार्टी को अल्पसंख्यक मतदाताओं का भी अच्छा समर्थन मिलेगा।'
मुख्य प्रतिद्वंद्वी और राजनीतिक समीकरण
नगांव उपचुनाव में भाजपा, कांग्रेस, ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) और अन्य दल अपने-अपने वोट बैंक को मज़बूत करने में जुटे हैं। AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने भी इस सीट पर जीत का दावा किया है — यानी दोनों प्रमुख दावेदार एक ही निर्वाचन क्षेत्र में अपनी-अपनी जीत को तय मान रहे हैं।
गौरतलब है कि 2019 और 2024 के आम चुनावों में यह सीट कांग्रेस के पास रही थी। कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे और भाजपा में शामिल होकर दिसपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के कारण यह सीट रिक्त हुई थी।
सीट का ऐतिहासिक महत्व
नगांव लोकसभा सीट परंपरागत रूप से कांग्रेस के गढ़ के रूप में देखी जाती है। लगातार दो आम चुनावों में जीत के बाद अब यह सीट उपचुनाव में भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा बन गई है।
यह ऐसे समय में आया है जब असम में भाजपा अपनी पकड़ को और मज़बूत करने की कोशिश में है और मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में पार्टी अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में भी पहुँच बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।
आम जनता पर असर और आगे की राह
भाजपा की रणनीति अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में विकास को केंद्रीय चुनावी मुद्दा बनाने पर टिकी है — यदि यह सफल होती है, तो यह असम की राजनीतिक बनावट में एक उल्लेखनीय बदलाव का संकेत देगी। नतीजे 9 अक्टूबर 2026 को सामने आएंगे और राज्य के आगामी राजनीतिक परिदृश्य को दिशा देने में अहम भूमिका निभाएंगे।