टीएमसी नाम और चुनाव चिन्ह विवाद: ईसीआई कल दोनों गुटों की सुनवाई करेगा, 6 अक्टूबर उपचुनाव से पहले फैसला
सारांश
मुख्य बातें
चुनाव आयोग (ईसीआई) गुरुवार, 17 सितंबर को नई दिल्ली स्थित अशोक रोड मुख्यालय में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दोनों प्रतिस्पर्धी गुटों के प्रतिनिधिमंडलों से अलग-अलग मुलाकात करेगा। सूत्रों के अनुसार, इन बैठकों के बाद आयोग पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अपना फैसला सुना सकता है — यह निर्णय नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा क्षेत्रों में 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनावों से पहले आना अनिवार्य है।
बैठकों का क्रम और समय-सारणी
पहले, पार्टी से निष्कासित विधायक रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट — जिसे 'बागी लेकिन बहुमत वाला गुट' कहा जा रहा है — दोपहर 3 बजे ईसीआई की पूर्ण पीठ के समक्ष अपना पक्ष रखेगा। इस प्रतिनिधिमंडल में पाँच सदस्य शामिल होंगे।
इसके ठीक एक घंटे बाद, शाम 4 बजे, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट — जिसे 'असली लेकिन अल्पसंख्यक गुट' बताया जा रहा है — उसी स्थान पर ईसीआई की पूर्ण पीठ से मिलेगा। इस प्रतिनिधिमंडल में भी पाँच सदस्य होंगे।
एजेंडे पर क्या होगा चर्चा
ईसीआई सचिव अश्वनी कुमार मोहाल ने बुधवार को दोनों गुटों को भेजे गए निमंत्रण-संदेशों में बैठक के एजेंडे का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया। हालाँकि, आयोग के सूत्रों के अनुसार, दोनों प्रतिनिधिमंडल पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अपने-अपने दावों के समर्थन में दलीलें पेश करेंगे। आयोग दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद ही अंतिम निर्णय लेगा।
गौरतलब है कि टीएमसी में यह आंतरिक टकराव ऐसे समय में उभरा है जब पश्चिम बंगाल में दो अहम विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की तारीख सामने है। यह पहली बार नहीं है कि किसी राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी में गुटबाजी के चलते चुनाव आयोग को हस्तक्षेप करना पड़ा हो — इससे पहले भी कई दलों में नाम और चिन्ह को लेकर ऐसे विवाद सामने आए हैं।
उपचुनाव के उम्मीदवार
रेजीनगर विधानसभा क्षेत्र से ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने रबीउल आलम चौधरी को उम्मीदवार बनाया है, जबकि रिताब्रता बनर्जी के गुट ने शेख सैफुद्दीन को मैदान में उतारा है।
नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र — जो राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है — से ममता गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे हैं, जबकि रिताब्रता गुट ने मोहम्मद एतेसामुल हक को प्रत्याशी घोषित किया है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख बुधवार, 16 सितंबर थी और दोनों गुट अपने-अपने उम्मीदवारों का नामांकन पहले ही करा चुके हैं।
फैसले का महत्व और आगे की राह
यह सुनवाई इसलिए निर्णायक है क्योंकि जिस गुट को ईसीआई आधिकारिक तृणमूल कांग्रेस मानेगा, उसी के उम्मीदवार को पार्टी के स्थापित नाम और 'जोड़ा घास फूल' चुनाव चिन्ह के साथ चुनाव लड़ने का अधिकार मिलेगा। दूसरे गुट को अलग नाम और नए चिन्ह के साथ चुनाव मैदान में उतरना होगा, जो उपचुनाव में उसकी स्थिति को कमज़ोर कर सकता है।
आयोग का यह फैसला न केवल इन दो सीटों के नतीजों पर, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति के व्यापक समीकरणों पर भी गहरा असर डाल सकता है।