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टीएमसी नाम और चुनाव चिन्ह विवाद: ईसीआई कल दोनों गुटों की सुनवाई करेगा, 6 अक्टूबर उपचुनाव से पहले फैसला

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टीएमसी नाम और चुनाव चिन्ह विवाद: ईसीआई कल दोनों गुटों की सुनवाई करेगा, 6 अक्टूबर उपचुनाव से पहले फैसला

सारांश

तृणमूल कांग्रेस में टूट का संकट अब चुनाव आयोग के दरवाजे पर है। 17 सितंबर को ईसीआई की पूर्ण पीठ के सामने रिताब्रता बनर्जी और ममता बनर्जी के गुट अपना-अपना दावा पेश करेंगे। 6 अक्टूबर के नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव से पहले यह फैसला पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।

मुख्य बातें

चुनाव आयोग ( ईसीआई ) 17 सितंबर को नई दिल्ली में टीएमसी के दोनों गुटों की अलग-अलग सुनवाई करेगा।
रिताब्रता बनर्जी का गुट दोपहर 3 बजे और ममता बनर्जी व अभिषेक बनर्जी का गुट शाम 4 बजे ईसीआई पूर्ण पीठ के समक्ष पेश होगा।
दोनों गुट पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अपना दावा पेश करेंगे; प्रत्येक प्रतिनिधिमंडल में पाँच सदस्य होंगे।
नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव 6 अक्टूबर को निर्धारित हैं।
दोनों गुट उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर चुके हैं; अंतिम तारीख 16 सितंबर थी।
आयोग का फैसला तय करेगा कि किस गुट को पार्टी का आधिकारिक नाम और चिन्ह मिलेगा।

चुनाव आयोग (ईसीआई) गुरुवार, 17 सितंबर को नई दिल्ली स्थित अशोक रोड मुख्यालय में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दोनों प्रतिस्पर्धी गुटों के प्रतिनिधिमंडलों से अलग-अलग मुलाकात करेगा। सूत्रों के अनुसार, इन बैठकों के बाद आयोग पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अपना फैसला सुना सकता है — यह निर्णय नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा क्षेत्रों में 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनावों से पहले आना अनिवार्य है।

बैठकों का क्रम और समय-सारणी

पहले, पार्टी से निष्कासित विधायक रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट — जिसे 'बागी लेकिन बहुमत वाला गुट' कहा जा रहा है — दोपहर 3 बजे ईसीआई की पूर्ण पीठ के समक्ष अपना पक्ष रखेगा। इस प्रतिनिधिमंडल में पाँच सदस्य शामिल होंगे।

इसके ठीक एक घंटे बाद, शाम 4 बजे, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट — जिसे 'असली लेकिन अल्पसंख्यक गुट' बताया जा रहा है — उसी स्थान पर ईसीआई की पूर्ण पीठ से मिलेगा। इस प्रतिनिधिमंडल में भी पाँच सदस्य होंगे।

एजेंडे पर क्या होगा चर्चा

ईसीआई सचिव अश्वनी कुमार मोहाल ने बुधवार को दोनों गुटों को भेजे गए निमंत्रण-संदेशों में बैठक के एजेंडे का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया। हालाँकि, आयोग के सूत्रों के अनुसार, दोनों प्रतिनिधिमंडल पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अपने-अपने दावों के समर्थन में दलीलें पेश करेंगे। आयोग दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद ही अंतिम निर्णय लेगा।

गौरतलब है कि टीएमसी में यह आंतरिक टकराव ऐसे समय में उभरा है जब पश्चिम बंगाल में दो अहम विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की तारीख सामने है। यह पहली बार नहीं है कि किसी राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी में गुटबाजी के चलते चुनाव आयोग को हस्तक्षेप करना पड़ा हो — इससे पहले भी कई दलों में नाम और चिन्ह को लेकर ऐसे विवाद सामने आए हैं।

उपचुनाव के उम्मीदवार

रेजीनगर विधानसभा क्षेत्र से ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने रबीउल आलम चौधरी को उम्मीदवार बनाया है, जबकि रिताब्रता बनर्जी के गुट ने शेख सैफुद्दीन को मैदान में उतारा है।

नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र — जो राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है — से ममता गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे हैं, जबकि रिताब्रता गुट ने मोहम्मद एतेसामुल हक को प्रत्याशी घोषित किया है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख बुधवार, 16 सितंबर थी और दोनों गुट अपने-अपने उम्मीदवारों का नामांकन पहले ही करा चुके हैं।

फैसले का महत्व और आगे की राह

यह सुनवाई इसलिए निर्णायक है क्योंकि जिस गुट को ईसीआई आधिकारिक तृणमूल कांग्रेस मानेगा, उसी के उम्मीदवार को पार्टी के स्थापित नाम और 'जोड़ा घास फूल' चुनाव चिन्ह के साथ चुनाव लड़ने का अधिकार मिलेगा। दूसरे गुट को अलग नाम और नए चिन्ह के साथ चुनाव मैदान में उतरना होगा, जो उपचुनाव में उसकी स्थिति को कमज़ोर कर सकता है।

आयोग का यह फैसला न केवल इन दो सीटों के नतीजों पर, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति के व्यापक समीकरणों पर भी गहरा असर डाल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि नेतृत्व वाला गुट खुद को 'अल्पसंख्यक' स्थिति में पाता है — यह विरोधाभास किसी भी लोकतांत्रिक ढाँचे के लिए असहज करने वाला है। ईसीआई का फैसला 6 अक्टूबर के उपचुनावों से पहले आना अनिवार्य है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या आयोग संख्याबल को तरजीह देगा या संगठनात्मक वैधता को — और इस निर्णय की मिसाल भविष्य में अन्य दलों के टूट के मामलों में भी उद्धृत होगी।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चुनाव आयोग टीएमसी के नाम और चुनाव चिन्ह पर क्यों सुनवाई कर रहा है?
तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक विभाजन के बाद दो गुट बन गए हैं, जिनमें से दोनों पार्टी के आधिकारिक नाम और चुनाव चिन्ह पर अपना दावा जता रहे हैं। चुनाव आयोग दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह तय करेगा कि कौन-सा गुट कानूनी रूप से असली तृणमूल कांग्रेस है।
17 सितंबर की सुनवाई में कौन-कौन से गुट शामिल होंगे?
पहला गुट निष्कासित विधायक रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाला है, जो दोपहर 3 बजे पेश होगा। दूसरा गुट पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाला है, जो शाम 4 बजे अपनी दलील रखेगा। दोनों प्रतिनिधिमंडलों में पाँच-पाँच सदस्य होंगे।
नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव में दोनों गुटों के उम्मीदवार कौन हैं?
रेजीनगर से ममता गुट के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी और रिताब्रता गुट के उम्मीदवार शेख सैफुद्दीन हैं। नंदीग्राम से ममता गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे और रिताब्रता गुट के उम्मीदवार मोहम्मद एतेसामुल हक हैं।
चुनाव आयोग के फैसले का उपचुनाव पर क्या असर होगा?
जिस गुट को आयोग आधिकारिक टीएमसी मानेगा, उसके उम्मीदवार पार्टी के स्थापित नाम और चुनाव चिन्ह के साथ चुनाव लड़ सकेंगे। दूसरे गुट को नए नाम और चिन्ह के साथ मैदान में उतरना होगा, जो मतदाताओं के बीच उसकी पहचान को प्रभावित कर सकता है।
नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव कब होंगे?
दोनों विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव 6 अक्टूबर को निर्धारित हैं। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 16 सितंबर थी और दोनों गुट अपने उम्मीदवारों का नामांकन करा चुके हैं।
राष्ट्र प्रेस
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