17 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मिर्जापुर सपा जिलाध्यक्ष बदले: अशोक यादव नियुक्त, देवी प्रसाद चौधरी पदमुक्त

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मिर्जापुर सपा जिलाध्यक्ष बदले: अशोक यादव नियुक्त, देवी प्रसाद चौधरी पदमुक्त

सारांश

2027 विधानसभा चुनाव की आहट में सपा ने मिर्जापुर में बड़ा संगठनात्मक दांव खेला है। अशोक यादव की वापसी और देवी प्रसाद चौधरी की विदाई यह बताती है कि पार्टी पूर्वांचल में निष्क्रिय जिला इकाइयों को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

मुख्य बातें

अशोक यादव को 16 सितंबर 2026 को सपा मिर्जापुर का कार्यवाहक जिलाध्यक्ष नामित किया गया।
मौजूदा जिलाध्यक्ष देवी प्रसाद चौधरी को संगठनात्मक निष्क्रियता के आरोप में पद से हटाया गया।
आदेश राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की अनुमति से 18 कॉपरनिक्स लेन, नई दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्यालय से जारी हुआ।
अशोक यादव पहले भी सपा के मिर्जापुर जिलाध्यक्ष रह चुके हैं; सिविल लाइन क्षेत्र के जमीनी नेता माने जाते हैं।
फेरबदल का लक्ष्य 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पूर्वांचल में बूथ-स्तरीय संगठन को मज़बूत करना है।

समाजवादी पार्टी (सपा) ने 16 सितंबर 2026 को मिर्जापुर जिले का संगठनात्मक नेतृत्व बदल दिया। पार्टी हाईकमान ने अशोक यादव को जिला मिर्जापुर का कार्यवाहक जिलाध्यक्ष नामित किया है, जबकि मौजूदा जिलाध्यक्ष देवी प्रसाद चौधरी को पद से मुक्त कर दिया गया है। यह फेरबदल 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनज़र किया गया है।

आदेश का विवरण

समाजवादी पार्टी के केंद्रीय कार्यालय, 18 कॉपरनिक्स लेन, नई दिल्ली से बुधवार को जारी कार्यालय-ज्ञापन के अनुसार, सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की अनुमति से यह नियुक्ति की गई है। आदेश पर राष्ट्रीय अध्यक्ष के निजी सचिव गंगाराम के हस्ताक्षर हैं। आदेश की प्रतिलिपि राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव, प्रदेश अध्यक्ष उत्तर प्रदेश, नवनियुक्त कार्यवाहक जिलाध्यक्ष अशोक यादव और पूर्व जिलाध्यक्ष देवी प्रसाद चौधरी को भेजी गई है।

बदलाव की वजह

सूत्रों के अनुसार, मिर्जापुर में संगठन की निष्क्रियता और लगातार मिल रही शिकायतों के बाद यह निर्णय लिया गया। देवी प्रसाद चौधरी पर संगठनात्मक गतिविधियों में सुस्ती और चुनावी तैयारियों में अपेक्षित सक्रियता न दिखाने का आरोप बताया जा रहा है। गौरतलब है कि 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए सपा पूरे प्रदेश में बूथ स्तर तक संगठन को मज़बूत करने की मुहिम में जुटी है।

अशोक यादव: अनुभवी जमीनी नेता

अशोक यादव, जो सिविल लाइन, मिर्जापुर के निवासी हैं, इससे पहले भी सपा के जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। संगठन में उनकी मज़बूत पकड़ और कार्यकर्ताओं में उनकी अच्छी पैठ के कारण पार्टी ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया है। उन्हें जमीनी स्तर पर काम करने वाले अनुभवी नेता के रूप में जाना जाता है।

पूर्वांचल में मिर्जापुर का महत्व

पूर्वांचल क्षेत्र में मिर्जापुर सपा के लिए रणनीतिक रूप से अहम जिला माना जाता है। पार्टी यहाँ नए सिरे से सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश कर रही है। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब सपा प्रदेश भर में संगठनात्मक ढाँचे को चुस्त-दुरुस्त करने में लगी है, ताकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मज़बूत संगठन का मुकाबला किया जा सके। आने वाले हफ्तों में नवनियुक्त जिलाध्यक्ष द्वारा बूथ-स्तरीय गतिविधियों को तेज़ किए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सपा की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है जिसमें पार्टी निष्क्रिय जिला इकाइयों को 2027 से पहले झाड़-पोंछकर तैयार करना चाहती है। सवाल यह है कि क्या सिर्फ चेहरा बदलने से संगठनात्मक जड़ता दूर होगी, या पार्टी को संसाधन और रणनीति दोनों में बदलाव करना होगा। पूर्वांचल में BJP का ज़मीनी तंत्र बेहद मज़बूत है और मिर्जापुर जैसे जिलों में सपा को सामाजिक समीकरण साधने के लिए सिर्फ नेतृत्व नहीं, ठोस जनसंपर्क कार्यक्रम भी चाहिए।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सपा ने मिर्जापुर में जिलाध्यक्ष क्यों बदला?
सूत्रों के अनुसार, संगठनात्मक निष्क्रियता और लगातार मिल रही शिकायतों के कारण देवी प्रसाद चौधरी को हटाया गया। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बूथ-स्तरीय संगठन को मज़बूत करने के लिए अशोक यादव को कार्यवाहक जिलाध्यक्ष बनाया गया है।
यह आदेश किसने जारी किया?
यह आदेश सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की अनुमति से नई दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्यालय से जारी हुआ। आदेश पर राष्ट्रीय अध्यक्ष के निजी सचिव गंगाराम के हस्ताक्षर हैं।
मिर्जापुर सपा के लिए रणनीतिक रूप से क्यों अहम है?
मिर्जापुर पूर्वांचल का एक महत्वपूर्ण जिला है जहाँ सपा नए सिरे से सामाजिक समीकरण साधना चाहती है। 2027 विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र की सीटें पार्टी के लिए निर्णायक हो सकती हैं।
देवी प्रसाद चौधरी को क्यों हटाया गया?
सूत्रों के अनुसार, देवी प्रसाद चौधरी पर संगठनात्मक गतिविधियों में सुस्ती और चुनावी तैयारियों में अपेक्षित सक्रियता न दिखाने का आरोप था। इन्हीं कारणों से पार्टी हाईकमान ने उन्हें पद से मुक्त करने का निर्णय लिया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 21 मिनट पहले
  2. 21 मिनट पहले
  3. 26 मिनट पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 1 साल पहले