6 जुलाई 2026
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तृणमूल कांग्रेस नाम-चिन्ह विवाद: दोनों गुटों ने चुनाव आयोग को दस्तावेज सौंपे, अब ECI के फैसले का इंतज़ार

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तृणमूल कांग्रेस नाम-चिन्ह विवाद: दोनों गुटों ने चुनाव आयोग को दस्तावेज सौंपे, अब ECI के फैसले का इंतज़ार

सारांश

तृणमूल कांग्रेस का आंतरिक संकट अब चुनाव आयोग के दरबार में पहुँच गया है। ममता-अभिषेक गुट और ऋतब्रत बनर्जी के विद्रोही गुट ने पार्टी के नाम, चिन्ह और कोष पर दावे के लिए दस्तावेज जमा किए — लेकिन विश्लेषकों का कहना है, असली लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में होगी।

मुख्य बातें

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों ने 6 जुलाई 2026 को भारतीय चुनाव आयोग (ECI) में दस्तावेज जमा किए।
ममता बनर्जी व अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की ओर से कल्याण बनर्जी , महुआ मोइत्रा और सागरिका घोष स्वयं उपस्थित हुए।
निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले 'बहुसंख्यक' गुट ने वकीलों के माध्यम से दस्तावेज जमा कराए।
कल्याण बनर्जी ने BJP पर विरोधी गुट का समर्थन करने का आरोप लगाया और सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी दी।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार ECI का फैसला विवाद का अंतिम समाधान नहीं होगा।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों ने सोमवार, 6 जुलाई 2026 को नई दिल्ली स्थित भारतीय चुनाव आयोग (ECI) मुख्यालय में पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अपने-अपने दावों के समर्थन में दस्तावेज जमा किए। दोनों गुट न केवल पार्टी की पहचान, बल्कि पार्टी के कोष पर भी अधिकार का दावा कर रहे हैं।

कौन हैं दोनों गुट

पहला गुट, जिसे 'मूल लेकिन अल्पसंख्यक' गुट कहा जा रहा है, का नेतृत्व पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी कर रहे हैं। इस गुट की ओर से लोकसभा सदस्य कल्याण बनर्जी, महुआ मोइत्रा और राज्यसभा सदस्य सागरिका घोष स्वयं ECI कार्यालय पहुँचकर दस्तावेज जमा किए।

दूसरा गुट, जिसे 'विद्रोही लेकिन बहुसंख्यक' गुट कहा जा रहा है, का नेतृत्व निष्कासित TMC विधायक ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं। इस गुट ने व्यक्तिगत प्रतिनिधिमंडल भेजने के बजाय वकीलों की एक टीम के माध्यम से आयोग में दस्तावेज जमा कराए।

मुख्य घटनाक्रम

पिछले सप्ताह ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने ECI की पूर्ण पीठ से मुलाकात कर पार्टी के नाम और चिन्ह पर अपने अधिकारों के समर्थन में तर्क रखे थे। सोमवार को दस्तावेज जमा करने के साथ दोनों गुटों की औपचारिक प्रक्रिया पूरी हो गई है। हालाँकि, ऋतब्रत गुट ने अपने जमा किए दस्तावेजों की विषयवस्तु पर अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सार्वजनिक नहीं किया है।

कल्याण बनर्जी का बयान

वरिष्ठ अधिवक्ता एवं लोकसभा सदस्य कल्याण बनर्जी ने दस्तावेज जमा करने के बाद मीडिया से बात करते हुए दावा किया कि कानूनी दृष्टिकोण से उनके गुट की स्थिति कहीं अधिक मज़बूत है। उन्होंने यह भी कहा कि चूँकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) विरोधी गुट का समर्थन कर रही है, इसलिए परिणाम अनिश्चित हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया, "इसके बाद हम इस मामले को अदालत में उठाएंगे और जनता से भी संपर्क करेंगे।"

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ECI का फैसला इस विवाद का अंतिम पड़ाव नहीं होगा। जो भी गुट आयोग के निर्णय से असंतुष्ट होगा, वह सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ धीरे-धीरे शुरू हो रही हैं और पार्टी का यह आंतरिक संकट मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर सकता है।

आगे क्या होगा

गेंद अब भारतीय चुनाव आयोग के पाले में है। आयोग दोनों पक्षों के दस्तावेजों की समीक्षा के बाद यह तय करेगा कि पार्टी का आधिकारिक नाम और 'जोड़ा घास फूल' चुनाव चिन्ह किस गुट को मिलेगा। गौरतलब है कि इस तरह के दल-विभाजन विवादों में ECI के फैसले को अदालत में चुनौती देना एक स्थापित राजनीतिक परंपरा बन चुकी है — जैसा कि अतीत में शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के मामलों में देखा गया।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो इसे 'केंद्र की साज़िश' के रूप में पेश किया जाएगा। असली सवाल यह है कि इस संकट में बंगाल का वह मतदाता कहाँ खड़ा है, जिसने वर्षों से 'जोड़ा घास फूल' को एक पहचान की तरह अपनाया है।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तृणमूल कांग्रेस के नाम और चिन्ह विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
तृणमूल कांग्रेस में दो गुटों के बीच पार्टी के आधिकारिक नाम, चुनाव चिन्ह और कोष पर अधिकार को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। ममता बनर्जी व अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले मूल गुट और निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के विद्रोही गुट ने ECI में अपने-अपने दावे पेश किए हैं।
ECI में दस्तावेज जमा करने के बाद अब क्या होगा?
भारतीय चुनाव आयोग दोनों गुटों के दस्तावेजों की समीक्षा करेगा और तय करेगा कि पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह किसे मिलेगा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार जो गुट ECI के फैसले से असंतुष्ट होगा, वह सर्वोच्च न्यायालय का रुख करेगा।
ममता बनर्जी गुट ने BJP पर क्या आरोप लगाया?
लोकसभा सदस्य कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ऋतब्रत बनर्जी के विद्रोही गुट का समर्थन कर रही है, जिससे ECI की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस मामले को अदालत में उठाया जाएगा और जनता से भी संपर्क किया जाएगा।
ऋतब्रत बनर्जी का गुट 'बहुसंख्यक' क्यों कहलाता है?
ऋतब्रत बनर्जी के गुट का दावा है कि TMC के अधिकांश विधायक और नेता उनके साथ हैं, इसलिए उन्हें 'बहुसंख्यक' गुट कहा जा रहा है। हालाँकि, ममता बनर्जी का गुट खुद को पार्टी का 'मूल' स्वरूप बताता है।
क्या ECI के फैसले के बाद भी विवाद जारी रह सकता है?
हाँ, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ECI का फैसला इस विवाद का अंतिम समाधान नहीं होगा। शिवसेना और NCP जैसे पिछले दल-विभाजन विवादों में भी ECI के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।
राष्ट्र प्रेस
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