10 अगस्त 2026
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टीएमसी विभाजन: ममता गुट ने चुनाव आयोग को 'असली' राष्ट्रीय कार्यसमिति की सूची सौंपी

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टीएमसी विभाजन: ममता गुट ने चुनाव आयोग को 'असली' राष्ट्रीय कार्यसमिति की सूची सौंपी

सारांश

टीएमसी में दो समानांतर राष्ट्रीय कार्यसमितियाँ — एक ममता गुट की, एक विद्रोहियों की। दोनों ने चुनाव आयोग का दरवाज़ा खटखटाया है। अब ECI का फैसला तय करेगा कि असली टीएमसी कौन है।

मुख्य बातें

ममता बनर्जी समर्थक गुट ने 23 जून 2026 को चुनाव आयोग (ECI) को टीएमसी की 'मूल' राष्ट्रीय कार्यसमिति की सूची सौंपी।
ममता गुट की सूची में ममता बनर्जी राष्ट्रीय अध्यक्ष, सुब्रत बक्शी उपाध्यक्ष और अभिषेक बनर्जी महासचिव हैं।
विद्रोही गुट ने अरूप रॉय को अध्यक्ष बनाकर समानांतर कार्यसमिति घोषित की; ममता और अभिषेक दोनों को बाहर रखा।
ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला विद्रोही गुट विधानसभा में TMC का 'बहुमत' गुट बताया जा रहा है।
दोनों गुटों ने ECI से अपनी-अपनी कार्यसमिति को वैध मान्यता देने की माँग की है।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) में गहराते संगठनात्मक संकट के बीच ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के प्रति निष्ठावान गुट ने 23 जून 2026 को चुनाव आयोग (ECI) को पत्र भेजकर पार्टी की उस राष्ट्रीय कार्यसमिति का विवरण सौंपा, जिसे उसने TMC की 'मूल' और 'वास्तविक' कार्यसमिति बताया है। यह कदम कोलकाता में उस समय उठाया गया, जब पश्चिम बंगाल विधानसभा में TMC के विद्रोही बहुमत गुट ने एक समानांतर राष्ट्रीय कार्यसमिति की घोषणा कर दी थी।

दो समानांतर कार्यसमितियाँ: घटनाक्रम

सूत्रों के अनुसार, ममता समर्थक गुट ने सोमवार रात चुनाव आयोग को यह सूची भेजी। इससे कुछ ही घंटे पहले विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले विद्रोही गुट ने एक नई राष्ट्रीय कार्यसमिति का ऐलान किया था, जिसमें ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी — दोनों को जानबूझकर बाहर रखा गया। यह ऐसे समय में आया है जब TMC के भीतर 'अल्पमत बनाम बहुमत' का संघर्ष खुलकर सामने आ चुका है।

ममता गुट की कार्यसमिति: कौन-कौन शामिल

चुनाव आयोग को सौंपी गई सूची में ममता बनर्जी को राष्ट्रीय अध्यक्ष, सुब्रत बक्शी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और अभिषेक बनर्जी को महासचिव के रूप में दर्शाया गया है। राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन को संयुक्त सचिव, तथा पूर्व राज्यसभा सांसद सुभाषिश चक्रवर्ती को कोषाध्यक्ष बनाया गया है।

विद्रोही गुट की समानांतर कार्यसमिति

दूसरी ओर, विद्रोही गुट ने सोमवार शाम जो नई राष्ट्रीय कार्यसमिति घोषित की, उसमें वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री अरूप रॉय को अध्यक्ष बनाया गया है — ममता बनर्जी की जगह। पूर्व मंत्री अरूप विश्वास को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि विधायक फिरहाद हकीम और रथीन घोष भी उपाध्यक्ष की भूमिका में हैं। ऋतब्रत बनर्जी, जावेद खान, संदीपन साहा और सबीना यास्मीन को महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है, तथा अखरुज्जमान कोषाध्यक्ष होंगे।

चुनाव आयोग से मान्यता की माँग

ममता समर्थक 'मूल लेकिन अल्पमत' गुट ने अपने पत्र में चुनाव आयोग से स्पष्ट रूप से कहा है कि उनकी प्रस्तुत कार्यसमिति ही पार्टी की वैध संरचना है और विद्रोही गुट द्वारा घोषित नई समिति को किसी भी रूप में मान्यता नहीं दी जानी चाहिए। गौरतलब है कि इस तरह के विवादों में ECI का निर्णय पार्टी के चुनाव चिह्न और संगठनात्मक वैधता के लिए निर्णायक होता है।

विद्रोही गुट की प्रतिक्रिया

इस घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि वे इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देना चाहते, लेकिन दूसरे गुट को अपनी शुभकामनाएँ देते हैं। यह संयमित प्रतिक्रिया इस बात का संकेत है कि दोनों पक्ष अब अपनी लड़ाई सड़क के बजाय संस्थागत मंचों — विशेषकर चुनाव आयोग — पर लड़ने की रणनीति अपना रहे हैं। आने वाले दिनों में ECI का रुख TMC के भविष्य की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

और ECI को इसी उलझन को सुलझाना होगा। गौरतलब है कि 2022 में शिवसेना और 2023 में NCP के विभाजन में भी ECI ने चुनाव चिह्न के आधार पर राजनीतिक भाग्य तय किए थे — TMC के लिए वह मिसाल चेतावनी भी है और रोडमैप भी। अभिषेक बनर्जी की राजनीतिक भूमिका इस पूरे विवाद की धुरी है, और उनका भविष्य काफी हद तक ECI के अगले कदम पर निर्भर करेगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टीएमसी में राष्ट्रीय कार्यसमिति को लेकर विवाद क्यों है?
पश्चिम बंगाल विधानसभा में टीएमसी के विद्रोही बहुमत गुट ने एक समानांतर राष्ट्रीय कार्यसमिति घोषित की, जिसमें ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को शामिल नहीं किया गया। इसके जवाब में ममता समर्थक गुट ने चुनाव आयोग को अपनी 'असली' कार्यसमिति की सूची भेजकर विद्रोही समिति को अमान्य घोषित करने की माँग की है।
ममता गुट की राष्ट्रीय कार्यसमिति में कौन-कौन हैं?
ममता समर्थक गुट की सूची में ममता बनर्जी राष्ट्रीय अध्यक्ष, सुब्रत बक्शी उपाध्यक्ष और अभिषेक बनर्जी महासचिव हैं। राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन संयुक्त सचिव, तथा सुभाषिश चक्रवर्ती कोषाध्यक्ष हैं।
विद्रोही गुट की नई कार्यसमिति में कौन शामिल हैं?
विद्रोही गुट ने अरूप रॉय को अध्यक्ष, अरूप विश्वास, फिरहाद हकीम और रथीन घोष को उपाध्यक्ष बनाया है। ऋतब्रत बनर्जी, जावेद खान, संदीपन साहा और सबीना यास्मीन महासचिव हैं, जबकि अखरुज्जमान कोषाध्यक्ष हैं।
चुनाव आयोग इस विवाद में क्या भूमिका निभाएगा?
चुनाव आयोग यह तय करेगा कि दोनों में से कौन-सी कार्यसमिति वैध है और पार्टी के चुनाव चिह्न तथा संगठनात्मक ढाँचे पर किसका अधिकार होगा। शिवसेना और NCP विभाजन के मामलों में ECI पहले भी ऐसे निर्णायक फैसले दे चुका है।
ऋतब्रत बनर्जी ने ममता गुट के कदम पर क्या कहा?
ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि वे इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते और दूसरे गुट को शुभकामनाएँ देते हैं। उनकी यह संयमित प्रतिक्रिया संकेत देती है कि विद्रोही गुट अब संस्थागत मंचों पर अपनी वैधता साबित करने की रणनीति पर चल रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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