16 जुलाई 2026
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ममता बनर्जी का अभिषेक को खुला समर्थन, बागियों पर हमला — 'अगले 50 साल तक लड़ेंगे'

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ममता बनर्जी का अभिषेक को खुला समर्थन, बागियों पर हमला — 'अगले 50 साल तक लड़ेंगे'

सारांश

तृणमूल कांग्रेस तीन गुटों में बँट चुकी है, बागी गुट विधायक दल का बहुमत और राष्ट्रीय कार्य समिति की कमान संभाल चुका है। ममता बनर्जी ने फेसबुक लाइव पर पलटवार किया — 1998 की याद दिलाई, अभिषेक का बचाव किया और कहा कि शून्य से फिर शुरुआत करेंगी।

मुख्य बातें

ममता बनर्जी ने 15 जुलाई को फेसबुक लाइव के ज़रिए पार्टी संकट पर पहली बार सीधे संबोधन किया।
तृणमूल कांग्रेस तीन गुटों में बँटी; बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी के पास विधायक दल का बहुमत।
बागी गुट ने अरूप रॉय को ममता की जगह पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया।
कई TMC सांसद काकोली घोष दस्तीदार और शताब्दी रॉय के नेतृत्व में NCPI में शामिल हुए।
ममता ने कहा — उनके पास अभी 28 सांसद हैं और वह 2026 में फिर से लड़ेंगी।
अभिषेक बनर्जी को 'बहाना' बताने वाले आरोपों को ममता ने सिरे से खारिज किया।

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार, 15 जुलाई को फेसबुक लाइव के माध्यम से दिए गए वीडियो संदेश में स्पष्ट किया कि वह राज्य और देश में अपनी राजनीतिक ज़मीन फिर से हासिल करने के लिए बिल्कुल शून्य से शुरुआत करने को तैयार हैं। उन्होंने अपने भतीजे और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव अभिषेक बनर्जी का खुलकर बचाव किया और पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर लालच और डर का आरोप लगाया।

तृणमूल में तीन गुटों की लड़ाई

यह बयान ऐसे समय में आया है जब ममता बनर्जी की स्थापित तृणमूल कांग्रेस तीन अलग-अलग गुटों में बँटती नज़र आ रही है। ममता और अभिषेक बनर्जी का गुट पार्टी में अल्पसंख्यक स्थिति में आ गया है। दूसरी ओर, पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल विधायक दल का बहुमत अपने पास कर लिया है।

इस बागी गुट ने पार्टी की नई राष्ट्रीय कार्य समिति में भी बहुमत हासिल कर लिया है और वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को ममता बनर्जी की जगह राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है — जो ममता के लिए एक बड़ा संगठनात्मक झटका है।

सांसदों का नई पार्टी में जाना

पार्टी के भीतर संकट और गहरा तब हुआ जब तृणमूल कांग्रेस के कई सांसदों ने दिग्गज नेताओं काकोली घोष दस्तीदार और शताब्दी रॉय के नेतृत्व में त्रिपुरा स्थित नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) की सदस्यता ग्रहण कर ली। इस कदम को राजनीतिक विश्लेषक ममता बनर्जी के लिए अब तक का सबसे बड़ा सियासी झटका मान रहे हैं।

ममता का 1998 वाला संकल्प दोहराया

ममता बनर्जी ने अपने संदेश में कहा कि जब उन्होंने 1998 में कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी, तब वह अकेली थीं। उन्होंने कहा कि आज उनके पास 28 सांसद और कई विधायकों का साथ है, और यदि वह तब शून्य से शुरुआत कर सकती थीं, तो 2026 में भी निश्चित रूप से कर सकती हैं। उन्होंने हाल के विधानसभा चुनावों में पार्टी को वोट देने वाले मतदाताओं से पार्टी के भीतर मौजूद 'गद्दारों' की ओर से माफी भी माँगी।

अभिषेक का बचाव, बागियों पर प्रहार

ममता बनर्जी ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं के उन आरोपों को सिरे से खारिज किया जिनमें कहा गया था कि वह अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को अनुचित तरजीह देती हैं। उन्होंने कहा, 'वे अभिषेक को बहाना बना रहे हैं। अभिषेक तमाम मुश्किलों के बावजूद लड़ रहे हैं और अगले 50 सालों तक लड़ते रहेंगे।' उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी छोड़ने वाले या तो लालच में ऐसा कर रहे हैं या फिर डर की वजह से।

आगे क्या होगा

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस का यह आंतरिक विभाजन 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की चुनावी संभावनाओं को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। अब यह देखना अहम होगा कि ममता बनर्जी नए सिरे से संगठन खड़ा करने में कितनी कामयाब होती हैं और चुनाव चिह्न पर कानूनी लड़ाई किस दिशा में जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन तब वह एक मज़बूत राष्ट्रीय पार्टी से निकली थीं — आज वह अपनी ही बनाई संरचना के भीतर अल्पमत में हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि चुनाव चिह्न और संगठनात्मक वैधता की कानूनी लड़ाई कौन जीतता है — क्योंकि 2026 के विधानसभा चुनाव में मतदाता 'असली तृणमूल' को किस चिह्न से पहचानेंगे, यही निर्णायक होगा।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तृणमूल कांग्रेस में इस वक्त कितने गुट हैं और उनकी स्थिति क्या है?
तृणमूल कांग्रेस इस समय तीन गुटों में बँटी हुई है। ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी का गुट पार्टी में अल्पसंख्यक है, जबकि ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के पास विधायक दल का बहुमत और राष्ट्रीय कार्य समिति का नियंत्रण है। कई सांसद अलग होकर NCPI में शामिल हो गए हैं।
ममता बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी का बचाव क्यों किया?
बागी नेताओं ने आरोप लगाया था कि ममता ने अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को अनुचित तरजीह दी, जिससे पार्टी में असंतोष बढ़ा। ममता ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अभिषेक को 'बहाना' बनाया जा रहा है और वह मुश्किलों के बावजूद अगले 50 साल तक लड़ते रहेंगे।
अरूप रॉय कौन हैं और उन्हें TMC अध्यक्ष कैसे बनाया गया?
अरूप रॉय तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक हैं। बागी गुट द्वारा गठित नई राष्ट्रीय कार्य समिति ने ममता बनर्जी को हटाकर उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है, हालाँकि इस नियुक्ति की वैधता कानूनी रूप से विवादित हो सकती है।
NCPI क्या है और TMC सांसद उसमें क्यों गए?
नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) त्रिपुरा स्थित एक राजनीतिक दल है। काकोली घोष दस्तीदार और शताब्दी रॉय के नेतृत्व में कई TMC सांसदों ने इस पार्टी की सदस्यता ग्रहण की, जिसे ममता बनर्जी के लिए बड़ा सियासी झटका माना जा रहा है।
2026 के बंगाल चुनाव पर इस विभाजन का क्या असर पड़ेगा?
2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले यह विभाजन पार्टी की चुनावी ताकत को कमज़ोर कर सकता है। चुनाव चिह्न और संगठनात्मक वैधता की लड़ाई निर्णायक होगी — क्योंकि मतदाता किस गुट को 'असली तृणमूल' मानेंगे, यही 2026 का सबसे बड़ा सवाल है।
राष्ट्र प्रेस
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