ममता बनर्जी का अभिषेक को खुला समर्थन, बागियों पर हमला — 'अगले 50 साल तक लड़ेंगे'
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार, 15 जुलाई को फेसबुक लाइव के माध्यम से दिए गए वीडियो संदेश में स्पष्ट किया कि वह राज्य और देश में अपनी राजनीतिक ज़मीन फिर से हासिल करने के लिए बिल्कुल शून्य से शुरुआत करने को तैयार हैं। उन्होंने अपने भतीजे और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव अभिषेक बनर्जी का खुलकर बचाव किया और पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर लालच और डर का आरोप लगाया।
तृणमूल में तीन गुटों की लड़ाई
यह बयान ऐसे समय में आया है जब ममता बनर्जी की स्थापित तृणमूल कांग्रेस तीन अलग-अलग गुटों में बँटती नज़र आ रही है। ममता और अभिषेक बनर्जी का गुट पार्टी में अल्पसंख्यक स्थिति में आ गया है। दूसरी ओर, पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल विधायक दल का बहुमत अपने पास कर लिया है।
इस बागी गुट ने पार्टी की नई राष्ट्रीय कार्य समिति में भी बहुमत हासिल कर लिया है और वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को ममता बनर्जी की जगह राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है — जो ममता के लिए एक बड़ा संगठनात्मक झटका है।
सांसदों का नई पार्टी में जाना
पार्टी के भीतर संकट और गहरा तब हुआ जब तृणमूल कांग्रेस के कई सांसदों ने दिग्गज नेताओं काकोली घोष दस्तीदार और शताब्दी रॉय के नेतृत्व में त्रिपुरा स्थित नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) की सदस्यता ग्रहण कर ली। इस कदम को राजनीतिक विश्लेषक ममता बनर्जी के लिए अब तक का सबसे बड़ा सियासी झटका मान रहे हैं।
ममता का 1998 वाला संकल्प दोहराया
ममता बनर्जी ने अपने संदेश में कहा कि जब उन्होंने 1998 में कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी, तब वह अकेली थीं। उन्होंने कहा कि आज उनके पास 28 सांसद और कई विधायकों का साथ है, और यदि वह तब शून्य से शुरुआत कर सकती थीं, तो 2026 में भी निश्चित रूप से कर सकती हैं। उन्होंने हाल के विधानसभा चुनावों में पार्टी को वोट देने वाले मतदाताओं से पार्टी के भीतर मौजूद 'गद्दारों' की ओर से माफी भी माँगी।
अभिषेक का बचाव, बागियों पर प्रहार
ममता बनर्जी ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं के उन आरोपों को सिरे से खारिज किया जिनमें कहा गया था कि वह अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को अनुचित तरजीह देती हैं। उन्होंने कहा, 'वे अभिषेक को बहाना बना रहे हैं। अभिषेक तमाम मुश्किलों के बावजूद लड़ रहे हैं और अगले 50 सालों तक लड़ते रहेंगे।' उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी छोड़ने वाले या तो लालच में ऐसा कर रहे हैं या फिर डर की वजह से।
आगे क्या होगा
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस का यह आंतरिक विभाजन 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की चुनावी संभावनाओं को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। अब यह देखना अहम होगा कि ममता बनर्जी नए सिरे से संगठन खड़ा करने में कितनी कामयाब होती हैं और चुनाव चिह्न पर कानूनी लड़ाई किस दिशा में जाती है।