10 अगस्त 2026
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टीएमसी बागी गुट का ECI में दस्तक देने का ऐलान, ममता-अभिषेक को छोड़कर बनाई नई राष्ट्रीय कार्यकारी समिति

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टीएमसी बागी गुट का ECI में दस्तक देने का ऐलान, ममता-अभिषेक को छोड़कर बनाई नई राष्ट्रीय कार्यकारी समिति

सारांश

TMC में दो गुट, दो समानांतर राष्ट्रीय कार्यकारी समितियाँ — और अब निर्वाचन आयोग के दरवाज़े पर दस्तक। बागी खेमे ने ममता व अभिषेक बनर्जी को बाहर रखकर नई NWC बनाई; मूल गुट पहले ही आयोग को पत्र भेज चुका है। बजट सत्र के बाद असली कानूनी जंग शुरू होगी।

मुख्य बातें

TMC के बागी गुट ने पश्चिम बंगाल विधानसभा का बजट सत्र समाप्त होते ही भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) से संपर्क करने की घोषणा की।
बागी खेमे ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को शामिल किए बिना नई राष्ट्रीय कार्यकारी समिति (NWC) का गठन किया।
नई समिति में अरूप रॉय को अध्यक्ष, अरूप विश्वास , फिरहाद हाकिम और रथिन घोष को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया।
ममता-अभिषेक के प्रति निष्ठावान मूल गुट पहले ही अपनी समिति का विवरण निर्वाचन आयोग को भेज चुका है।
बागी गुट का दावा है कि बैठक के प्रस्ताव पर उपस्थित सभी नेताओं के वास्तविक हस्ताक्षर हैं और यह एक वैध कानूनी दस्तावेज है।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर उभरे बागी गुट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा के बजट सत्र के समाप्त होते ही भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) का दरवाज़ा खटखटाने की घोषणा की है। यह गुट अपनी ओर से गठित नई राष्ट्रीय कार्यकारी समिति (NWC) की वैधता को आयोग के समक्ष स्थापित करना चाहता है — जिसमें पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी और महासचिव अभिषेक बनर्जी को कोई स्थान नहीं दिया गया है।

विवाद की जड़ — दो समानांतर समितियाँ

TMC से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बागी खेमे ने सोमवार शाम नई राष्ट्रीय कार्यकारी समिति के गठन की घोषणा की। इस खेमे का दावा है कि उक्त बैठक में बहुमत का समर्थन प्राप्त था और प्रस्ताव पर उपस्थित सभी नेताओं के वास्तविक हस्ताक्षर मौजूद हैं।

इसके तुरंत बाद ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के प्रति निष्ठावान 'मूल लेकिन अल्पमत' गुट ने निर्वाचन आयोग को एक पत्र भेजकर अपनी समिति का विवरण सौंपा। इस समिति में ममता बनर्जी राष्ट्रीय अध्यक्ष और अभिषेक बनर्जी महासचिव के रूप में बने हुए हैं।

नई समिति की संरचना

बागी गुट द्वारा घोषित नई राष्ट्रीय कार्यकारी समिति में वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री अरूप रॉय को ममता बनर्जी की जगह अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया है। पूर्व मंत्री अरूप विश्वास को उपाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि विधायक फिरहाद हाकिम और रथिन घोष भी उपाध्यक्ष के रूप में शामिल हैं।

महासचिव पद पर ऋतब्रत बनर्जी, जावेद खान, संदीपन साहा और सबीना यास्मीन को नियुक्त किया गया है। अखरुज्जमान को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

बागी गुट का कानूनी तर्क

बागी खेमे के एक विधायक ने कहा, 'बैठक में पारित प्रस्ताव एक वैध कानूनी दस्तावेज है। इसी के आधार पर हम नई राष्ट्रीय कार्यकारी समिति की वैधता का दावा निर्वाचन आयोग के समक्ष पेश करेंगे।' उनका कहना है कि बजट सत्र की समाप्ति के बाद वे आयोग के पास पहुँचेंगे।

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर असंतोष पहले से सतह पर था। गौरतलब है कि ऋतब्रत बनर्जी को पार्टी से निष्कासित किए जाने के बावजूद उनके गुट ने पार्टी संगठन पर दावा ठोकने की रणनीति अपनाई है।

निर्वाचन आयोग की भूमिका और आगे की राह

भारतीय निर्वाचन आयोग को अब दो प्रतिस्पर्धी दावों के बीच निर्णय लेना होगा — एक ओर ममता बनर्जी की अगुवाई वाला मूल गुट है, और दूसरी ओर बहुमत का दावा करने वाला बागी खेमा। इस तरह के दल-विभाजन के मामलों में आयोग पार्टी के संविधान, सदस्यता के आँकड़ों और विधायी ताकत को आधार बनाकर फैसला करता है।

TMC में यह अंदरूनी टकराव आने वाले दिनों में और गहरा हो सकता है, क्योंकि दोनों गुट अपनी-अपनी वैधता साबित करने के लिए कानूनी और संगठनात्मक मोर्चों पर सक्रिय हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ ममता गुट अभी भी मजबूत दिखता है। असली सवाल यह है कि क्या 'बहुमत' का दावा करने वाला बागी खेमा विधानसभा के भीतर और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता में अपना संख्याबल साबित कर पाएगा — क्योंकि ECI के फैसले में यही निर्णायक होगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

TMC बागी गुट निर्वाचन आयोग के पास क्यों जा रहा है?
TMC का बागी गुट अपनी ओर से गठित नई राष्ट्रीय कार्यकारी समिति (NWC) की वैधता को ECI के समक्ष स्थापित करना चाहता है। इस समिति में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को शामिल नहीं किया गया है, और गुट का दावा है कि बहुमत का समर्थन उनके पास है।
TMC की नई राष्ट्रीय कार्यकारी समिति में कौन-कौन शामिल हैं?
बागी गुट द्वारा गठित नई NWC में अरूप रॉय अध्यक्ष, अरूप विश्वास, फिरहाद हाकिम और रथिन घोष उपाध्यक्ष हैं। ऋतब्रत बनर्जी, जावेद खान, संदीपन साहा और सबीना यास्मीन महासचिव तथा अखरुज्जमान कोषाध्यक्ष हैं।
ममता बनर्जी के गुट ने इस पर क्या कदम उठाया है?
ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के प्रति निष्ठावान मूल गुट ने पहले ही निर्वाचन आयोग को पत्र भेजकर अपनी समिति का विवरण सौंप दिया है, जिसमें ममता राष्ट्रीय अध्यक्ष और अभिषेक महासचिव हैं।
निर्वाचन आयोग दल-विभाजन के ऐसे मामलों में कैसे फैसला करता है?
ECI आमतौर पर पार्टी के संविधान, विधायी संख्याबल और प्राथमिक सदस्यता के आँकड़ों के आधार पर वैधता तय करता है। दोनों गुटों को अपना-अपना दावा दस्तावेजों के साथ साबित करना होगा।
ऋतब्रत बनर्जी कौन हैं और TMC से उनका विवाद क्यों है?
ऋतब्रत बनर्जी TMC से निष्कासित विधायक हैं जो बागी गुट का नेतृत्व कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में इस गुट ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को बाहर रखकर एक समानांतर पार्टी संगठन खड़ा करने की कोशिश की है।
राष्ट्र प्रेस
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