टीएमसी बागी गुट का ECI में दस्तक देने का ऐलान, ममता-अभिषेक को छोड़कर बनाई नई राष्ट्रीय कार्यकारी समिति
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर उभरे बागी गुट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा के बजट सत्र के समाप्त होते ही भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) का दरवाज़ा खटखटाने की घोषणा की है। यह गुट अपनी ओर से गठित नई राष्ट्रीय कार्यकारी समिति (NWC) की वैधता को आयोग के समक्ष स्थापित करना चाहता है — जिसमें पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी और महासचिव अभिषेक बनर्जी को कोई स्थान नहीं दिया गया है।
विवाद की जड़ — दो समानांतर समितियाँ
TMC से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बागी खेमे ने सोमवार शाम नई राष्ट्रीय कार्यकारी समिति के गठन की घोषणा की। इस खेमे का दावा है कि उक्त बैठक में बहुमत का समर्थन प्राप्त था और प्रस्ताव पर उपस्थित सभी नेताओं के वास्तविक हस्ताक्षर मौजूद हैं।
इसके तुरंत बाद ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के प्रति निष्ठावान 'मूल लेकिन अल्पमत' गुट ने निर्वाचन आयोग को एक पत्र भेजकर अपनी समिति का विवरण सौंपा। इस समिति में ममता बनर्जी राष्ट्रीय अध्यक्ष और अभिषेक बनर्जी महासचिव के रूप में बने हुए हैं।
नई समिति की संरचना
बागी गुट द्वारा घोषित नई राष्ट्रीय कार्यकारी समिति में वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री अरूप रॉय को ममता बनर्जी की जगह अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया है। पूर्व मंत्री अरूप विश्वास को उपाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि विधायक फिरहाद हाकिम और रथिन घोष भी उपाध्यक्ष के रूप में शामिल हैं।
महासचिव पद पर ऋतब्रत बनर्जी, जावेद खान, संदीपन साहा और सबीना यास्मीन को नियुक्त किया गया है। अखरुज्जमान को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
बागी गुट का कानूनी तर्क
बागी खेमे के एक विधायक ने कहा, 'बैठक में पारित प्रस्ताव एक वैध कानूनी दस्तावेज है। इसी के आधार पर हम नई राष्ट्रीय कार्यकारी समिति की वैधता का दावा निर्वाचन आयोग के समक्ष पेश करेंगे।' उनका कहना है कि बजट सत्र की समाप्ति के बाद वे आयोग के पास पहुँचेंगे।
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर असंतोष पहले से सतह पर था। गौरतलब है कि ऋतब्रत बनर्जी को पार्टी से निष्कासित किए जाने के बावजूद उनके गुट ने पार्टी संगठन पर दावा ठोकने की रणनीति अपनाई है।
निर्वाचन आयोग की भूमिका और आगे की राह
भारतीय निर्वाचन आयोग को अब दो प्रतिस्पर्धी दावों के बीच निर्णय लेना होगा — एक ओर ममता बनर्जी की अगुवाई वाला मूल गुट है, और दूसरी ओर बहुमत का दावा करने वाला बागी खेमा। इस तरह के दल-विभाजन के मामलों में आयोग पार्टी के संविधान, सदस्यता के आँकड़ों और विधायी ताकत को आधार बनाकर फैसला करता है।
TMC में यह अंदरूनी टकराव आने वाले दिनों में और गहरा हो सकता है, क्योंकि दोनों गुट अपनी-अपनी वैधता साबित करने के लिए कानूनी और संगठनात्मक मोर्चों पर सक्रिय हैं।