मेक इन इंडिया के 12 साल: राजनाथ सिंह बोले — रक्षा उत्पादन में भारत अब वैश्विक प्रतिस्पर्धा में
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 25 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि 'मेक इन इंडिया' के 12 वर्ष भारत की आर्थिक और औद्योगिक यात्रा में एक परिवर्तनकारी दौर रहे हैं, और आज भारतीय कंपनियाँ वैश्विक बाज़ार में प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि यह अभियान अब एक सुदृढ़ औद्योगिक तंत्र का रूप ले चुका है, जो घरेलू उत्पादन, विदेशी निवेश, नवाचार और रोज़गार — सभी मोर्चों पर एक साथ काम कर रहा है।
मेक इन इंडिया की त्रिसूत्री नीति
राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की विनिर्माण नीति 'मेक इन इंडिया, मेक फॉर इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड' के सिद्धांत पर आगे बढ़ रही है। उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि इस नीति का सबसे स्पष्ट और प्रभावशाली असर रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में देखने को मिल रहा है।
रक्षा मंत्री के अनुसार, भारत की रक्षा व्यवस्था न केवल वर्तमान ज़रूरतों को पूरा करने के लिए तैयार है, बल्कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए भी लगातार मज़बूत की जा रही है। उन्होंने कहा, 'आत्मनिर्भर भारत की ताकत आसमान, समुद्र और जमीन — तीनों पर दिखाई देती है।'
आसमान, समुद्र और जमीन पर स्वदेशी शक्ति
राजनाथ सिंह ने गुरुवार रात एक कार्यक्रम में कहा था कि आसमान में भारतीय पायलट तेजस लड़ाकू विमान और प्रचंड हेलिकॉप्टर के साथ देश की क्षमता का प्रदर्शन कर रहे हैं। समुद्र में भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत समुद्री सुरक्षा को नई ऊँचाई दे रहा है।
जमीन पर भारतीय सेना अर्जुन टैंक और स्वदेश निर्मित लंबी दूरी की तोप धनुष के साथ सीमाओं की सुरक्षा कर रही है। रक्षा मंत्री ने आकाश मिसाइल प्रणाली और ब्रह्मोस जैसे स्वदेशी प्लेटफॉर्मों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये भारत की बढ़ती तकनीकी परिपक्वता के प्रमाण हैं। उन्होंने भारत में निर्मित एशिया की सबसे बड़ी हेलिकॉप्टर फैक्ट्री का भी उल्लेख किया।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत पाँचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान और छठी पीढ़ी के लड़ाकू जेट बनाने की दिशा में अग्रसर है।
रक्षा औद्योगिक गलियारे और स्टार्टअप की भागीदारी
राजनाथ सिंह के अनुसार, देश के विभिन्न हिस्सों में रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए रक्षा औद्योगिक गलियारे विकसित किए गए हैं। सरकार ने केवल बड़े रक्षा निर्माताओं पर निर्भर न रहते हुए स्टार्टअप और MSME को भी रक्षा नवाचार से जोड़ा है — जो इस पारिस्थितिकी तंत्र को पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक और समावेशी बनाता है।
सृजन मंच: 41,000 विक्रेता, 2.7 लाख उत्पाद
घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मज़बूत करने की दिशा में सरकार ने सृजन रक्षा उपकरण सशक्तिकरण मंच के ज़रिए रक्षा निर्माताओं, MSME और विक्रेताओं को एकजुट किया है। राजनाथ सिंह के अनुसार, इस मंच पर अब तक 41,000 से अधिक विक्रेता और 2.7 लाख से अधिक उत्पाद सूचीबद्ध किए जा चुके हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक रक्षा बाज़ार में भारत निर्यातक देशों की सूची में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। गौरतलब है कि भारत एक दशक पहले तक दुनिया के सबसे बड़े रक्षा आयातकों में शुमार था। इस बदलाव की दिशा और रफ्तार — दोनों महत्वपूर्ण हैं। अब देखना यह होगा कि निर्यात के आँकड़े और घरेलू प्रतिस्थापन के लक्ष्य किस हद तक ज़मीनी हकीकत में तब्दील होते हैं।