राजनाथ-कोइजुमी वार्ता 20 अगस्त को: भारत-जापान रक्षा सहयोग और 'मेक इन इंडिया' पर होगी अहम चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 20 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, जिसमें समुद्री सुरक्षा, रक्षा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और 'मेक इन इंडिया' के तहत रक्षा औद्योगिक सहयोग पर विशेष ध्यान रहने की संभावना है। कोइजुमी की यह पहली भारत यात्रा है, जो 19 अगस्त को मुंबई में पश्चिमी नौसेना कमान के दौरे से शुरू हुई।
पश्चिमी नौसेना कमान का दौरा
19 अगस्त को मुंबई पहुँचने पर जापानी रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने पश्चिमी नौसेना कमान का दौरा किया। वहाँ उन्होंने नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन और पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय वत्सायन के साथ विस्तृत बातचीत की। कोइजुमी ने गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया और नौसेना डॉकयार्ड स्थित गौरव स्तंभ पर पुष्पांजलि अर्पित की।
जापानी प्रतिनिधिमंडल को भारतीय नौसेना की भूमिकाओं, जिम्मेदारियों और परिचालन क्षमताओं से विस्तार से अवगत कराया गया। इस दौरान कोइजुमी ने भारतीय नौसेना के स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस चेन्नई का भी दौरा किया — एक कदम जिसे भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता को रेखांकित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
20 अगस्त की वार्ता में क्या होगा
राजनाथ सिंह और शिंजिरो कोइजुमी के बीच होने वाली बैठक में भारत-जापान रक्षा संबंधों को और मज़बूत करने, रणनीतिक विश्वास बढ़ाने तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा को बढ़ावा देने के उपायों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है। विशेष रूप से समुद्री सुरक्षा सहयोग, स्वदेशी रक्षा उत्पादन, रक्षा उद्योगों के बीच साझेदारी और रक्षा उपकरण एवं प्रौद्योगिकी में सहयोग जैसे मुद्दे एजेंडे में रहने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि जापान ने हाल ही में रक्षा उपकरणों और प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण से जुड़े अपने तीन प्रमुख सिद्धांतों में संशोधन किया है। इस बदलाव के बाद भारत के लिए जापानी रक्षा प्रौद्योगिकी और उपकरणों के क्षेत्र में सहयोग के नए रास्ते खुलने की संभावना बन गई है, और इन नए अवसरों पर भी वार्ता में चर्चा होने की उम्मीद है।
शिखर बैठक के बाद अगला कदम
यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने कुछ सप्ताह पहले नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वार्षिक शिखर बैठक में हिस्सा लिया था। उस बैठक में दोनों देशों ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई थी। कोइजुमी की मौजूदा यात्रा को उसी सहमति को ठोस रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
हिंद-प्रशांत में साझा दृष्टि
भारत और जापान हिंद-प्रशांत क्षेत्र को स्वतंत्र, खुला, लचीला और समृद्ध बनाने की साझा दृष्टि रखते हैं। दोनों देश समुद्री सुरक्षा, सैन्य प्रशिक्षण और रक्षा प्रौद्योगिकी सहित कई क्षेत्रों में अपने संबंधों को लगातार मज़बूत कर रहे हैं। यह दो दिवसीय यात्रा दोनों देशों के बीच बढ़ती रक्षा साझेदारी की गति को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। आने वाले हफ्तों में दोनों पक्षों द्वारा नए सहयोग क्षेत्रों की पहचान और आगे की कार्ययोजना तय किए जाने की संभावना है।