भारत-जापान रक्षा सहयोग: रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने टोक्यो में कोइजुमी से की अहम बैठक
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 13 जुलाई 2026 को टोक्यो में जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी के साथ उच्चस्तरीय बैठक की, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य और रक्षा उद्योग में द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा करने पर विस्तृत चर्चा हुई। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब प्रधानमंत्री साने ताकाइची के हाल के भारत दौरे के बाद दोनों देशों के संबंध नई ऊँचाई पर हैं।
बैठक का संदर्भ और महत्त्व
रक्षा मंत्री कोइजुमी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह का जापान का पहला दौरा। प्रधानमंत्री ताकाइची के हाल के भारत दौरे के बाद, हम क्षेत्रीय हालात, रक्षा उद्योग में सहयोग और भी बहुत कुछ पर बेहतर विचार कर रहे हैं।' यह दौरा भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को ज़मीनी स्तर पर मज़बूत करने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।
श्रद्धांजलि और प्रतीकात्मक संदेश
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने टोक्यो में सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज मेमोरियल स्टोन पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन बहादुर पुरुषों और महिलाओं को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने जापान की सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया। रक्षा मंत्रालय ने इस अवसर पर कहा कि यह श्रद्धांजलि भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को दर्शाती है, जो साझा मूल्यों, आपसी सम्मान और शांति एवं स्थिरता के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर आधारित है।
16वें वार्षिक शिखर सम्मेलन की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में आयोजित 16वें वार्षिक भारत-जापान शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री ताकाइची ने व्यापार, निवेश, आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा, नई प्रौद्योगिकी, रक्षा और जन-संपर्क सहित द्विपक्षीय संबंधों के हर पहलू पर गहन विचार-विमर्श किया था। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय एवं वैश्विक विकास पर भी चर्चा की।
ऐतिहासिक दस्तावेज़ और एमओयू
शिखर सम्मेलन के बाद दोनों नेताओं की उपस्थिति में आर्थिक सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी और अनुसंधान एवं विकास से जुड़े महत्त्वपूर्ण एमओयू का आदान-प्रदान किया गया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया, 'बातचीत से हमारे द्विपक्षीय संबंधों की प्राथमिकताओं को लेकर ठोस प्रगति हुई।' दोनों पक्षों ने तीन महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ अपनाए: आर्थिक सुरक्षा पर संयुक्त घोषणापत्र, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहयोग पर संयुक्त बयान और ऊर्जा लचीलापन पर संयुक्त बयान।
आगे की राह
रक्षा सचिव का यह दौरा भारत और जापान के बीच रक्षा-औद्योगिक साझेदारी को एक नई संस्थागत नींव देने की कोशिश का हिस्सा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के मद्देनज़र यह साझेदारी आने वाले वर्षों में और व्यापक रूप लेने की संभावना है।