राजनाथ सिंह और कोइजुमी की द्विपक्षीय वार्ता: भारत-जापान रक्षा सहयोग को नई दिशा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी के बीच 20 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई, जिसमें हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए दोनों देशों के रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग को और व्यापक बनाने पर सहमति बनी। यह वार्ता ऐसे समय में हुई जब दोनों देश राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ की ओर बढ़ रहे हैं।
बैठक में क्या-क्या हुआ
दोनों रक्षा मंत्रियों ने समुद्री सुरक्षा साझेदारी को गहरा करने, रक्षा उपकरण एवं प्रौद्योगिकी में सहयोग बढ़ाने तथा 'मेक इन इंडिया' के अंतर्गत संयुक्त रक्षा उत्पादन और औद्योगिक साझेदारी के अवसरों पर विचार-विमर्श किया। बैठक में तकनीकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण को भी प्राथमिकता दी गई।
वार्ता से पूर्व शिंजिरो कोइजुमी ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर भारतीय शहीद सैनिकों को पुष्पांजलि अर्पित की — जो भारत के वीर सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान के प्रति जापान के सम्मान का प्रतीक रहा।
राजनाथ सिंह के प्रमुख वक्तव्य
बैठक की शुरुआत में राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत-जापान संबंध साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, परस्पर सम्मान और दीर्घकालिक सभ्यतागत संबंधों की नींव पर टिके हैं। उन्होंने कहा कि एशिया के दो प्रमुख लोकतंत्रों के रूप में दोनों देशों की जिम्मेदारी है कि वे क्षेत्र में नियम-आधारित व्यवस्था, नौवहन की स्वतंत्रता और निर्बाध वैध व्यापार की रक्षा करें।
उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंद महासागर और प्रशांत महासागर की सुरक्षा एक-दूसरे से अविभाज्य रूप से जुड़ी है, और दोनों देशों की समुद्री जीवनरेखाएं बढ़ती चुनौतियों का सामना कर रही हैं। नौवहन की स्वतंत्रता और हवाई क्षेत्र से निर्बाध आवाजाही को उन्होंने 'रणनीतिक अनिवार्यता' करार दिया।
दोनों देशों के दृष्टिकोणों का तालमेल
राजनाथ सिंह ने भारत के 'महासागर' दृष्टिकोण — जिसका अर्थ है क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र प्रगति — और जापान की 'मुक्त एवं खुले हिंद-प्रशांत' पहल के बीच तालमेल को वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि इन दोनों दृष्टिकोणों का समन्वय समूचे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा को मजबूत करने में सहायक होगा।
रक्षा सहयोग का विस्तृत इतिहास
गौरतलब है कि भारत और जापान पिछले कुछ वर्षों में अपने रक्षा सहयोग को सैन्य अभ्यासों और उच्चस्तरीय संवाद से आगे बढ़ाकर रक्षा उद्योग, प्रौद्योगिकी और समुद्री सुरक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों तक विस्तारित कर चुके हैं। वर्ष 2024 में दोनों देशों के बीच हुई तीसरी विदेश एवं रक्षा मंत्री स्तरीय 2+2 वार्ता में भी मुक्त एवं खुले हिंद-प्रशांत तथा द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति बनी थी।
आगे की राह
यह वार्ता दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को एक नई ऊँचाई देने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। अगले वर्ष राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर दोनों देशों के बीच और व्यापक सहयोग समझौतों की संभावना जताई जा रही है, विशेष रूप से रक्षा प्रौद्योगिकी और संयुक्त उत्पादन के क्षेत्र में।