भारत-जापान रक्षा सहयोग: नई दिल्ली में राजेश कुमार सिंह और तारो कोनो की अहम बैठक
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में जापान की सत्तारूढ़ पार्टी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) के अंतरराष्ट्रीय सहयोग महानिदेशक तारो कोनो से मुलाकात की। इस द्विपक्षीय बैठक में भारत-जापान रक्षा सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करने तथा रक्षा प्रौद्योगिकी साझेदारी को नई दिशा देने पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
बैठक के प्रमुख एजेंडा बिंदु
दोनों पक्षों ने रक्षा क्षेत्र में तकनीकी सहयोग को विस्तार देने और नए अवसर तलाशने पर अपने-अपने विचार साझा किए। बैठक में संयुक्त सैन्य अभ्यासों को और प्रभावी बनाने पर विशेष ज़ोर दिया गया। दोनों देशों की सेनाएँ विभिन्न क्षेत्रों में नियमित संयुक्त अभ्यास और पेशेवर आदान-प्रदान करती हैं, जिससे परस्पर समन्वय और परिचालन सहयोग को बल मिलता है।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग का मुद्दा भी बैठक में प्रमुखता से उठा। दोनों पक्षों ने इस भू-रणनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
संयुक्त कार्य समूह का गठन
गौरतलब है कि भारत और जापान पहले ही एक संयुक्त कार्य समूह स्थापित करने पर सहमति जता चुके हैं। इस समूह की अध्यक्षता दोनों देशों के महानिदेशक अर्थात संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी संयुक्त रूप से करेंगे। यह कार्य समूह ऑपरेशनल, खुफिया, रक्षा उपकरण, प्रौद्योगिकी और रक्षा उद्योग से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग को एक साथ आगे बढ़ाने में समन्वयक भूमिका निभाएगा।
इस व्यवस्था की घोषणा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने 20 अगस्त को नई दिल्ली में एक संयुक्त बयान के ज़रिये की थी। उस बयान में स्पष्ट कहा गया था कि यह समूह दोनों रक्षा मंत्रियों द्वारा तय सहयोग के क्षेत्रों में समग्र समन्वय सुनिश्चित करेगा, तालमेल बढ़ाएगा और परियोजनाओं को तेज़ी से लागू करने में मदद करेगा।
यूनिकॉर्न एंटीना परियोजना: रक्षा प्रौद्योगिकी में ऐतिहासिक कदम
दोनों देशों के बीच सहयोग का एक उल्लेखनीय पहलू समुद्री जहाज़ निर्माण क्षेत्र में साझेदारी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने समुद्री जहाज़ पर स्थापित किए जाने वाले यूनिकॉर्न एकीकृत संचार एंटीना तंत्र से संबंधित परियोजना को विशेष महत्व दिया था। यह दोनों देशों के बीच रक्षा उपकरण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की पहली संयुक्त परियोजना है, जिसे भारत-जापान रक्षा साझेदारी की गहराती नींव का प्रतीक बताया गया है।
इस परियोजना के ज़रिये भारत को जापान की उन्नत समुद्री संचार प्रौद्योगिकी का लाभ मिलने की उम्मीद है, जिससे भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता में वृद्धि होगी।
रणनीतिक संदर्भ और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब भारत-जापान रक्षा संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार व्यापक और गहरे होते जा रहे हैं। रक्षा प्रौद्योगिकी, संयुक्त अभ्यास और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी का अभिन्न अंग बन चुका है। 22 सितंबर की बैठक इसी दिशा में एक और कदम है।
विशेषज्ञों के अनुसार हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते सुरक्षा समीकरणों के मद्देनज़र भारत और जापान दोनों के लिए यह साझेदारी रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम है। आने वाले महीनों में संयुक्त कार्य समूह की बैठकें और नई परियोजनाओं की रूपरेखा तय होने की संभावना है।