विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने जापानी सांसद तारो कोनो से की मुलाकात, भारत-जापान साझेदारी को नई गति
सारांश
मुख्य बातें
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 22 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में जापान की सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) के एक उच्चस्तरीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल से भेंट की। इस बैठक में रक्षा, प्रौद्योगिकी, आर्थिक सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को विस्तार देने पर गहन विचार-विमर्श हुआ। विदेश मंत्रालय (MEA) ने अपने आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी।
प्रतिनिधिमंडल की संरचना और यात्रा का संदर्भ
जापानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व LDP के इंटरनेशनल ब्यूरो के महानिदेशक तारो कोनो ने किया, जो इससे पहले जापान के रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और डिजिटल मंत्री जैसे अहम पदों पर कार्य कर चुके हैं। उनके साथ LDP पॉलिसी रिसर्च काउंसिल के उपाध्यक्ष केंजी नाकानिशी, LDP इंटरनेशनल ब्यूरो की कार्यवाहक निदेशक और डिजिटल सोसाइटी संवर्धन समिति की उपाध्यक्ष कैरेन माकिशिमा तथा सांसद साकोन यामामोटो भी शामिल थे।
यह यात्रा भारत-जापान डिस्टिंग्विश्ड विजिटर्स प्रोग्राम के अंतर्गत 18 से 22 सितंबर 2026 तक आयोजित हुई। यह कार्यक्रम दोनों देशों के बीच संसदीय और नेतृत्व स्तर पर परस्पर समझ और जुड़ाव बढ़ाने के लिए संचालित किया जाता है।
बेंगलुरु में तकनीकी संस्थानों का दौरा
दिल्ली बैठक से पूर्व जापानी प्रतिनिधिमंडल ने बेंगलुरु में भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) का भ्रमण किया। इन दौरों का उद्देश्य भारत की तकनीकी, वैज्ञानिक, अंतरिक्ष और रक्षा क्षमताओं की प्रत्यक्ष समझ हासिल करना था।
प्रतिनिधिमंडल ने भारत के डीप-टेक उद्यमिता, अनुसंधान एवं नवाचार के तेज़ी से विकसित होते पारिस्थितिकी तंत्र की विशेष सराहना की। साथ ही भारत की विनिर्माण क्षमता में हो रही वृद्धि और उससे भारत तथा उसके साझेदार देशों के लिए उभर रहे आर्थिक अवसरों को भी रेखांकित किया।
बैठक में चर्चा के मुख्य बिंदु
विदेश सचिव मिस्री के साथ हुई बैठक में रक्षा, आर्थिक सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती, व्यापार और निवेश, प्रौद्योगिकी, नवाचार तथा लोगों के बीच संपर्क — इन सभी क्षेत्रों में सहयोग के विस्तार पर विचार हुआ। दोनों पक्षों ने वैश्विक आर्थिक जोखिमों को कम करने और आपूर्ति श्रृंखला को अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए भारत-जापान आर्थिक सुरक्षा सहयोग को और व्यापक तथा गहन करने की आवश्यकता पर बल दिया।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएँ भू-राजनीतिक तनावों और चीन पर अत्यधिक निर्भरता की चिंताओं के चलते पुनर्गठन के दौर से गुज़र रही हैं, और भारत तथा जापान दोनों वैकल्पिक विश्वसनीय भागीदार के रूप में अपनी भूमिका को मज़बूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
भारत-जापान स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का महत्व
बैठक में तेज़ी से बदलते वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक परिदृश्य के बीच भारत-जापान स्पेशल स्ट्रैटेजिक एंड ग्लोबल पार्टनरशिप के महत्व को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। दोनों पक्षों ने माना कि राजनीतिक विश्वास, आपसी सद्भावना और साझा रणनीतिक दृष्टिकोण पर टिकी यह साझेदारी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए एक अहम स्तंभ बन सकती है।
गौरतलब है कि दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच हुए 16वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में तय की गई दिशाओं को आधार बनाते हुए आगे बढ़ने की सहमति भी इस बैठक में दोहराई गई। हाल के वर्षों में रक्षा, एआई, स्टार्टअप और अंतरिक्ष जैसे उभरते क्षेत्रों में भारत-जापान सहयोग का दायरा उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है।
आगे की राह
यह संसदीय स्तर की यात्रा दोनों देशों के कार्यपालिका-स्तरीय संबंधों को विधायी और नीतिगत आधार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विश्लेषकों के अनुसार, जापानी सांसदों का ISRO और BEL जैसी रक्षा-तकनीक संस्थाओं का दौरा संकेत देता है कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच सह-उत्पादन और सह-विकास के नए अवसर तलाशे जा सकते हैं।