भारत-जापान साझेदारी को बल: जापानी सांसदों ने बेंगलुरु में इसरो, आईआईएससी और बीईएल का दौरा किया
सारांश
मुख्य बातें
जापान की लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के चार वरिष्ठ सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने भारत-जापान विजिट प्रोग्राम के तहत बेंगलुरु में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) का दौरा किया। 20 सितंबर 2026 को जापान स्थित भारतीय दूतावास ने इस कार्यक्रम की पुष्टि करते हुए बताया कि यह दौरा दोनों देशों के बीच चल रहे गहरे सहयोग और भविष्य की साझेदारी की संभावनाओं को रेखांकित करता है।
प्रतिनिधिमंडल में कौन शामिल थे
इस दौरे का नेतृत्व जापान के पूर्व विदेश मंत्री और पूर्व रक्षा मंत्री तारो कोनो ने किया। उनके साथ प्रतिनिधि करेन मकिशिमा, प्रतिनिधि केंजी नाकानिशी और प्रतिनिधि साको यामामोटो भी शामिल रहे। बीईएल ने अपनी आधिकारिक एक्स पोस्ट में बताया कि यह तीन सदस्यीय संसदीय दल 19 सितंबर 2026 को बीईएल बेंगलुरु कॉम्प्लेक्स पहुँचा, और यह दौरा भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा विशिष्ट अतिथि कार्यक्रम (DVP) के तहत समन्वित किया गया था।
दौरे का उद्देश्य और क्षेत्र
जापान स्थित भारतीय दूतावास ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि इस विजिट प्रोग्राम का उद्देश्य जापानी सांसदों को भारत में नवीनतम विकास की प्रत्यक्ष जानकारी देना, स्थानीय परिस्थितियों का अनुभव कराना और संबंधित हितधारकों के साथ सीधी बातचीत का अवसर प्रदान करना है। दूतावास के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, रक्षा और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में भारत-जापान सहयोग दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक वैश्विक साझेदारी का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
हालिया रक्षा सहयोग की पृष्ठभूमि
यह दौरा ऐसे समय में आया है जब पिछले महीने जापान के रक्षा मंत्री शिंजीरो कोइजुमी भारत की आधिकारिक यात्रा पर आए थे। उस दौरान उन्होंने अपने भारतीय समकक्ष, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की थी। बैठक के बाद कोइजुमी ने कहा था कि रक्षा मंत्री सिंह ने उनके कंधे पर हाथ रखकर खुशी जाहिर करते हुए कहा था, 'यह बहुत ही फलदायी बैठक थी।' कोइजुमी ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा था कि वह चर्चाओं को ठोस परिणामों में बदलने के लिए पूरा प्रयास करेंगे।
गौरतलब है कि उस बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों मंत्रियों ने वैश्विक तनाव के बीच क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा माहौल के आकलन को साझा करने के महत्व पर ज़ोर दिया था। दोनों मंत्री समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में परिचालन सहयोग को गहरा करने पर सहमत हुए थे और समुद्री सुरक्षा सहयोग पर व्यवस्था ज्ञापन पर हस्ताक्षर भी किए थे।
इंडो-पैसिफिक प्रतिबद्धता और जुलाई 2026 का संयुक्त बयान
जुलाई 2026 में जारी जापान-भारत संयुक्त बयान की पुष्टि करते हुए दोनों देशों ने स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र को साकार करने के लिए रक्षा सहयोग को और गहरा करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई थी। इस पृष्ठभूमि में बेंगलुरु का यह संसदीय दौरा केवल एक शिष्टाचार भेंट नहीं, बल्कि रणनीतिक सहयोग की आगामी रूपरेखा को समझने का प्रयास भी है।
आगे की राह
इसरो और बीईएल जैसे संस्थानों की यह प्रत्यक्ष विजिट संकेत देती है कि जापानी नीति-निर्माता भारत की अंतरिक्ष और रक्षा तकनीक क्षमताओं का प्रत्यक्ष मूल्यांकन करना चाहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के संसदीय जुड़ाव आगे चलकर द्विपक्षीय रक्षा और प्रौद्योगिकी समझौतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।