क्या भारत-जापान का रिश्ता 'मेड फॉर ईच अदर' है? : प्रधानमंत्री मोदी

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क्या भारत-जापान का रिश्ता 'मेड फॉर ईच अदर' है? : प्रधानमंत्री मोदी

सारांश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात में मारुति सुजुकी ई-विटारा का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने भारत और जापान के संबंधों को 'मेड फॉर ईच अदर' बताया। उन्होंने कौशल विकास और मानव संसाधन के क्षेत्र में सहयोग की भी बात की। जानिए इस संबंध में प्रधानमंत्री के विचार और भविष्य की योजनाओं के बारे में।

Key Takeaways

  • भारत और जापान के रिश्ते 'मेड फॉर ईच अदर' हैं।
  • मारुति सुजुकी ने भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का विकास किया है।
  • भारत और जापान के बीच स्किल और ह्यूमन रिसोर्स के क्षेत्र में सहयोग बढ़ रहा है।
  • प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य रखा गया है।
  • जापानी भाषा की शिक्षा को भारत में प्राथमिकता दी जा रही है।

अहमदाबाद, 26 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को गुजरात में मारुति सुजुकी ई-विटारा इलेक्ट्रिक एसयूवी और हाइब्रिड बैटरी यूनिट का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने भारत और जापान के दृढ़ संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच रिश्ते 'मेड फॉर ईच अदर' हैं। भारत-जापान के बीच 'पीपल टू पीपल' कनेक्ट में वृद्धि हुई है। हम स्किल और ह्यूमन रिसोर्स से जुड़ी एक-दूसरे की आवश्यकताओं को पूरा कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने आने वाले वर्षों में सभी प्रमुख क्षेत्रों में निरंतर प्रगति की आवश्यकता पर बल देते हुए विश्वास जताया कि आज के प्रयास 2047 तक एक विकसित भारत की नींव को मजबूत करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जापान इस लक्ष्य को प्राप्त करने में एक विश्वसनीय भागीदार बना रहेगा। प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि वे अगले हफ्ते जापान जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और जापान के बीच संबंध केवल कूटनीतिक नहीं हैं, बल्कि यह संस्कृति और आपसी विश्वास पर आधारित हैं। दोनों देश एक-दूसरे के विकास में अपनी प्रगति देखते हैं। मारुति सुजुकी के साथ शुरू हुआ सफर अब बुलेट ट्रेन की गति तक पहुंच गया है।

उन्होंने कहा कि भारत-जापान साझेदारी की औद्योगिक क्षमता को साकार करने की प्रमुख पहल गुजरात में प्रारंभ हुई थी। अतीत को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 20 वर्ष पहले जब वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन की शुरुआत हुई थी, तब जापान एक प्रमुख साझेदार था। उद्योग से जुड़े नियम और कानून जापानी भाषा में छपवाए गए, ताकि उन्हें समझना सरल हो।

उन्होंने गोल्फ के प्रति जापानियों के लगाव की सराहना की और बताया कि उनके हितों को ध्यान में रखते हुए 7-8 नए गोल्फ कोर्स विकसित किए गए हैं। पीएम मोदी ने आगे बताया कि भारत के कॉलेज और विश्वविद्यालय अब जापानी भाषा की शिक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत के निरंतर प्रयास भारत और जापान के लोगों के बीच आपसी संपर्क को मजबूत कर रहे हैं। दोनों देश अब कौशल विकास और मानव संसाधन के क्षेत्र में एक-दूसरे की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हैं।"

उन्होंने मारुति सुजुकी जैसी कंपनियों से ऐसी पहलों में सक्रिय रूप से भाग लेने और युवा आदान-प्रदान कार्यक्रमों को बढ़ावा देने का आग्रह किया।

ओसामु सुजुकी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत सरकार को उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित करने का गौरव प्राप्त हुआ था। उन्हें मारुति सुजुकी इंडिया के लिए ओसामु सुजुकी के विजन के व्यापक विस्तार को देखकर प्रसन्नता हो रही है।

उन्होंने बताया कि सुजुकी जापान में निर्माण कर रही है और यहाँ उत्पादित वाहनों का निर्यात जापान को किया जा रहा है। यह न केवल भारत-जापान संबंधों की मजबूती को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक कंपनियों के भारत में बढ़ते विश्वास को भी दर्शाता है। मारुति सुजुकी जैसी कंपनियाँ प्रभावी रूप से 'मेक इन इंडिया' की ब्रांड एंबेसडर बन गई हैं।

यह उल्लेख करते हुए कि मारुति सुजुकी लगातार 4 वर्षों से भारत की सबसे बड़ी कार निर्यातक रही है, प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि आज से इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्यात भी उसी पैमाने पर शुरू होगा। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के दर्जनों देशों में चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों पर गर्व से 'मेड इन इंडिया' का लेबल लगा होगा।

पीएम मोदी ने जोर देकर कहा, "भारत के पास डेमोक्रेसी की मजबूती और डेमोग्राफी का लाभ है। भारत में कुशल कार्यबल का एक विशाल भंडार भी है, जो प्रत्येक भागीदार के लिए जीत की स्थिति पैदा करता है।"

भारत की सफलता की कहानी के बीज 12-13 साल पहले बोए गए थे। यह याद करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 2012 में उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान हंसलपुर में मारुति सुजुकी को जमीन आवंटित की गई थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि उस समय भी, आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया का विजन था। उन्होंने कहा कि वे शुरुआती प्रयास अब देश के वर्तमान संकल्पों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि आत्मनिर्भर भारत के अभियान को सभी मिलकर आगे बढ़ाएं और वोकल फॉर लोकल बनें। उन्होंने कहा कि स्वदेशी चीजें ही जीवन मंत्र बननी चाहिए। गर्व से स्वदेशी चीजों की तरफ चल पड़ो।

उन्होंने कहा, "मेरी स्वदेशी की व्याख्या बहुत साधारण है। पैसा किसका लगता है, उससे मुझे कोई लेना-देना नहीं है। चाहे वह डॉलर हो, पाउंड हो या करेंसी काली हो या गोरी, इससे लेना-देना नहीं है, लेकिन जो प्रोडक्शन है, उसमें पसीना मेरे देशवासियों का होगा। जो प्रोडक्शन होगा, उसमें महक मेरे देश की मिट्टी की होगी। इस भाव के साथ मेरे साथ चलें और 2047 में ऐसा हिंदुस्तान बनाएं कि आने वाली पीढ़ियां आपके त्याग का गर्व करेंगी। आपके योगदान का गर्व करेंगी।"

प्रधानमंत्री ने सबसे आखिरी में कहा, "आत्मनिर्भर भारत के मंत्र और स्वदेशी के मार्ग के लिए आज देशवासियों को न्योता देता हूं कि आइए, सभी चल पड़ें और 2047 तक विकसित भारत बनाकर रहेंगे। दुनिया की भलाई में भारत का योगदान बढ़ाते रहेंगे।"

Point of View

भारत और जापान के बीच संबंधों की मजबूती केवल कूटनीतिक स्तर तक ही सीमित नहीं है। यह एक गहरी सांस्कृतिक और सामाजिक साझेदारी है, जो भविष्य में दोनों देशों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

भारत-जापान के रिश्ते कितने मजबूत हैं?
भारत और जापान के रिश्ते न केवल कूटनीतिक हैं, बल्कि ये सांस्कृतिक और आर्थिक सहयोग पर आधारित हैं।
मारुति सुजुकी का भारत में क्या योगदान है?
मारुति सुजुकी ने भारत में इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों का विकास किया है, जिससे देश की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है।
प्रधानमंत्री मोदी की जापान यात्रा कब है?
प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की है कि वे अगले हफ्ते जापान जाएंगे।
भारत में जापानी भाषा की शिक्षा का महत्व क्या है?
भारत के कॉलेज और विश्वविद्यालय अब जापानी भाषा की शिक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो भारत और जापान के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करेगा।
आत्मनिर्भर भारत का क्या मतलब है?
आत्मनिर्भर भारत का मतलब है कि भारत अपने संसाधनों का उपयोग करके आत्मनिर्भर बन सके और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सके।