टोक्यो सेमीनार में भारत-जापान वर्कफोर्स साझेदारी पर चर्चा, 10 वर्षों में 50,000 लोगों को जोड़ने का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
टोक्यो में आयोजित एक संयुक्त सेमीनार में जापानी नीति निर्माताओं, उद्योगपतियों और भारतीय अधिकारियों ने कुशल कार्यबल की गतिशीलता और मानव संसाधन विकास पर दोनों देशों के दीर्घकालिक सहयोग को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श किया। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने मंगलवार, 26 मई 2026 को यह जानकारी साझा की। यह सेमीनार भारत-जापान द्विपक्षीय संबंधों में कार्यबल सहयोग को नई दिशा देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सेमीनार का आयोजन और भागीदारी
मंत्रालय के बयान के अनुसार, इस कार्यक्रम का आयोजन जापान में भारतीय दूतावास और जापान स्थित आसियान वन कंपनी लिमिटेड द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। सेमीनार में जापान की प्रमुख कंपनियों, शैक्षणिक संस्थानों और कार्यबल गतिशीलता से जुड़े पक्षकारों के 250 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इन प्रतिनिधियों ने भारत के कौशल विकास पारिस्थितिकी तंत्र के साथ जुड़ाव की संभावनाओं का गहराई से अध्ययन किया।
प्रमुख प्रस्ताव और दूरदर्शी उपाय
दोनों पक्षों ने भारत में जापानी भाषा और परीक्षण केंद्रों के विस्तार तथा जापानी नियोक्ताओं एवं भारतीय कौशल विकास संस्थानों के बीच सहयोग को मज़बूत करने पर सहमति जताई। आसियान ग्रुप कंपनी लिमिटेड के अध्यक्ष एवं सीईओ तोशियाकी निशिकावा ने अगले 10 वर्षों में 50,000 लोगों को शामिल करते हुए जापान-भारत मानव संसाधन विनिमय कार्यक्रम को साकार करने के प्रति उत्साह व्यक्त किया। उन्होंने भविष्य के कार्यबल सहयोग को लेकर आशावाद भी जताया।
भारत सरकार का पक्ष
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की सचिव वंदना गुरनानी ने एक विश्वसनीय वैश्विक कार्यबल भागीदार के रूप में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने नैतिक और विस्तार योग्य अंतरराष्ट्रीय श्रम गतिशीलता मार्गों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। गुरनानी ने कहा कि भारत की जनसांख्यिकीय शक्ति, सुदृढ़ कौशल विकास प्रणाली और संस्थागत सुधार देश को जापान सहित वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के लिए कुशल मानव शक्ति का विश्वसनीय स्रोत बनाते हैं।
उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थानों, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI), शिक्षुता प्रणालियों, डिजिटल कौशल विकास प्लेटफार्मों और कैरियर सेवाओं पर आधारित भारत के व्यापक कार्यबल तैयारी पारिस्थितिकी तंत्र का विस्तृत ब्यौरा भी दिया।
किन क्षेत्रों में दिखती है संभावना
सेमीनार में प्रतिभागियों ने विनिर्माण, देखभाल सेवाएँ, निर्माण, ऑटोमोबाइल रखरखाव, आतिथ्य, कृषि, आईटी एवं डिजिटल सेवाएँ तथा उभरते हरित अर्थव्यवस्था क्षेत्रों में भारत-जापान सहयोग की प्रबल संभावनाओं पर चर्चा की। चर्चाओं में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और रोजगार सुविधा प्रणालियों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया, जो पारदर्शी और विस्तार योग्य कार्यबल गतिशीलता मार्ग बनाने में सहायक हो सकती हैं।
आगे की राह
यह सेमीनार ऐसे समय में आयोजित हुआ है जब जापान की बुजुर्ग होती आबादी और घटता कार्यबल उसे कुशल विदेशी श्रमिकों पर अधिक निर्भर बना रहा है। गौरतलब है कि भारत पहले से ही जापान को नर्सिंग, इंजीनियरिंग और आईटी क्षेत्रों में प्रशिक्षित जनशक्ति उपलब्ध कराता रहा है। इस सेमीनार के नतीजे दोनों देशों के बीच औपचारिक समझौतों की नींव रख सकते हैं।