भारत-वियतनाम रक्षा वार्ता: हिंद-प्रशांत सुरक्षा और समुद्री सहयोग पर नई दिल्ली में अहम बैठक
सारांश
मुख्य बातें
भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और वियतनाम के राष्ट्रीय रक्षा उपमंत्री वरिष्ठ लेफ्टिनेंट जनरल गुयेन त्रुओंग थांग के बीच 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई, जिसमें हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा की गई। दोनों देशों ने रक्षा और समुद्री संबंधों को और गहरा करने तथा व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।
बैठक की पृष्ठभूमि
यह बैठक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच हुई उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता की सीधी अनुवर्ती कड़ी है। उस शिखर-स्तरीय मुलाकात में तय की गई रणनीतिक दिशा को ज़मीनी स्तर पर आगे बढ़ाने के उद्देश्य से ही यह रक्षा-सचिव स्तरीय संवाद आयोजित किया गया। गौरतलब है कि भारत और वियतनाम के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी पहले से स्थापित है, और यह बैठक उसे संस्थागत रूप से और सुदृढ़ करने की कोशिश है।
मुख्य घटनाक्रम और सहमति के बिंदु
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने संयुक्त पहलों को तेजी से आगे बढ़ाने, तकनीक साझा करने और रक्षा उद्योग के क्षेत्र में सहयोग विस्तार पर विशेष बल दिया। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण चीन सागर में तनाव और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति-संतुलन को लेकर वैश्विक चिंताएँ बढ़ रही हैं।
बैठक में एक्सपर्ट वर्किंग ग्रुप जैसे सहयोगी मंचों की भूमिका को रेखांकित किया गया, जो क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने और सामूहिक सुरक्षा ढाँचे को मजबूत करने में सहायक हैं।
आसियान मंच पर समन्वय
दोनों देशों ने बहुपक्षीय मंचों पर आपसी समन्वय बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। विशेष रूप से आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus) व्यवस्था के तहत सक्रिय भागीदारी को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया। आसियान के नेतृत्व वाले तंत्र के माध्यम से व्यावहारिक रक्षा सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दोनों पक्षों ने दोहराई।
अगली वार्ता का कार्यक्रम
दोनों पक्षों ने अगली रक्षा नीति वार्ता भारत में आयोजित करने पर सहमति व्यक्त की। यह वार्ता एयरो इंडिया 2027 के दौरान बेंगलुरु में होगी। यह निर्णय दर्शाता है कि दोनों देश संस्थागत संवाद तंत्र को नियमित और व्यवस्थित रखने के प्रति प्रतिबद्ध हैं।
क्षेत्रीय महत्व और आगे की राह
रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार, दोनों पक्षों ने माना कि मजबूत समुद्री और रक्षा सहयोग क्षेत्र में शांतिपूर्ण, स्थिर और नियम-आधारित सुरक्षा व्यवस्था के लिए अपरिहार्य है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस बैठक से भारत-वियतनाम रक्षा संबंधों को नई गति मिलने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों की सामूहिक उपस्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।