भारत-वियतनाम तटरक्षक बलों की 7वीं उच्चस्तरीय बैठक, समुद्री खोज-बचाव और प्रदूषण पर साझा कार्ययोजना
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय तटरक्षक बल और वियतनाम तटरक्षक बल के बीच 25 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में 7वीं उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक आयोजित हुई, जिसमें समुद्री खोज एवं बचाव, समुद्री कानूनों का प्रवर्तन, समुद्री प्रदूषण नियंत्रण और क्षमता निर्माण जैसे अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। यह बैठक 2015 में दोनों देशों के बीच हस्ताक्षरित तटरक्षक सहयोग समझौता ज्ञापन के अंतर्गत आयोजित की गई।
बैठक का नेतृत्व और एजेंडा
बैठक की सह-अध्यक्षता भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि और वियतनाम तटरक्षक बल के उप कमांडेंट मेजर जनरल लुओंग दिन्ह हंग ने की। दोनों पक्षों ने अब तक चल रहे द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की, जिसमें अधिकारियों के बीच पेशेवर आदान-प्रदान, जहाजों की पारस्परिक यात्राएँ और संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हैं।
दोनों तटरक्षक बलों ने इस बात पर जोर दिया कि नियमित संस्थागत संपर्क से आपसी समझ और परिचालन भरोसा और मजबूत होगा। बैठक में इस बात पर भी सहमति बनी कि दोनों देश एक-दूसरे के अनुभवों और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों से सीखते रहेंगे।
संयुक्त अभ्यास 'सहयोग-हॉपटैक'
बैठक के ठीक बाद 27 अगस्त को दोनों देशों के तटरक्षक बलों के बीच संयुक्त समुद्री अभ्यास 'सहयोग-हॉपटैक' समुद्र में आयोजित किया जाएगा। यह अभ्यास दोनों बलों को अपनी परिचालन क्षमताओं को परखने और समुद्री अभियानों में समन्वय को धार देने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा।
गौरतलब है कि यह भारत में आयोजित होने वाली इस श्रृंखला की 7वीं ऐसी उच्चस्तरीय बैठक है, जो दोनों देशों के बीच एक दशक से अधिक समय से चले आ रहे समुद्री सहयोग की गहराई को दर्शाती है।
क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा पर प्रतिबद्धता
दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, समुद्री संरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई। जहाजों की पारस्परिक यात्राओं को समुद्री सहयोग बढ़ाने का प्रभावी माध्यम माना गया।
यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण चीन सागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा की चुनौतियाँ बढ़ती जा रही हैं, और भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति के तहत आसियान देशों के साथ सामरिक साझेदारी को प्राथमिकता दी जा रही है।
द्विपक्षीय संबंधों पर असर
दोनों देशों ने माना कि समुद्री क्षेत्र में बढ़ता सहयोग न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करता है, बल्कि पूरे क्षेत्र में एक सुरक्षित और स्थिर समुद्री वातावरण बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आने वाले समय में नियमित संस्थागत बातचीत और संयुक्त अभ्यासों की श्रृंखला को और विस्तार दिए जाने की उम्मीद है।