राम रहीम की 17वीं पैरोल पर SGPC के भाई मंजीत सिंह का सवाल, बंदी सिखों की रिहाई की माँग
सारांश
मुख्य बातें
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के सदस्य भाई मंजीत सिंह ने 25 अगस्त को अमृतसर में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को कथित तौर पर 17वीं बार पैरोल दिए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में कानून के इस्तेमाल को लेकर दोहरे मापदंड अपनाए जा रहे हैं — एक तरफ राम रहीम को बार-बार राहत मिल रही है, वहीं दशकों से जेलों में बंद सिख कैदियों की रिहाई पर सरकारें मौन हैं।
दोहरे मापदंड का आरोप
भाई मंजीत सिंह ने कहा कि देश में बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक समुदायों के लिए कानून का रवैया अलग-अलग है। उन्होंने कहा, 'सिख समुदाय ने देश की आज़ादी के लिए बड़ी संख्या में कुर्बानियाँ दीं, लेकिन आज़ादी के बाद किए गए कई वादे अधूरे रहे।' उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि विभाजन के समय सिखों को एक अलग क्षेत्र देने की बात कही गई थी, जिसे बाद में परिस्थितियों का हवाला देकर पूरा नहीं किया गया।
बंदी सिखों की स्थिति
भाई मंजीत सिंह ने जगतार सिंह हवारा, भाई बलवंत सिंह राजोआणा, प्रोफेसर देवेंद्र पाल सिंह भुल्लर और गुरदीप सिंह खेड़ा समेत अन्य बंदी सिखों का नाम लेते हुए कहा कि इनमें से कई कैदियों ने 32 से 33 वर्ष तक जेल में बिताए हैं और अपनी निर्धारित सजा भी पूरी कर ली है, फिर भी रिहाई नहीं हो रही। उन्होंने माँग की कि इन मामलों में सरकार मानवीय और कानूनी दृष्टिकोण अपनाए।
राजोआणा की फाँसी और अधूरे वादे
भाई मंजीत सिंह ने कहा कि गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के अवसर पर केंद्र सरकार ने बंदी सिखों की रिहाई और भाई बलवंत सिंह राजोआणा की फाँसी की सजा को उम्रकैद में बदलने का आश्वासन दिया था। प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री की ओर से भी इस संबंध में भरोसा दिलाया गया था, लेकिन ये वादे अब तक पूरी तरह अमल में नहीं लाए गए।
हवारा की माँ और मानवीय अधिकार
उन्होंने जगतार सिंह हवारा की माँ की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति का हवाला देते हुए सवाल किया कि ऐसी परिस्थिति में हवारा को परिवार से मिलने के लिए पैरोल क्यों नहीं दी जा रही। उन्होंने कहा कि किसी को एक-दो दिन की राहत की बात करना उनके लिए 'मज़ाक जैसा' है, और परिवार से मिलने का मानवीय अधिकार सभी को समान रूप से मिलना चाहिए।
2027 चुनाव और राजनीतिक हित
भाई मंजीत सिंह ने आरोप लगाया कि राम रहीम को बार-बार पैरोल देने के पीछे राजनीतिक हित जुड़े हो सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान भी राम रहीम को सुरक्षा के बीच पंजाब लाए जाने की संभावना हो सकती है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से अपील की कि देश में सभी नागरिकों के लिए कानून समान रूप से लागू हो और किसी भी समुदाय के साथ भेदभाव न हो। बंदी सिखों के मामलों पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए और जिन कैदियों ने अपनी सजा पूरी कर ली है, उनकी रिहाई पर उचित फैसला लिया जाना चाहिए।