25 अगस्त 2026
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राम रहीम की 17वीं पैरोल पर SGPC के भाई मंजीत सिंह का सवाल, बंदी सिखों की रिहाई की माँग

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राम रहीम की 17वीं पैरोल पर SGPC के भाई मंजीत सिंह का सवाल, बंदी सिखों की रिहाई की माँग

सारांश

SGPC सदस्य भाई मंजीत सिंह ने राम रहीम की कथित 17वीं पैरोल को दोहरे कानूनी मापदंडों का प्रतीक बताया। उनका सवाल सीधा है — जो सिख कैदी 32-33 साल जेल काट चुके हैं, उनकी रिहाई क्यों नहीं? 2027 चुनाव से पहले यह मुद्दा सिख समुदाय में गहरी राजनीतिक बेचैनी का संकेत है।

मुख्य बातें

SGPC सदस्य भाई मंजीत सिंह ने 25 अगस्त को अमृतसर में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को कथित तौर पर 17वीं बार पैरोल दिए जाने पर आपत्ति जताई।
जगतार सिंह हवारा , भाई बलवंत सिंह राजोआणा , प्रो.
देवेंद्र पाल सिंह भुल्लर और गुरदीप सिंह खेड़ा समेत कई सिख कैदी 32-33 वर्ष से जेल में बंद हैं।
गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर बंदी सिखों की रिहाई और राजोआणा की फाँसी को उम्रकैद में बदलने के वादे अब तक पूरे नहीं हुए।
भाई मंजीत सिंह ने 2027 पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले राम रहीम को पंजाब लाए जाने की संभावना जताई और इसे राजनीतिक हित से जोड़ा।
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से माँग की कि सभी नागरिकों के लिए कानून समान रूप से लागू हो।

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के सदस्य भाई मंजीत सिंह ने 25 अगस्त को अमृतसर में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को कथित तौर पर 17वीं बार पैरोल दिए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में कानून के इस्तेमाल को लेकर दोहरे मापदंड अपनाए जा रहे हैं — एक तरफ राम रहीम को बार-बार राहत मिल रही है, वहीं दशकों से जेलों में बंद सिख कैदियों की रिहाई पर सरकारें मौन हैं।

दोहरे मापदंड का आरोप

भाई मंजीत सिंह ने कहा कि देश में बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक समुदायों के लिए कानून का रवैया अलग-अलग है। उन्होंने कहा, 'सिख समुदाय ने देश की आज़ादी के लिए बड़ी संख्या में कुर्बानियाँ दीं, लेकिन आज़ादी के बाद किए गए कई वादे अधूरे रहे।' उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि विभाजन के समय सिखों को एक अलग क्षेत्र देने की बात कही गई थी, जिसे बाद में परिस्थितियों का हवाला देकर पूरा नहीं किया गया।

बंदी सिखों की स्थिति

भाई मंजीत सिंह ने जगतार सिंह हवारा, भाई बलवंत सिंह राजोआणा, प्रोफेसर देवेंद्र पाल सिंह भुल्लर और गुरदीप सिंह खेड़ा समेत अन्य बंदी सिखों का नाम लेते हुए कहा कि इनमें से कई कैदियों ने 32 से 33 वर्ष तक जेल में बिताए हैं और अपनी निर्धारित सजा भी पूरी कर ली है, फिर भी रिहाई नहीं हो रही। उन्होंने माँग की कि इन मामलों में सरकार मानवीय और कानूनी दृष्टिकोण अपनाए।

राजोआणा की फाँसी और अधूरे वादे

भाई मंजीत सिंह ने कहा कि गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के अवसर पर केंद्र सरकार ने बंदी सिखों की रिहाई और भाई बलवंत सिंह राजोआणा की फाँसी की सजा को उम्रकैद में बदलने का आश्वासन दिया था। प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री की ओर से भी इस संबंध में भरोसा दिलाया गया था, लेकिन ये वादे अब तक पूरी तरह अमल में नहीं लाए गए।

हवारा की माँ और मानवीय अधिकार

उन्होंने जगतार सिंह हवारा की माँ की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति का हवाला देते हुए सवाल किया कि ऐसी परिस्थिति में हवारा को परिवार से मिलने के लिए पैरोल क्यों नहीं दी जा रही। उन्होंने कहा कि किसी को एक-दो दिन की राहत की बात करना उनके लिए 'मज़ाक जैसा' है, और परिवार से मिलने का मानवीय अधिकार सभी को समान रूप से मिलना चाहिए।

2027 चुनाव और राजनीतिक हित

भाई मंजीत सिंह ने आरोप लगाया कि राम रहीम को बार-बार पैरोल देने के पीछे राजनीतिक हित जुड़े हो सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान भी राम रहीम को सुरक्षा के बीच पंजाब लाए जाने की संभावना हो सकती है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से अपील की कि देश में सभी नागरिकों के लिए कानून समान रूप से लागू हो और किसी भी समुदाय के साथ भेदभाव न हो। बंदी सिखों के मामलों पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए और जिन कैदियों ने अपनी सजा पूरी कर ली है, उनकी रिहाई पर उचित फैसला लिया जाना चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह संस्थागत विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। राम रहीम की बार-बार पैरोल और बंदी सिखों की निरंतर कैद — दोनों एक साथ चलते रहें और कोई जवाबदेही न हो, यह स्थिति कानून के समान शासन के सिद्धांत को कमज़ोर करती है। 2027 चुनाव से पहले यह मुद्दा और तीखा होगा — सरकारों को ठोस कदम उठाने होंगे, वरना यह असंतोष राजनीतिक रूप ले सकता है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुरमीत राम रहीम को कितनी बार पैरोल मिल चुकी है?
भाई मंजीत सिंह के दावे के अनुसार, डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को कथित तौर पर 17वीं बार पैरोल दी गई है। वह बलात्कार के दो मामलों में दोषी करार दिए जा चुके हैं और हरियाणा की जेल में सजा काट रहे हैं।
कौन-से बंदी सिख कैदी हैं जिनकी रिहाई की माँग हो रही है?
भाई मंजीत सिंह ने जगतार सिंह हवारा , भाई बलवंत सिंह राजोआणा , प्रोफेसर देवेंद्र पाल सिंह भुल्लर और गुरदीप सिंह खेड़ा का नाम लिया। इनमें से कई ने 32 से 33 वर्ष से अधिक समय जेल में बिताया है और अपनी निर्धारित सजा भी पूरी कर ली है।
गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर क्या वादे किए गए थे?
केंद्र सरकार की ओर से 550वें प्रकाश पर्व के अवसर पर बंदी सिखों की रिहाई और भाई बलवंत सिंह राजोआणा की फाँसी की सजा को उम्रकैद में बदलने का आश्वासन दिया गया था। प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री की ओर से भी भरोसा दिलाया गया था, लेकिन ये वादे अब तक पूरी तरह अमल में नहीं लाए गए।
SGPC के भाई मंजीत सिंह ने 2027 चुनाव का जिक्र क्यों किया?
भाई मंजीत सिंह ने आरोप लगाया कि राम रहीम को बार-बार पैरोल देने के पीछे राजनीतिक हित और वोट बैंक की राजनीति हो सकती है। उन्होंने दावा किया कि 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान भी राम रहीम को सुरक्षा के बीच पंजाब लाए जाने की संभावना हो सकती है।
जगतार सिंह हवारा को पैरोल क्यों नहीं मिल रही?
भाई मंजीत सिंह के अनुसार, जगतार सिंह हवारा की माँ गंभीर अवस्था में हैं, फिर भी हवारा को परिवार से मिलने के लिए पैरोल नहीं दी जा रही। उन्होंने इसे मानवीय अधिकारों का हनन बताते हुए सरकार से तत्काल संज्ञान लेने की माँग की।
राष्ट्र प्रेस
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